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ओडिशा में 128 गैरहाजिर डॉक्टरों पर विभागीय कार्रवाई, 2012 से अनुपस्थित डॉ. पाणिग्रही बर्खास्त

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ओडिशा में 128 गैरहाजिर डॉक्टरों पर विभागीय कार्रवाई, 2012 से अनुपस्थित डॉ. पाणिग्रही बर्खास्त

सारांश

ओडिशा में सरकारी डॉक्टरों की अनुपस्थिति पर CM माझी का सबसे बड़ा प्रहार — 128 मेडिकल अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई और 2012 से गायब डॉ. पाणिग्रही की बर्खास्तगी। ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को पटरी पर लाने की दिशा में यह राज्य का अब तक का सबसे कड़ा कदम है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने 18 जून 2025 को 128 मेडिकल अधिकारियों और डेंटल सर्जनों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए।
ये सभी अधिकारी पाँच वर्ष या उससे अधिक समय से बिना अनुमति सरकारी सेवा से अनुपस्थित हैं।
कंधमाल पुलिस अस्पताल की पूर्व मेडिकल ऑफिसर डॉ.
बिचक्षणा पाणिग्रही को वर्ष 2012 से अनुपस्थिति के कारण सरकारी सेवा से बर्खास्त किया गया।
सरकार ने पहले समाचार पत्रों में सार्वजनिक नोटिस प्रकाशित कर जवाब माँगा था, संतोषजनक उत्तर न मिलने पर कार्रवाई हुई।
ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में चिकित्सकों की कमी और मरीजों की देखभाल पर पड़ रहे असर को इस कदम की मुख्य वजह बताया गया।

ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने 18 जून 2025 को राज्य के सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में पाँच वर्ष या उससे अधिक समय से बिना अनुमति अनुपस्थित चल रहे 128 मेडिकल अधिकारियों और डेंटल सर्जनों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही कंधमाल पुलिस अस्पताल की पूर्व मेडिकल ऑफिसर डॉ. बिचक्षणा पाणिग्रही को सरकारी सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है, जो वर्ष 2012 से अनधिकृत रूप से अनुपस्थित थीं।

मुख्य घटनाक्रम

मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, राज्य के विभिन्न सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में नियुक्त 128 अधिकारी लंबे समय से सेवा से नदारद हैं। सरकार ने इन अधिकारियों को अपनी स्थिति स्पष्ट करने का अवसर देने के लिए समाचार पत्रों में सार्वजनिक नोटिस प्रकाशित किए थे, लेकिन संतोषजनक जवाब न मिलने पर विभागीय कार्रवाई का निर्णय लिया गया।

डॉ. पाणिग्रही के मामले में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने कई बार नोटिस जारी कर अनुपस्थिति का कारण बताने और पुनः कार्यभार संभालने के निर्देश दिए, परंतु उन्होंने किसी भी नोटिस का संतोषजनक जवाब नहीं दिया। अधिकारियों के अनुसार, 13 वर्षों की अनधिकृत अनुपस्थिति को देखते हुए बर्खास्तगी का यह कदम अपरिहार्य था।

आम जनता पर असर

सरकार का मानना है कि डॉक्टरों की अनुपस्थिति का सीधा असर स्वास्थ्य सेवाओं और मरीजों की देखभाल पर पड़ता है। विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में चिकित्सकों की कमी से लोगों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था प्रभावित होती है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार नए अस्पतालों के निर्माण और मौजूदा चिकित्सा संस्थानों के आधुनिकीकरण में बड़े पैमाने पर निवेश कर रही है।

सरकार की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने स्पष्ट किया कि जनसेवा से जुड़े किसी भी कर्मचारी की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जब सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने में निवेश कर रही है, तब डॉक्टरों का लंबे समय तक ड्यूटी से गायब रहना गंभीर चिंता का विषय है। सरकार ने नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना और चिकित्सा शिक्षा के विस्तार को भी प्राथमिकताओं में शामिल बताया।

क्या होगा आगे

अधिकारियों का कहना है कि 128 मेडिकल अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जाँच प्रक्रिया शुरू की जाएगी और प्रत्येक मामले में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने संकेत दिया है कि स्वास्थ्य सेवाओं में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए भविष्य में भी ऐसे मामलों में सख्त रुख जारी रहेगा। गौरतलब है कि यह ओडिशा में सरकारी चिकित्सकों की अनुपस्थिति के विरुद्ध अब तक की सबसे बड़ी एकल कार्रवाई मानी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल भी उठता है कि 128 डॉक्टर पाँच या अधिक वर्षों तक बिना किसी प्रभावी जाँच के सेवा से गायब कैसे रहे — यह प्रशासनिक निगरानी की गहरी खामी को उजागर करता है। डॉ. पाणिग्रही का 2012 से अनुपस्थित रहना और 13 वर्षों बाद बर्खास्तगी यह दर्शाती है कि जवाबदेही तंत्र पहले से ही टूटा हुआ था। असली परीक्षा यह होगी कि क्या ये विभागीय कार्रवाइयाँ केवल कागजी खानापूर्ति बनकर रह जाती हैं या वास्तव में ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की उपस्थिति सुनिश्चित होती है।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओडिशा में 128 मेडिकल अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई क्यों हो रही है?
ये 128 मेडिकल अधिकारी और डेंटल सर्जन पाँच वर्ष या उससे अधिक समय से बिना अनुमति सरकारी ड्यूटी से अनुपस्थित हैं। सरकार ने सार्वजनिक नोटिस जारी कर जवाब माँगा था, परंतु संतोषजनक उत्तर न मिलने पर विभागीय कार्रवाई का निर्णय लिया गया।
डॉ. बिचक्षणा पाणिग्रही को क्यों बर्खास्त किया गया?
कंधमाल पुलिस अस्पताल की पूर्व मेडिकल ऑफिसर डॉ. बिचक्षणा पाणिग्रही वर्ष 2012 से बिना अनुमति ड्यूटी से अनुपस्थित थीं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के बार-बार नोटिस का संतोषजनक जवाब न देने पर मुख्यमंत्री ने उन्हें सरकारी सेवा से बर्खास्त करने का आदेश दिया।
डॉक्टरों की अनुपस्थिति का आम लोगों पर क्या असर पड़ता है?
सरकारी डॉक्टरों की अनुपस्थिति का सबसे अधिक असर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों पर पड़ता है, जहाँ पहले से ही चिकित्सकों की कमी है। ऐसे क्षेत्रों में मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था कमजोर होती है।
ओडिशा सरकार ने कार्रवाई से पहले क्या कदम उठाए थे?
सरकार ने अनुपस्थित अधिकारियों को अपनी स्थिति स्पष्ट करने का अवसर देने के लिए समाचार पत्रों में सार्वजनिक नोटिस प्रकाशित किए थे। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग ने व्यक्तिगत नोटिस भी जारी किए, लेकिन संतोषजनक जवाब न मिलने पर विभागीय कार्रवाई अनिवार्य हो गई।
मुख्यमंत्री माझी ने स्वास्थ्य क्षेत्र को लेकर क्या प्राथमिकताएँ बताई हैं?
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा है कि नए अस्पतालों का निर्माण, मौजूदा चिकित्सा संस्थानों का आधुनिकीकरण और नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनसेवा में लापरवाही को भविष्य में भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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