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ओडिशा डॉक्टर हड़ताल: बीजद का आरोप — सरकारी उदासीनता ने स्वास्थ्य सेवाएं ठप कीं, OMSA को बैठक का न्योता

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ओडिशा डॉक्टर हड़ताल: बीजद का आरोप — सरकारी उदासीनता ने स्वास्थ्य सेवाएं ठप कीं, OMSA को बैठक का न्योता

सारांश

ओडिशा में डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल तीसरे दिन भी जारी रही। बीजद ने सरकार पर 6 महीने की निष्क्रियता का आरोप लगाया। सरकार ने अब OMSA को शनिवार बैठक का न्योता दिया है — लेकिन सवाल यह है कि क्या इस बार लिखित आश्वासन मिलेगा।

मुख्य बातें

ओडिशा में OMSA की 10 सूत्री मांगों को लेकर 1 जुलाई 2026 से डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी है।
बीजद के वरिष्ठ उपाध्यक्ष देबी प्रसाद मिश्रा ने सरकार पर 6 महीने की उदासीनता का आरोप लगाया।
9 जनवरी 2026 की बैठक में गठित होने वाली समिति कभी बन नहीं सकी — संबंधित अधिकारी सेवानिवृत्त हो गए।
ओपीडी, आईपीडी, पोस्टमार्टम सहित स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित; बीजद ने किसी दुर्घटना की जिम्मेदारी सरकार पर डाली।
स्वास्थ्य मंत्री मुकेश महालिंग ने OMSA को 4 जुलाई, सुबह 11:30 बजे वार्ता के लिए आमंत्रित किया।

ओडिशा में डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण 3 जुलाई 2026 को स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित रहीं, जबकि विपक्षी बीजू जनता दल (बीजद) ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि सरकार की उदासीनता और लापरवाही के चलते पूरे राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है। ओडिशा मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन (OMSA) द्वारा 10 सूत्री मांगों को लेकर शुरू की गई यह हड़ताल बुधवार, 1 जुलाई से प्रभावी है।

मुख्य घटनाक्रम

बीजद के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री देबी प्रसाद मिश्रा ने शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि 9 जनवरी 2026 को स्वास्थ्य सचिव, स्वास्थ्य मंत्री और OMSA के पदाधिकारियों के बीच डॉक्टरों की मांगों पर बैठक हुई थी। उस बैठक में सरकार ने आश्वासन दिया था कि अतिरिक्त मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक समिति गठित की जाएगी और दो से तीन महीनों में समाधान निकाला जाएगा।

हालांकि, मिश्रा के अनुसार, वह समिति कभी बन ही नहीं सकी — क्योंकि संबंधित अतिरिक्त मुख्य सचिव पहले छुट्टी पर गए और बाद में सेवानिवृत्त हो गए। इस कारण छह महीने के इंतजार के बाद OMSA ने हड़ताल का नोटिस जारी किया।

सरकार की विफलता — बीजद का पक्ष

मिश्रा ने कहा कि 2 जून और 30 जून को हुई बैठकों में भी सरकार डॉक्टरों को कोई ठोस या लिखित प्रतिबद्धता देने में विफल रही। उनके अनुसार, सरकार की इसी निष्क्रियता ने डॉक्टरों को हड़ताल जारी रखने पर मजबूर किया।

बीजद ने आरोप लगाया कि पोस्टमार्टम से लेकर ओपीडी, आईपीडी, आउटडोर मरीजों का इलाज और भर्ती मरीजों की देखभाल — स्वास्थ्य सेवा का हर पहलू बुरी तरह प्रभावित हुआ है। मिश्रा ने चेतावनी दी कि यदि इस दौरान कोई दुर्भाग्यपूर्ण घटना होती है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार पर होगी।

