खाड़ी देशों के CBSE छात्रों के 12वीं परिणाम पर नीति बनाएगी सरकार, सुप्रीम कोर्ट में 22 जून तक स्थगन
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने शुक्रवार, 12 जून 2026 को सर्वोच्च न्यायालय को सूचित किया कि पश्चिम एशिया (खाड़ी देशों) में निवासरत सीबीएसई के निजी छात्रों की कक्षा 12 की परीक्षा के परिणाम घोषित करने हेतु एक नई नीति तैयार की जा रही है। इन छात्रों के परिणाम क्षेत्र में जारी युद्ध जैसी परिस्थितियों के कारण अब तक घोषित नहीं हो सके हैं, जिससे उनकी उच्च शिक्षा की संभावनाएँ प्रभावित हो रही हैं।
अदालत में सरकार का पक्ष
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सर्वोच्च न्यायालय से अनुरोध किया कि इस मामले की सुनवाई 22 जून 2026 तक स्थगित की जाए। उन्होंने अदालत को आश्वस्त किया कि सरकार याचिका में उठाए गए विभिन्न मुद्दों पर गंभीरता से विचार कर रही है। सरकार न केवल मौजूदा प्रभावित छात्रों के लिए, बल्कि भविष्य में ऐसी विषम परिस्थितियों में फँसने वाले छात्रों के लिए भी एक समान और व्यापक नीति बनाने पर विचार कर रही है।
परीक्षाएँ क्यों रद्द हुईं
मार्च 2026 में क्षेत्रीय सुरक्षा संकट को देखते हुए सीबीएसई ने पश्चिम एशिया के कई देशों में कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षाएँ रद्द कर दी थीं। बोर्ड ने 1 मार्च के बाद जारी अपने छठे परिपत्र में स्पष्ट किया था कि पहले स्थगित किए गए प्रश्नपत्र भी रद्द माने जाएँगे।
15 मार्च 2026 को जारी अधिसूचना के अनुसार, 16 मार्च से 10 अप्रैल 2026 के बीच बहरीन, ईरान, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) स्थित सीबीएसई संबद्ध स्कूलों की परीक्षाएँ रद्द की गई थीं।
मुख्य याचिका और न्यायालय का संज्ञान
8 जून 2026 को सर्वोच्च न्यायालय ने सऊदी अरब के कक्षा 12 के छात्र प्रांशु जिगरकुमार पटेल की याचिका पर सीबीएसई और उसके दुबई स्थित क्षेत्रीय कार्यालय को नोटिस जारी किया था। न्यायमूर्ति मनमोहन और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की पीठ ने दोनों से जवाब माँगा था।
संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर इस याचिका में प्रांशु पटेल ने कहा है कि परिणाम घोषित न होने से उनकी उच्च शिक्षा की संभावनाएँ बाधित हुई हैं और वे विभिन्न संस्थानों में प्रवेश के अवसरों से वंचित हो गए हैं।
सीबीएसई का तकनीकी पेच
पिछली सुनवाई में सीबीएसई की ओर से अदालत को बताया गया था कि याचिकाकर्ता छात्र का मूल्यांकन संबंधित स्कूल द्वारा किया जाना आवश्यक था, किंतु वे एक निजी अभ्यर्थी के रूप में परीक्षा में शामिल हुए थे। इस कारण उनका कोई स्कूल रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है, जिससे मूल्यांकन प्रक्रिया में बाधा आ रही है। यह ऐसे समय में आया है जब इस वर्ष सीबीएसई बोर्ड परीक्षाओं में कुल 43.7 लाख से अधिक छात्रों ने पंजीकरण कराया था — इनमें लगभग 25.1 लाख छात्र कक्षा 10 और करीब 18.6 लाख छात्र कक्षा 12 की परीक्षा में शामिल हुए थे।
आगे क्या होगा
मामले की अगली सुनवाई 22 जून 2026 को होनी है, जब सरकार अपनी प्रस्तावित नीति का ब्यौरा अदालत के समक्ष प्रस्तुत करेगी। गौरतलब है कि यह मामला केवल एक छात्र तक सीमित नहीं है — खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में ऐसे निजी अभ्यर्थी हैं जिनके परिणाम अधर में लटके हैं और जिनके कॉलेज प्रवेश की समय-सीमा निकट आती जा रही है।