ब्रिक्स संसदीय फोरम 26 अक्टूबर से नई दिल्ली में, लिकटेंस्टीन राजकुमार की यात्रा और ऑस्ट्राहिंद अभ्यास भी जारी
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली में 26 और 27 अक्टूबर 2026 को आयोजित होने वाला 12वाँ ब्रिक्स संसदीय फोरम, लिकटेंस्टीन के वंशानुगत राजकुमार एलोइस की भारत यात्रा और केरल में जारी भारत-ऑस्ट्रेलिया संयुक्त सैन्य अभ्यास ऑस्ट्राहिंद 2026 — ये तीन घटनाएँ आने वाले सप्ताह को भारत की कूटनीति और सुरक्षा साझेदारी के लिए असाधारण रूप से महत्वपूर्ण बनाती हैं। 26 अक्टूबर से 1 नवंबर के बीच एक साथ चल रही इन तीन गतिविधियों में बहुपक्षीय संसदीय संवाद, द्विपक्षीय राजनयिक संबंधों की मजबूती और रक्षा अंतर-संचालन — तीनों आयाम समाहित हैं।
12वाँ ब्रिक्स संसदीय फोरम: मुख्य घटनाक्रम
नई दिल्ली में 26 और 27 अक्टूबर को आयोजित इस फोरम की थीम 'जन-केंद्रित विकास के लिए संसदों को सशक्त बनाना' रखी गई है। ब्रिक्स सदस्य देशों और साझेदार देशों के संसदीय प्रतिनिधि इसमें भाग लेंगे। चर्चा के केंद्र में संसदीय सहयोग, विकास संबंधी प्राथमिकताएँ और बहुपक्षीय मंचों पर समन्वय बढ़ाने के उपाय रहने की उम्मीद है।
यह ऐसे समय में आया है जब ब्रिक्स के विस्तार के बाद समूह में नए साझेदार देश शामिल हुए हैं और संगठन की प्रासंगिकता एवं दिशा पर बहस जारी है। भारत के लिए यह मंच सदस्य देशों के साथ संसदीय स्तर पर संवाद को औपचारिक रूप देने का अवसर है। गौरतलब है कि कार्यपालिका-स्तरीय शिखर सम्मेलनों की तुलना में संसदीय फोरम विधायी सहयोग और लोकतांत्रिक संस्थाओं के बीच सेतु-निर्माण में अधिक प्रत्यक्ष भूमिका निभाते हैं।
द्विपक्षीय बैठकों के माध्यम से भाग लेने वाले देशों के बीच व्यक्तिगत स्तर पर संपर्क और समझ बढ़ाने की भी संभावना जताई जा रही है।
लिकटेंस्टीन राजकुमार एलोइस की भारत यात्रा
लिकटेंस्टीन के वंशानुगत राजकुमार और कार्यकारी राष्ट्राध्यक्ष एलोइस 25 से 28 अक्टूबर तक भारत की राजकीय यात्रा पर हैं। यह यात्रा दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों को नई ऊर्जा देने और आर्थिक सहयोग की संभावनाओं को आगे बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
यूरोप के छोटे लेकिन आर्थिक रूप से संपन्न देश लिकटेंस्टीन के साथ भारत के संबंधों में व्यापार, निवेश और वित्तीय क्षेत्र में सहयोग की विशेष संभावनाएँ हैं। दोनों पक्षों के बीच इन्हीं क्षेत्रों में विचार-विमर्श की उम्मीद है। इस यात्रा के दौरान परस्पर हित के विषयों पर सहयोग के नए अवसर तलाशे जाने की संभावना है।
ऑस्ट्राहिंद 2026: भारत-ऑस्ट्रेलिया संयुक्त सैन्य अभ्यास
भारत और ऑस्ट्रेलिया की सेनाएँ केरल के तिरुवनंतपुरम स्थित फॉरेन ट्रेनिंग नोड में संयुक्त अभ्यास ऑस्ट्राहिंद 2026 के पाँचवें संस्करण में हिस्सा ले रही हैं। दो सप्ताह तक चलने वाला यह अभ्यास 1 नवंबर तक जारी रहेगा। इसमें दोनों देशों के लगभग 240 सैन्यकर्मी भाग ले रहे हैं।
अभ्यास का प्रमुख उद्देश्य दोनों सेनाओं के बीच सामरिक समन्वय और अंतर-संचालन क्षमता को मजबूत करना है। प्रशिक्षण में जंगल, द्वीपीय और तटीय क्षेत्रों जैसी विविध परिस्थितियों में संयुक्त अभियानों से संबंधित कौशल पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रक्षा सहयोग पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय रूप से गहरा हुआ है। ऑस्ट्राहिंद जैसे नियमित संयुक्त अभ्यास इस साझेदारी की नींव हैं, जो दोनों देशों को एक-दूसरे की संचालन प्रक्रियाओं से परिचित कराते हैं और साझा सुरक्षा चुनौतियों से निपटने की क्षमता बढ़ाते हैं।
भारत की कूटनीति पर असर
एक ही सप्ताह में बहुपक्षीय, द्विपक्षीय और सैन्य सहयोग — तीनों मोर्चों पर सक्रियता भारत की 'बहु-संरेखण' (multi-alignment) नीति को व्यवहार में दर्शाती है। ब्रिक्स के वैश्विक दक्षिण के साथ जुड़ाव, यूरोपीय भागीदारी की विविधता और ऑस्ट्रेलिया के साथ इंडो-पैसिफिक सुरक्षा समन्वय — सभी एक साथ आगे बढ़ रहे हैं।
यह ऐसे समय में विशेष रूप से उल्लेखनीय है जब वैश्विक स्तर पर गठबंधनों और साझेदारियों की पुनर्परिभाषा हो रही है। आने वाले दिनों में इन गतिविधियों के परिणाम भारत की विदेश नीति की दिशा का संकेत देंगे।