12 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

ब्रज मोहन राम ओडिशा के नए राज्यपाल नियुक्त, पलामू से तीन बार रहे हैं लोकसभा सांसद

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
ब्रज मोहन राम ओडिशा के नए राज्यपाल नियुक्त, पलामू से तीन बार रहे हैं लोकसभा सांसद

सारांश

पलामू से तीन बार सांसद रहे BJP नेता ब्रज मोहन राम को 12 अक्टूबर को ओडिशा का राज्यपाल नियुक्त किया गया। वह डॉ. हरि बाबू कम्भम्पति का स्थान लेंगे। अनुसूचित जाति समुदाय से आने वाले इस वरिष्ठ नेता की नियुक्ति झारखंड और ओडिशा दोनों के राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई है।

मुख्य बातें

BJP नेता ब्रज मोहन राम को 12 अक्टूबर 2026 को ओडिशा का राज्यपाल नियुक्त किया गया।
वह निवर्तमान राज्यपाल डॉ.
हरि बाबू कम्भम्पति का स्थान लेंगे।
ब्रज मोहन राम पलामू से 11वीं, 12वीं और 13वीं लोकसभा के सदस्य रहे — 1996 से 2004 तक।
उन्होंने 1991–1995 तक बिहार विधानसभा में भी प्रतिनिधित्व किया।
वह झारखंड प्रदेश BJP के अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश प्रभारी भी रह चुके हैं।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और झारखंड के पलामू संसदीय क्षेत्र से तीन बार लोकसभा सांसद रह चुके ब्रज मोहन राम को ओडिशा का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। राष्ट्रपति भवन की ओर से 12 अक्टूबर 2026 को जारी अधिसूचना के ज़रिए इस नियुक्ति की आधिकारिक घोषणा की गई। वह निवर्तमान राज्यपाल डॉ. हरि बाबू कम्भम्पति का स्थान लेंगे।

कौन हैं ब्रज मोहन राम

ब्रज मोहन राम का जन्म 1 जनवरी 1958 को तत्कालीन बिहार के पलामू जिले के चंदवा में हुआ था, जो अब झारखंड के लातेहार जिले में आता है। उनके पिता का नाम अर्जुन राम बैठा और माता का नाम चैती देवी है। उन्होंने रांची विश्वविद्यालय से संबद्ध बीएस कॉलेज, लोहरदगा से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की।

राजनीतिक सफर

ब्रज मोहन राम ने अपनी राजनीतिक यात्रा अविभाजित बिहार से शुरू की। वह 1991 से 1995 तक बिहार विधानसभा के सदस्य रहे। इसके बाद उन्होंने पलामू संसदीय क्षेत्र से लोकसभा चुनाव में कदम रखा और लगातार तीन बार विजय प्राप्त की — 11वीं लोकसभा (1996–1998), 12वीं लोकसभा (1998–1999) और 13वीं लोकसभा (1999–2004)।

यह ऐसे समय में उल्लेखनीय है जब झारखंड की राजनीति में पलामू क्षेत्र का अनुसूचित जाति और जनजाति मतदाताओं के लिहाज से विशेष महत्व रहा है। गौरतलब है कि ब्रज मोहन राम अनुसूचित जाति समुदाय से आते हैं और इस वर्ग के राजनीतिक प्रतिनिधित्व में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती रही है।

संसदीय समितियों में भूमिका

अपने तीन संसदीय कार्यकालों के दौरान ब्रज मोहन राम ने ऊर्जा, रेलवे, परिवहन और पर्यटन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों से जुड़ी संसदीय समितियों में ज़िम्मेदारी निभाई। वह कोयला मंत्रालय की सलाहकार समिति तथा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के कल्याण से संबंधित संसदीय समिति के सदस्य भी रहे।

संगठनात्मक सक्रियता

संसद से बाहर भी ब्रज मोहन राम भाजपा संगठन में सक्रिय भूमिका निभाते रहे। उन्होंने झारखंड प्रदेश भाजपा के अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश प्रभारी सहित विभिन्न पदों पर काम किया।

झारखंड की राजनीति पर असर

ओडिशा के राज्यपाल के रूप में उनकी नियुक्ति से झारखंड के राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। पलामू का प्रतिनिधित्व कर चुके एक वरिष्ठ नेता को संवैधानिक पद की ज़िम्मेदारी सौंपा जाना राज्य के राजनीतिक परिदृश्य के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले दिनों में वह ओडिशा के राज्यपाल के रूप में कार्यभार ग्रहण करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि ओडिशा में भी यही सामाजिक समीकरण निर्णायक भूमिका निभाते हैं। गौरतलब है कि 2024 के ओडिशा विधानसभा चुनाव में BJP की ऐतिहासिक जीत के बाद राज्य में पार्टी के लिए राज भवन की भूमिका और संवेदनशील हो गई है। ब्रज मोहन राम का अनुसूचित जाति मोर्चे में अनुभव इस नियुक्ति को सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि सामाजिक संतुलन की दृष्टि से भी प्रासंगिक बनाता है।
RashtraPress
12 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ब्रज मोहन राम को किस पद पर नियुक्त किया गया है?
ब्रज मोहन राम को ओडिशा का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। राष्ट्रपति भवन की ओर से 12 अक्टूबर 2026 को जारी अधिसूचना में इसकी घोषणा की गई।
ब्रज मोहन राम कौन हैं और उनका राजनीतिक अनुभव क्या है?
ब्रज मोहन राम BJP के वरिष्ठ नेता हैं जो झारखंड के पलामू से 1996 से 2004 के बीच तीन बार लोकसभा सांसद रहे। इससे पहले वह 1991 से 1995 तक बिहार विधानसभा के सदस्य भी थे।
ओडिशा में ब्रज मोहन राम किसकी जगह लेंगे?
ब्रज मोहन राम निवर्तमान राज्यपाल डॉ. हरि बाबू कम्भम्पति का स्थान लेंगे। नई नियुक्ति की अधिसूचना 12 अक्टूबर 2026 को जारी की गई।
ब्रज मोहन राम का संसदीय कार्यकाल किन समितियों से जुड़ा रहा?
अपने तीन लोकसभा कार्यकालों के दौरान ब्रज मोहन राम ऊर्जा, रेलवे, परिवहन और पर्यटन समितियों से जुड़े रहे। वह कोयला मंत्रालय की सलाहकार समिति और अनुसूचित जाति-जनजाति कल्याण समिति के सदस्य भी रहे।
इस नियुक्ति का झारखंड की राजनीति पर क्या असर है?
पलामू क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके एक वरिष्ठ नेता को संवैधानिक पद मिलने से झारखंड के राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। ब्रज मोहन राम अनुसूचित जाति समुदाय से आते हैं और झारखंड प्रदेश BJP में SC मोर्चे के प्रदेश प्रभारी भी रह चुके हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 3 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 5 महीने पहले
  7. 6 महीने पहले
  8. 1 साल पहले