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मांबलम नहर की सफाई: चेन्नई नगर निगम का ₹46.7 लाख का अभियान, क्षमता 200 से 500 क्यूसेक करने का लक्ष्य

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मांबलम नहर की सफाई: चेन्नई नगर निगम का ₹46.7 लाख का अभियान, क्षमता 200 से 500 क्यूसेक करने का लक्ष्य

सारांश

चेन्नई नगर निगम मानसून से पहले मांबलम नहर को ₹46.7 लाख की लागत से गहरा और चौड़ा करेगा। लक्ष्य है नहर की क्षमता 200 से 500 क्यूसेक करना — लेकिन यह पहल CAG द्वारा पहले के ₹59.4 करोड़ के अधूरे जीर्णोद्धार पर उठाए गए सवालों की छाया में शुरू हो रही है।

मुख्य बातें

ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन (GCC) उत्तर-पूर्वी मानसून से पहले मांबलम नहर की सफाई पर ₹46.7 लाख खर्च करेगा।
5.7 किलोमीटर लंबी नहर की क्षमता 200 क्यूसेक से बढ़ाकर 500 क्यूसेक करने का लक्ष्य।
टी नगर, वेस्ट मांबलम, नंदनम और सैदापेट के बाढ़-प्रवण इलाकों को मिलेगी राहत।
रोबोटिक एक्सकेवेटर से गाद सफाई; पहला चरण वल्लुवर कोट्टम के पास 300 मीटर से शुरू।
CAG ने पहले के ₹59.4 करोड़ के जीर्णोद्धार में खामियाँ पाई थीं; ठेकेदार पर कोई कार्रवाई नहीं हुई थी।
नहर के किनारे अभी भी नौ अतिक्रमण शेष; GCC नोटिस जारी करने की तैयारी में।

ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन (GCC) उत्तर-पूर्वी मानसून से पहले मांबलम नहर की व्यापक सफाई और जीर्णोद्धार के लिए ₹46.7 लाख का अभियान शुरू करने जा रहा है, जिसका उद्देश्य 5.7 किलोमीटर लंबी इस नहर की जल-वहन क्षमता को मौजूदा 200 क्यूसेक से बढ़ाकर लगभग 500 क्यूसेक करना है। यह पहल टी नगर, वेस्ट मांबलम, नंदनम और सैदापेट जैसे बाढ़-प्रवण इलाकों को राहत देने के लिए की जा रही है, जहाँ हर मानसून में जलभराव एक गंभीर समस्या बन जाती है।

क्या है इस अभियान में

निगम की योजना के तहत नहर में जमी गाद को हटाया जाएगा और कुछ हिस्सों को करीब चार फीट तक गहरा किया जाएगा। वेंकटनारायण रोड और सीआईटी नगर में पुलियों के भीतर की रुकावटें भी साफ की जाएंगी, ताकि बारिश के पानी की निकासी निर्बाध हो सके। इस कार्य के लिए टेंडर आमंत्रित किए जा चुके हैं और जल्द ही ठेकेदार का चयन किया जाएगा।

एक महत्वपूर्ण कार्य YMCA परिसर के पास नहर के मुहाने को चौड़ा करना भी है, जहाँ यह अड्यार नदी में मिलती है। इस निकास को चौड़ा करने से तेज बारिश के दौरान रिहायशी और व्यावसायिक क्षेत्रों में पानी भरने की समस्या कम होने की उम्मीद है।

रोबोटिक तकनीक से होगी गाद की सफाई

गाद निकालने के लिए कई रोबोटिक एक्सकेवेटर तैनात किए जाएंगे। पहला चरण वल्लुवर कोट्टम के पास से आरंभ होगा, जहाँ लगभग 300 मीटर लंबे हिस्से की सफाई होगी। यह खंड नहर का सबसे संकरा भाग है, जिसकी चौड़ाई मात्र तीन मीटर है। इसके साथ बज़ुल्लाह रोड और वेंकटनारायण रोड के पास भी सफाई और चौड़ीकरण का काम होगा।

इस परियोजना में चेन्नई मेट्रो रेल भी सहयोग करेगी, जो पनागल पार्क–नंदनम अंडरग्राउंड मेट्रो कॉरिडोर के निर्माण क्षेत्र के निकट नहर के एक हिस्से की सफाई में निगम की मदद करेगी।

अतिक्रमण और कानूनी कार्रवाई

नहर के किनारे अभी भी करीब नौ अतिक्रमण बताए जा रहे हैं, जिनमें थियागराया रोड सेक्शन में एक मंदिर का ढाँचा भी शामिल है। GCC का तेनामपेट ज़ोन जलमार्ग में बाधा डाल रहे ढाँचों को हटाने के लिए नोटिस जारी करने की तैयारी में है। गौरतलब है कि एमजीआर सालई और जीएन चेट्टी रोड के किनारे पहले कुछ अतिक्रमण हटाने के बाद नहर की क्षमता 138 क्यूसेक से बढ़कर 200 क्यूसेक तक पहुँची थी।

