क्या जम्मू-कश्मीर के सांबा सेक्टर में बीएसएफ जवानों ने ग्रामीणों के साथ लोहड़ी का पर्व मनाया?
सारांश
Key Takeaways
- लोहड़ी का पर्व एकता और खुशी का प्रतीक है।
- बीएसएफ ने ग्रामीणों के साथ मिलकर भाईचारे का संदेश दिया।
- ऐसे आयोजन मानवीयता को मजबूत करते हैं।
- सुरक्षाकर्मियों और ग्रामीणों के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव बढ़ता है।
- लोहड़ी के अवसर पर सभी ने शांति की कामना की।
श्रीनगर, 13 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। जम्मू-कश्मीर के सांबा सेक्टर में अंतरराष्ट्रीय सीमा के निकट एक अद्वितीय दृश्य देखने को मिला, जहाँ स्थानीय ग्रामीणों ने बीएसएफ के जवानों के साथ मिलकर लोहड़ी का पर्व बड़े उत्साह के साथ मनाया।
ठंडी हवाओं और सीमा की चुनौतियों के बावजूद, इस क्षेत्र के लोग और सुरक्षाकर्मी एक साथ बोन फायर के चारों ओर एकत्र हुए। बीएसएफ के जवानों ने इस अवसर पर पूरे देशवासियों को दिल से लोहड़ी की शुभकामनाएँ दीं।
उन्होंने कहा कि यह त्योहार एकता, खुशी और नई शुरुआत का प्रतीक है। स्थानीय निवासियों ने पारंपरिक गीत गाए, ढोल की थाप पर नृत्य किया और मूंगफली, रेवड़ी और गुड़ की आहुति दी। यह उत्सव सीमा पर तैनात जवानों और आसपास के गांवों के बीच भाईचारे का एक मजबूत उदाहरण बना।
ऐसे आयोजनों से सीमा की कठिन परिस्थितियों में भी मानवीयता और सांस्कृतिक जुड़ाव को मजबूती मिलती है। इस मौके पर सभी ने शांति, समृद्धि और सुरक्षा की कामना की।
बीएसएफ के जवानों ने न्यूज एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बात करते हुए कहा कि हर त्योहार पर गांव के लोग हमारे पास आते हैं। हमें यह बहुत अच्छा लगता है। हम महसूस करते हैं कि जैसे हमारा परिवार हमारे पास आ गया है। गांव के लोग हमेशा हमारे साथ खड़े रहते हैं। हमारी भी इच्छा रहती है कि हम गांव वालों के साथ रहें।
एक अन्य जवान ने कहा कि हम गांव वालों के साथ लोहड़ी मनाकर बहुत प्रसन्न हैं। हमने पहले गांव वालों के साथ विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इसके बाद गांव वालों की ओर से लाया गया प्रसाद सभी जवानों को दिया गया। सभी लोग बहुत खुश हैं और सभी का सहयोग भी बहुत मिल रहा है।
ग्रामीणों ने कहा कि हमें जवानों के साथ त्योहार मनाना अच्छा लगता है। वे अपने परिवार से दूर रहकर हमारी सुरक्षा करते हैं, इसलिए हम हमेशा उनकी सहायता करने के लिए तैयार रहते हैं।