ब्रज मोहन राम ओडिशा के नए राज्यपाल नियुक्त, झारखंड भाजपा में उत्साह; प्रदेश अध्यक्ष ने दी बधाई
सारांश
मुख्य बातें
पलामू के पूर्व सांसद और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता ब्रज मोहन राम को ओडिशा का राज्यपाल नियुक्त किए जाने पर झारखंड भाजपा में हर्ष का माहौल है। राष्ट्रपति भवन से 12 अक्टूबर 2026 को जारी आधिकारिक अधिसूचना के तहत उन्हें इस संवैधानिक पद पर नियुक्त किया गया है। वह निवर्तमान राज्यपाल डॉ. हरि बाबू कम्भम्पति का स्थान लेंगे।
प्रदेश अध्यक्ष की शिष्टाचार भेंट
झारखंड भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने मंगलवार, 13 अक्टूबर को रांची के मोरहाबादी स्थित आवास पर ब्रज मोहन राम से शिष्टाचार भेंट की और उन्हें बधाई दी। साहू ने कहा कि ब्रज मोहन राम का दीर्घ राजनीतिक एवं सार्वजनिक जीवन का अनुभव ओडिशा के विकास, सुशासन और जनकल्याण के प्रयासों में उपयोगी साबित होगा।
मरांडी समेत कई नेताओं ने दी शुभकामनाएँ
झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने भी उम्मीद जताई कि ब्रज मोहन राम अपने अनुभव के आधार पर राज्यपाल के संवैधानिक दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन करेंगे। पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी उन्हें शुभकामनाएँ अर्पित कीं।
ब्रज मोहन राम का राजनीतिक सफर
1 जनवरी 1958 को तत्कालीन बिहार के पलामू जिले के चंदवा में जन्मे ब्रज मोहन राम का राजनीतिक सफर अविभाजित बिहार से शुरू हुआ। वह 1991 से 1995 तक बिहार विधानसभा के सदस्य रहे। इसके पश्चात उन्होंने पलामू संसदीय क्षेत्र से लोकसभा चुनाव लड़ा और लगातार तीन बार विजय प्राप्त की।
वह 1996-1998 में 11वीं लोकसभा, 1998-1999 में 12वीं लोकसभा और 1999-2004 में 13वीं लोकसभा के सदस्य रहे। अपने संसदीय कार्यकाल के दौरान उन्होंने ऊर्जा, रेलवे, परिवहन और पर्यटन से संबंधित संसदीय समितियों में सक्रिय भूमिका निभाई।
संसदीय समितियों में योगदान
ब्रज मोहन राम कोयला मंत्रालय की सलाहकार समिति के सदस्य रहे, साथ ही अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के कल्याण से जुड़ी संसदीय समितियों में भी उन्होंने अपना योगदान दिया। संगठन स्तर पर वह झारखंड प्रदेश भाजपा के अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश प्रभारी के रूप में भी कार्यरत रहे।
झारखंड के राजनीतिक हलकों में महत्व
गौरतलब है कि ब्रज मोहन राम की नियुक्ति को झारखंड के राजनीतिक हलकों में भी विशेष महत्व दिया जा रहा है, क्योंकि यह राज्य के एक वरिष्ठ भाजपा नेता को संवैधानिक पद पर स्थान मिलने का अवसर है। उनके दीर्घ संसदीय अनुभव और अनुसूचित जाति-जनजाति कल्याण के क्षेत्र में किए गए कार्यों को देखते हुए ओडिशा में उनसे व्यापक अपेक्षाएँ हैं।