लखनऊ में ब्रिक्स NSO प्रमुखों की बैठक: भारत करेगा 3-4 अगस्त को अध्यक्षता, 11 देश होंगे शामिल
सारांश
मुख्य बातें
भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालयों (NSO) के प्रमुखों की बैठक 3 से 4 अगस्त 2026 को लखनऊ, उत्तर प्रदेश में आयोजित की जा रही है। इस बैठक में ब्राजील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात सहित कुल 11 ब्रिक्स सदस्य देशों के प्रतिनिधियों के भाग लेने की उम्मीद है।
बैठक का विषय और उद्देश्य
2026 में भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का व्यापक विषय है — 'लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण'। ब्रिक्स सांख्यिकी कार्यक्रम के अंतर्गत भारत ने 'परिवर्तन के चालक के रूप में गुणवत्तापूर्ण सांख्यिकी' विषय अपनाया है। यह विषय डेटा की गुणवत्ता, नवाचार, प्रभावी प्रसार और जन-केंद्रित सांख्यिकीय प्रणालियों के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।
गौरतलब है कि यह विषय-चयन तीव्र तकनीकी प्रगति, उच्च आवृत्ति डेटा की बढ़ती माँग और साक्ष्य-आधारित, टिकाऊ व समावेशी विकास के लिए आधिकारिक सांख्यिकी पर बढ़ती निर्भरता के संदर्भ में किया गया है।
ब्रिक्स सांख्यिकी सहयोग की पृष्ठभूमि
2010 से ब्रिक्स सदस्य देश सुलभ और सामंजस्यपूर्ण डेटा उपलब्ध कराने के लिए संयुक्त सांख्यिकी प्रकाशन (JSP) और स्नैपशॉट ब्रिक्स JSP (जो 2020 में शुरू हुआ) प्रकाशित करते आए हैं। समय के साथ यह सहयोग बुनियादी डेटा संग्रह से आगे बढ़कर डेटा मानकों, सामंजस्य और नवाचार पर गहन समन्वय की दिशा में विकसित हुआ है।
इससे पहले 16-17 अप्रैल 2026 को एक तकनीकी बैठक आयोजित की गई थी, जिसका उद्देश्य JSP 2026 और स्नैपशॉट 2026 के लिए एक पारस्परिक रूप से सहमत ढाँचा विकसित करना, जिम्मेदारियों का आवंटन तय करना और प्रत्येक NSO के योगदान की समय-सीमा निर्धारित करना था।
प्राथमिकता क्षेत्र
ब्रिक्स सांख्यिकी ट्रैक के अंतर्गत इस बैठक में चार प्रमुख प्राथमिकता क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा:
पहला, ब्रिक्स के प्रमुख सांख्यिकी उत्पादों को सुदृढ़ करना। दूसरा, राष्ट्रीय सांख्यिकी प्रणालियों में नवाचार और सुधार। तीसरा, आँकड़ों का प्रसार और सुलभता। चौथा, व्यापक आर्थिक और क्षेत्रीय सांख्यिकी को मजबूत करना।
सहायक कार्यक्रम: AI और प्रशासनिक डेटा पर विशेष सत्र
NSO प्रमुखों की बैठक के साथ-साथ दो आधे दिन के सहायक कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। इनमें ब्रिक्स देशों के NSO, नीति निर्माता, शिक्षाविद, थिंक टैंक, नागरिक समाज संगठन और तकनीकी विशेषज्ञ भाग लेंगे। इन सत्रों का विषय है — 'विकसित हो रहे डेटा पारिस्थितिकी तंत्र में प्रशासनिक और AI तत्परता की क्षमता को उजागर करना'।
यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब वैश्विक स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बिग डेटा का सरकारी सांख्यिकी में उपयोग तेज़ी से बढ़ रहा है। लखनऊ में होने वाली यह बैठक ब्रिक्स देशों के बीच डेटा-संचालित नीति निर्माण को और सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।