पुरुषों में भी होता है ब्रेस्ट कैंसर: WHO के आँकड़े, लक्षण और बचाव की पूरी जानकारी
सारांश
मुख्य बातें
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, ब्रेस्ट कैंसर केवल महिलाओं की बीमारी नहीं है — पुरुष भी इसकी चपेट में आ सकते हैं। ब्रेस्ट कैंसर जागरूकता माह (अक्टूबर 2026) के अवसर पर WHO के आँकड़े याद दिलाते हैं कि ब्रेस्ट कैंसर के कुल मामलों में 0.5 से 1 प्रतिशत मामले पुरुषों में होते हैं — एक आँकड़ा जो छोटा दिखने के बावजूद उपेक्षा का हकदार नहीं है। समय पर पहचान और सही इलाज से इस बीमारी को काबू में लाया जा सकता है।
वैश्विक परिदृश्य: कितना बड़ा है खतरा
WHO के अनुसार, वर्ष 2022 में दुनियाभर में 23 लाख महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का पता चला, जबकि लगभग 6.70 लाख महिलाओं की इस बीमारी से मृत्यु हुई। ब्रेस्ट कैंसर महिलाओं में सर्वाधिक पाए जाने वाले कैंसरों में से एक बना हुआ है।
इन्हीं आँकड़ों के अनुसार, 99 प्रतिशत मामले महिलाओं में दर्ज होते हैं, जबकि शेष 0.5 से 1 प्रतिशत पुरुषों में। संख्या के आधार पर यह कम लग सकता है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता की कमी के चलते पुरुषों में इस बीमारी की पहचान अक्सर देर से होती है, जिससे उपचार की जटिलता बढ़ जाती है।
पुरुषों में दिखने वाले लक्षण
पुरुषों में भी स्तन ऊतक (breast tissue) होता है, और उसमें कैंसरकारी बदलाव हो सकते हैं। WHO के अनुसार निम्नलिखित लक्षणों को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए:
स्तन में गाँठ या कठोरता, निप्पल के आसपास असामान्य बदलाव, निप्पल से किसी प्रकार का स्राव (discharge), अथवा त्वचा में असामान्य परिवर्तन जैसे लालिमा या सिकुड़न। गौरतलब है कि महिलाओं की तुलना में मामले कम होने के कारण पुरुष अक्सर इन संकेतों को गंभीरता से नहीं लेते, जो देर से निदान का प्रमुख कारण बनता है।
उपचार: महिलाओं जैसे ही सिद्धांत
WHO का स्पष्ट कहना है कि पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर का उपचार बीमारी की अवस्था और प्रकार के आधार पर होता है, और इसके मूल सिद्धांत महिलाओं में अपनाए जाने वाले उपचार के अनुरूप ही होते हैं। इसमें सर्जरी, रेडियोथेरेपी, कीमोथेरेपी और हॉर्मोन थेरेपी शामिल हो सकती है। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब पुरुष स्वास्थ्य को लेकर समाज में जागरूकता अपेक्षाकृत कम बनी हुई है।
शुरुआती पहचान क्यों है सबसे अहम
विशेषज्ञों के अनुसार, ब्रेस्ट कैंसर के विरुद्ध सबसे बड़ा हथियार शुरुआती पहचान है। यदि बीमारी प्रारंभिक चरण में पकड़ में आ जाए, तो इलाज की सफलता दर काफी अधिक होती है। हालाँकि, आँकड़ों के अनुसार अलग-अलग देशों में सर्वाइवल दर में बड़ा अंतर है — और इसका मुख्य कारण समय पर जाँच, सटीक निदान और प्रभावी उपचार तक समान पहुँच का अभाव है।
यही वजह है कि WHO समेत वैश्विक स्वास्थ्य संगठन हर वर्ष अक्टूबर माह को ब्रेस्ट कैंसर जागरूकता माह के रूप में मनाते हैं — ताकि महिलाएँ और पुरुष दोनों अपने शरीर में होने वाले असामान्य बदलावों के प्रति सचेत रहें और समय पर चिकित्सीय सलाह लें।
आम जनता पर असर और आगे की राह
ब्रेस्ट कैंसर को 'केवल महिलाओं की बीमारी' मानने की सामाजिक धारणा पुरुषों में देर से निदान की सबसे बड़ी बाधा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि पुरुषों को भी नियमित स्व-परीक्षण (self-examination) और असामान्य लक्षणों पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श की आदत डालनी चाहिए। जागरूकता अभियानों में पुरुषों को भी शामिल करना इस बीमारी से लड़ाई को अधिक समावेशी और प्रभावी बना सकता है।