ब्रज मोहन राम ने ओडिशा के राज्यपाल पद की शपथ ली, भुवनेश्वर में राजभवन में हुआ गरिमामय समारोह
सारांश
मुख्य बातें
ब्रज मोहन राम ने 18 अक्टूबर 2026 को भुवनेश्वर के राजभवन में आयोजित एक औपचारिक समारोह में ओडिशा के राज्यपाल के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ग्रहण की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी और अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
शपथ ग्रहण समारोह का विवरण
राजभवन, भुवनेश्वर में रविवार को आयोजित गरिमामय समारोह में ब्रज मोहन राम को विधि-विधान के साथ शपथ दिलाई गई। समारोह में राज्य के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के साथ-साथ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कई नेता भी सम्मिलित हुए। शपथ ग्रहण के बाद परिवार और पार्टी के हलकों में खुशी का माहौल देखा गया।
परिवार और पार्टी की प्रतिक्रिया
राज्यपाल के पुत्र अनिल कुमार ने अपने पिता के नए दायित्व पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा, 'आज मेरे पिता ने ओडिशा के राज्यपाल के रूप में शपथ ली है। वे राज्य के लिए बहुत कुछ करना चाहते हैं और उनके पास इसके विकास के लिए कई योजनाएं हैं।' अनिल कुमार ने यह भी कहा कि उनके पिता हमेशा जनसेवा और आदिवासी समाज के उत्थान के लिए समर्पित रहे हैं।
झारखंड भाजपा की प्रवक्ता डॉ. राजश्री जयंती ने नवनियुक्त राज्यपाल को बधाई देते हुए कहा, 'उनकी सादगी हमेशा से उनकी पहचान रही है। वे मेरे घर आए हैं और मैं भी उनके घर गई हूं, इसलिए हमारा रिश्ता एक परिवार जैसा है। अगर पार्टी का कोई साधारण कार्यकर्ता अपनी मामूली शुरुआत से उठकर सर्वोच्च पदों तक पहुंच सकता है, तो राज्यपाल ब्रज मोहन राम इस सफर का एक जीता-जागता उदाहरण हैं।'
राजनीतिक अनुभव और विरासत
ओडिशा के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने नए राज्यपाल के व्यापक राजनीतिक अनुभव की सराहना की। उन्होंने कहा, 'वे अतीत में तीन बार लोकसभा के लिए चुने गए थे। वे अविभाजित बिहार की विधानसभा के सदस्य भी रहे हैं। उन्होंने लंबे समय तक पार्टी के लिए काम किया है। शोषितों और विशेष रूप से आदिवासियों के उत्थान के लिए उनका योगदान पूरे देश को पता है।'
पुजारी ने आगे कहा कि राज्य सरकार राज्यपाल के अनुभव का भी लाभ उठाने का प्रयास करेगी, और स्वाभाविक रूप से ओडिशा के राज्यपाल के रूप में उनकी भूमिका राज्य के विकास में सहायक होगी। यह ऐसे समय में आया है जब ओडिशा में BJP सरकार विकास और आदिवासी कल्याण को अपनी प्राथमिकताओं में रख रही है।
आम जनता और आदिवासी समाज पर असर
गौरतलब है कि ब्रज मोहन राम का राजनीतिक सफर आदिवासी समुदाय और शोषित वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष से जुड़ा रहा है। राजभवन से राज्यपाल के रूप में उनकी उपस्थिति इन समुदायों के बीच उम्मीद जगाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि उनके लंबे संसदीय अनुभव और जमीनी संपर्क से राज्यपाल के संवैधानिक दायित्वों को नई दिशा मिल सकती है।
क्या होगा आगे
राज्यपाल ब्रज मोहन राम के समक्ष अब ओडिशा के संवैधानिक प्रमुख की जिम्मेदारियों का निर्वहन करने की चुनौती है। राज्य सरकार ने उनके अनुभव का लाभ उठाने की इच्छा व्यक्त की है। आने वाले दिनों में राज्यपाल की नीतिगत प्राथमिकताएं और राज्य सरकार के साथ समन्वय की दिशा स्पष्ट होगी।