CAG रिपोर्ट का संदर्भ और जवाबदेही

यह नया अभियान ऐसे समय में शुरू हो रहा है, जब नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने चेन्नई के स्मार्ट सिटी प्रोग्राम के तहत नहर के पहले के जीर्णोद्धार में गंभीर खामियाँ उजागर की हैं। रिपोर्ट के अनुसार, ₹59.4 करोड़ खर्च करने के बावजूद योजना का बड़ा हिस्सा अधूरा रहा। हाल ही में तमिलनाडु विधानसभा में पेश इस ऑडिट रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि निगम ने अधूरे प्रोजेक्ट के लिए ज़िम्मेदार ठेकेदार के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। यह नई पहल उन पुरानी चूकों को सुधारने और बाढ़-रोकथाम उपायों को पुख्ता करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

अब देखना होगा कि इस बार टेंडर प्रक्रिया, ठेकेदार की जवाबदेही और कार्य की समय-सीमा पर निगम कितनी सख्ती बरतता है — क्योंकि चेन्नई के लाखों निवासी मानसून से पहले ठोस परिणाम की उम्मीद रखते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी असली परीक्षा जवाबदेही की है — क्योंकि CAG पहले ही ₹59.4 करोड़ के अधूरे जीर्णोद्धार और ठेकेदार पर कोई कार्रवाई न होने की बात उजागर कर चुका है। नहर की क्षमता 138 से 200 क्यूसेक तक पहुँचने में वर्षों लगे और वह भी आंशिक अतिक्रमण हटाने से — तो 500 क्यूसेक का लक्ष्य बिना सख्त निगरानी तंत्र के महज कागज़ी वादा बन सकता है। नौ अतिक्रमणों में मंदिर ढाँचे जैसी संवेदनशील बाधाएँ शामिल हैं, जिन्हें हटाना राजनीतिक इच्छाशक्ति की माँग करता है। चेन्नई के मानसूनी संकट का समाधान सिर्फ रोबोटिक मशीनों से नहीं, बल्कि पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया और ठोस दंड-विधान से होगा।
RashtraPress
20 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मांबलम नहर सफाई अभियान क्या है और इसकी लागत कितनी है?
ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन (GCC) उत्तर-पूर्वी मानसून से पहले 5.7 किलोमीटर लंबी मांबलम नहर की गाद निकालने और चौड़ीकरण के लिए ₹46.7 लाख का अभियान शुरू करने जा रहा है। इसका लक्ष्य नहर की जल-वहन क्षमता 200 क्यूसेक से बढ़ाकर 500 क्यूसेक करना है।
इस परियोजना से किन इलाकों को फायदा मिलेगा?
टी नगर, वेस्ट मांबलम, नंदनम और सैदापेट के बाढ़-प्रवण इलाकों को इस परियोजना से सबसे अधिक राहत मिलने की उम्मीद है। ये सभी इलाके मांबलम नहर के किनारे स्थित हैं और हर मानसून में जलभराव की समस्या झेलते हैं।
CAG की रिपोर्ट में मांबलम नहर को लेकर क्या खामियाँ पाई गई थीं?
CAG ने पाया कि चेन्नई के स्मार्ट सिटी प्रोग्राम के तहत ₹59.4 करोड़ खर्च करने के बावजूद मांबलम नहर का जीर्णोद्धार अधूरा रहा। तमिलनाडु विधानसभा में पेश ऑडिट रिपोर्ट में यह भी उजागर हुआ कि निगम ने ज़िम्मेदार ठेकेदार के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।
नहर की सफाई में किस तकनीक का इस्तेमाल होगा और काम कहाँ से शुरू होगा?
गाद निकालने के लिए रोबोटिक एक्सकेवेटर तैनात किए जाएंगे। पहला चरण वल्लुवर कोट्टम के पास लगभग 300 मीटर के सबसे संकरे हिस्से (चौड़ाई मात्र तीन मीटर) से शुरू होगा, इसके बाद बज़ुल्लाह रोड और वेंकटनारायण रोड के पास काम होगा।
नहर के किनारे अतिक्रमण की क्या स्थिति है?
नहर के किनारे अभी भी करीब नौ अतिक्रमण बताए जा रहे हैं, जिनमें थियागराया रोड सेक्शन में एक मंदिर का ढाँचा भी शामिल है। GCC का तेनामपेट ज़ोन जलमार्ग में बाधा बन रहे ढाँचों को हटाने के लिए नोटिस जारी करने की तैयारी कर रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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