सरकार की प्रतिक्रिया

एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने शुक्रवार को OMSA को पत्र लिखकर शनिवार, 4 जुलाई को सुबह 11:30 बजे स्वास्थ्य मंत्री मुकेश महालिंग के साथ वार्ता के लिए आमंत्रित किया। यह कदम हड़ताल के तीसरे दिन उठाया गया, जो आलोचकों के अनुसार पहले ही उठाया जाना चाहिए था।

आम जनता पर असर

यह हड़ताल ऐसे समय में आई है जब ओडिशा के सरकारी अस्पतालों पर ग्रामीण और गरीब तबके की भारी निर्भरता है। ओपीडी सेवाएं बंद होने से हजारों मरीज बिना इलाज के लौटने को मजबूर हुए। गौरतलब है कि OMSA ने यह हड़ताल राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस (1 जुलाई) से शुरू की — जो प्रतीकात्मक रूप से भी सरकार के लिए असहज संदेश है।

क्या होगा आगे

शनिवार की प्रस्तावित बैठक को हड़ताल समाप्त करने की दिशा में निर्णायक माना जा रहा है। यदि सरकार इस बार भी लिखित प्रतिबद्धता देने में विफल रही, तो हड़ताल और लंबी खिंच सकती है और राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर दबाव और बढ़ेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

समितियाँ घोषित होती हैं, लेकिन क्रियान्वयन की जिम्मेदारी किसी की नहीं होती। 9 जनवरी की बैठक से 1 जुलाई की हड़ताल तक का छह महीने का सफर बताता है कि सरकार ने समस्या को टाला, सुलझाया नहीं। अब जब हड़ताल तीसरे दिन में है और मरीज प्रभावित हो रहे हैं, तब बैठक का निमंत्रण भेजा जा रहा है — यह प्रतिक्रियाशील शासन का क्लासिक उदाहरण है। असली कसौटी शनिवार की बैठक में लिखित प्रतिबद्धता होगी, न कि एक और मौखिक आश्वासन।
RashtraPress
4 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओडिशा में डॉक्टरों की हड़ताल क्यों हो रही है?
ओडिशा मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन (OMSA) ने 10 सूत्री मांगों को लेकर 1 जुलाई 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की है। सरकार ने जनवरी 2026 में समिति गठन का आश्वासन दिया था, लेकिन छह महीने बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
इस हड़ताल से मरीजों पर क्या असर पड़ा है?
हड़ताल के कारण ओपीडी, आईपीडी, पोस्टमार्टम और भर्ती मरीजों की देखभाल सहित स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। सरकारी अस्पतालों पर निर्भर हजारों मरीज बिना इलाज के लौटने को मजबूर हुए हैं।
बीजद ने सरकार पर क्या आरोप लगाए हैं?
बीजद के वरिष्ठ उपाध्यक्ष देबी प्रसाद मिश्रा ने आरोप लगाया कि सरकार ने जनवरी 2026 में समिति गठन का वादा किया था, जो पूरा नहीं हुआ। 2 जून और 30 जून की बैठकों में भी कोई लिखित प्रतिबद्धता नहीं दी गई, जिससे डॉक्टरों के पास हड़ताल के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।
सरकार ने हड़ताल सुलझाने के लिए क्या कदम उठाया है?
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने शुक्रवार को OMSA को पत्र लिखकर 4 जुलाई को सुबह 11:30 बजे स्वास्थ्य मंत्री मुकेश महालिंग के साथ बैठक के लिए आमंत्रित किया है। यह बैठक हड़ताल समाप्त करने की दिशा में निर्णायक मानी जा रही है।
OMSA की 10 सूत्री मांगों पर पहले क्या हुआ था?
9 जनवरी 2026 को स्वास्थ्य सचिव, स्वास्थ्य मंत्री और OMSA के बीच बैठक हुई थी, जिसमें अतिरिक्त मुख्य सचिव की अध्यक्षता में समिति बनाने का आश्वासन दिया गया था। लेकिन संबंधित अधिकारी छुट्टी पर जाने के बाद सेवानिवृत्त हो गए और समिति कभी गठित नहीं हुई।
राष्ट्र प्रेस
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