क्या बंगाल में बूथ पुनर्गठन पर चुनाव आयोग की सर्वदलीय बैठक से टीएमसी नाखुश है?

Click to start listening
क्या बंगाल में बूथ पुनर्गठन पर चुनाव आयोग की सर्वदलीय बैठक से टीएमसी नाखुश है?

सारांश

पश्चिम बंगाल में चुनावी तैयारी के लिए सर्वदलीय बैठक में महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। तृणमूल कांग्रेस ने बूथ पुनर्गठन पर चिंता जताई। क्या इस बैठक से टीएमसी की नाराजगी और बढ़ेगी?

Key Takeaways

  • बूथ पुनर्गठन से राज्य में बूथों की संख्या बढ़कर 94,497 होगी।
  • टीएमसी ने बूथों के स्थानांतरण पर आपत्ति जताई है।
  • आयोग ने शिकायतों के समाधान के लिए 8 सितंबर तक का समय दिया है।
  • भाजपा ने डीईओ पर सवाल उठाए हैं।
  • कांग्रेस ने हमले की कड़ी निंदा की है।

कोलकाता, 29 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। राज्य में होने वाले आगामी चुनावों के मद्देनजर, शुक्रवार को पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय में एक सर्वदलीय बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में तृणमूल कांग्रेस और अन्य प्रमुख विपक्षी दलों ने मतदान केंद्रों की व्यवस्था और बूथ संख्या बढ़ाने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की। लेकिन, एसआईआर पर कोई चर्चा नहीं की गई।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल ने बताया कि मतदान प्रवृत्ति में बदलाव को ध्यान में रखते हुए, राज्य में लगभग 14,000 नए बूथों की व्यवस्था की जा रही है।

पहले 80,681 बूथ थे। बूथों के पुनर्गठन के बाद 13,816 बूथ बढ़ने के परिणामस्वरूप, राज्य में बूथों की कुल संख्या 94,497 हो जाएगी।

उन्होंने राजनीतिक दलों को 8 सितंबर तक लिखित शिकायतें सौंपने का आह्वान किया है, ताकि शिकायतें जांच के बाद उचित कार्रवाई की जा सके। साथ ही, सीईओ ने जिला निर्वाचन अधिकारियों (डीईओ) को आपत्तियों के समाधान हेतु जिला-स्तरीय बैठकें आयोजित करने का निर्देश दिया।

टीएमसी के स्थानीय नेता अरूप विश्वास ने कहा कि पहले एक बूथ पर 1,500 से अधिक वोटर आते थे, लेकिन अब निर्वाचन आयोग के नए नियमों के अनुसार, प्रत्येक बूथ पर 1,200 वोटर होंगे। उन्होंने स्पष्ट किया, "हम बूथ बदलने पर आपत्ति नहीं रखते, लेकिन जो नए बूथ बनाए गए हैं, वे पहले वाले इसी मतदान केंद्र के अधीन रहने चाहिए। मतदाताओं को दो किलोमीटर दूर जाकर वोट डालने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए।"

उन्होंने एसआईआर को लेकर चिंता जताते हुए कहा, "निर्वाचन आयोग निष्पक्ष रूप से काम करे। अगर रेफरी ही ठीक नहीं है तो किसी को संतोष कैसे होगा? मतदान अधिकार को छीनने की कोशिश हो रही है। यह बैठक हमें संतुष्ट नहीं कर पाई। हम अपनी बात जाहिर कर चुके हैं।" टीएमसी नेता ने यह भी स्पष्ट किया कि बैठक में एसआईआर पर कोई एजेंडा नहीं रखा गया था। उनका स्पष्ट मत है, "पश्चिम बंगाल में एसआईआर नहीं होगा, एसआईआर के नाम पर किसी को लाभ नहीं मिलना चाहिए।"

बैठक के दौरान भाजपा प्रतिनिधियों और टीएमसी नेताओं के बीच बूथ लेआउट और अन्य मुद्दों पर वाद-विवाद की झलक देखने को मिली। भाजपा नेता शिशिर बजोरिया ने कहा, "24 जिलों के डीईओ का जवाब एक जैसा है। कोई शिकायत नहीं मिली। यह कैसे संभव है? सभी 24 डीईओ जिम्मेदार ठहराए जाएं।" उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बूथ स्तर अधिकारी (बीएलओ) की नियुक्तियां टीएमसी कार्यालय से की गई हैं।

बैठक के बाद आशुतोष चटर्जी ने कहा, "यह बैठक अधूरी रही। यह कैसे संभव है कि बूथ व्यवस्था पर जिले से कोई शिकायत नहीं आई? कुछ डीईओ टीएमसी के निर्देश पर काम कर रहे हैं।"

इसके अतिरिक्त, कांग्रेस नेताओं ने बैठक में भाजपा द्वारा कोलकाता स्थित कांग्रेस मुख्यालय पर किए गए हमले और तोड़फोड़ की कड़ी निंदा की। उन्होंने आरोपियों की पहचान कर शीघ्र गिरफ्तार करने की मांग की।

--आईएएनेस

वीकेयू/डीएससी

Point of View

यह समझना आवश्यक है कि राजनीतिक दलों के बीच संवाद की कमी लोकतंत्र के लिए हानिकारक हो सकती है। सभी दलों को एक मंच पर आकर समस्याओं का समाधान निकालने की आवश्यकता है। चुनाव आयोग को अपनी प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाना चाहिए ताकि सभी पक्ष संतुष्ट रहें।
NationPress
29/08/2025

Frequently Asked Questions

बूथ पुनर्गठन का उद्देश्य क्या है?
बूथ पुनर्गठन का उद्देश्य मतदान प्रक्रिया को अधिक सुगम बनाना और मतदाताओं की संख्या का उचित प्रबंधन करना है।
क्या टीएमसी ने बैठक में अपनी चिंताएं साझा की?
हाँ, टीएमसी ने बूथ पुनर्गठन और एसआईआर को लेकर अपनी चिंताएं बैठक में साझा की।
बैठक का मुख्य मुद्दा क्या था?
बैठक का मुख्य मुद्दा मतदान केंद्रों की व्यवस्था और बूथ संख्या बढ़ाने पर चर्चा करना था।
क्या भाजपा ने बैठक में कोई आरोप लगाए?
हाँ, भाजपा ने बूथ स्तर अधिकारी की नियुक्तियों पर टीएमसी पर आरोप लगाए।
बैठक के बाद कांग्रेस ने क्या किया?
कांग्रेस नेताओं ने भाजपा द्वारा कांग्रेस मुख्यालय पर किए गए हमले की निंदा की और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की।