चेम्बरमबक्कम झील में जलस्तर घटकर 35%, अधिकारियों ने चेन्नई में पानी संकट से किया इनकार
सारांश
मुख्य बातें
चेन्नई के प्रमुख जल स्रोतों में शामिल चेम्बरमबक्कम झील का जलस्तर कम वर्षा के कारण अपनी कुल क्षमता के मात्र 35 प्रतिशत तक सिमट गया है, हालाँकि जल आपूर्ति अधिकारियों ने 14 अक्टूबर को स्पष्ट किया कि निवासियों को फिलहाल पीने के पानी की किल्लत का सामना नहीं करना पड़ेगा। झील और खदान स्रोतों के समन्वित उपयोग से शहर की आपूर्ति व्यवस्था को बनाए रखा जा रहा है।
जलाशय की मौजूदा स्थिति
मंगलवार को दर्ज आँकड़ों के अनुसार, चेम्बरमबक्कम झील की कुल भंडारण क्षमता 3,645 मिलियन क्यूबिक फीट है, जिसके मुकाबले झील में वर्तमान में केवल 1,275 मिलियन क्यूबिक फीट पानी उपलब्ध है। यह स्थिति कम बारिश के प्रत्यक्ष असर को दर्शाती है।
पानी के स्तर में यह गिरावट झील के स्लुइस स्ट्रक्चर (जल प्रवाह नियंत्रण ढाँचे) के आसपास स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। पाँच-वेंट और 19-वेंट वाले स्लुइस के निकटवर्ती क्षेत्र सूख गए हैं, जो जलाशय में आई उल्लेखनीय कमी का संकेत देते हैं।
आपूर्ति व्यवस्था कैसे बनी हुई है
अधिकारियों के अनुसार, इस समय चेम्बरमबक्कम झील और सिक्कारायपुरम खदानों दोनों स्रोतों से पानी उपचारित कर शहर में वितरित किया जा रहा है। खदान के पानी का योगदान आपूर्ति श्रृंखला में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, जिससे झील पर अत्यधिक निर्भरता कम होती है।
चेम्बरमबक्कम से निकाले गए पानी को शहर के वितरण नेटवर्क तक भेजने से पहले प्रतिदिन उपचार किया जाता है। अधिकारियों ने बताया कि उपलब्ध भंडारण के अनुरूप पानी निकालने की मात्रा को समायोजित किया जा रहा है।
सरकारी आश्वासन और निगरानी
जल प्रबंधन अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि जलाशय के निचले स्तर का अर्थ यह नहीं है कि चेन्नई को तत्काल पेयजल संकट का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान आपूर्ति व्यवस्था के तहत निवासियों को पीने के पानी का वितरण निर्बाध रूप से जारी है।
यह आश्वासन ऐसे समय में आया है जब झील के स्लुइस के आसपास सूखे हिस्से बदले हुए हालात की साफ तस्वीर पेश कर रहे हैं। गौरतलब है कि अधिकारी जलाशय के भंडारण स्तर पर लगातार नज़र रख रहे हैं और आपूर्ति-निकासी का संतुलन बनाए हुए हैं।
आम जनता पर असर
फिलहाल चेन्नई के निवासियों को दैनिक जल वितरण में कोई व्यवधान नहीं आया है। चेम्बरमबक्कम झील शहर की पेयजल प्रणाली की रीढ़ मानी जाती है और इसके जलस्तर में कोई भी बड़ा बदलाव लाखों निवासियों की दिनचर्या को प्रभावित कर सकता है।
यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिण भारत के कई हिस्सों में इस मौसम में अपेक्षित वर्षा नहीं हुई है और जल संरक्षण को लेकर चिंताएँ बढ़ रही हैं।
आगे क्या होगा
अधिकारियों ने संकेत दिया है कि स्थिति की निरंतर समीक्षा की जाएगी और आपूर्ति की मात्रा का प्रबंधन उपलब्ध जल भंडारण के अनुसार किया जाएगा। यदि आगामी सप्ताहों में वर्षा नहीं होती, तो खदान स्रोतों पर निर्भरता बढ़ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि दीर्घकालिक जल सुरक्षा के लिए जलाशय पुनर्भरण और विविध स्रोत प्रबंधन दोनों आवश्यक हैं।