सेलम में चेक डैम क्षतिग्रस्त: दो सिंचाई झीलें सूखीं, किसानों ने जल संसाधन विभाग से तत्काल मरम्मत की मांग की
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु के सेलम जिले में थिरुमनिमुथारु नदी पर कोंडलमपट्टी के पास बना चेक डैम क्षतिग्रस्त होने से कोट्टानाथन झील और पूलावरी झील — दो प्रमुख सिंचाई जलाशय — लगभग सूख गई हैं। 26 जुलाई 2026 को स्थानीय किसानों ने जल संसाधन विभाग और सेलम सिटी म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन से चेक डैम की तत्काल मरम्मत कराने की माँग की है। किसानों का कहना है कि पर्याप्त वर्षा के बावजूद ये झीलें रिचार्ज नहीं हो पा रहीं और सिंचाई व भूजल — दोनों पर सीधा असर पड़ रहा है।
मुख्य घटनाक्रम
थिरुमनिमुथारु नदी शेवरॉय पहाड़ियों से निकलती है, सेलम शहर से गुजरती है और अंततः कावेरी नदी में मिल जाती है। पहले कोंडलमपट्टी चेक डैम नदी का पानी रोककर उसे नेइक्कारपट्टी हेड स्लुइस के माध्यम से कोट्टानाथन झील तक पहुँचाता था। वहाँ से अतिरिक्त जल पूलावरी झील में जाता था, जिससे आसपास के गाँवों में खेती के लिए निरंतर जलापूर्ति होती थी और भूजल स्तर भी बना रहता था।
किसानों के अनुसार, चेक डैम के क्षतिग्रस्त होने से अब नदी का पानी सीधे आगे बह जाता है और आपूर्ति नहर में प्रवेश नहीं कर पाता। 2012 में बनाया गया नेइक्कारपट्टी हेड स्लुइस तब तक प्रभावी नहीं है जब तक चेक डैम पानी को रोकने में सक्षम न हो।
ब्यूटीफिकेशन परियोजना पर किसानों का आरोप
किसानों का आरोप है कि सेलम सिटी म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन की थिरुमनिमुथारु रिवर ब्यूटीफिकेशन परियोजना के दौरान चेक डैम को आंशिक नुकसान पहुँचा। परियोजना के अंतर्गत नदी के किनारे रिटेनिंग वॉल बनाई गई और बहाव में रुकावटें हटाई गईं, परंतु क्षतिग्रस्त चेक डैम की मरम्मत नहीं हुई। इसके परिणामस्वरूप दशकों पुरानी पारंपरिक सिंचाई व्यवस्था बाधित हो गई।
जल गुणवत्ता और नहर की स्थिति
किसानों ने यह भी बताया कि आपूर्ति नहर और नदी के कई हिस्सों में झाड़ियाँ और घनी वनस्पति उग आई है, जिससे जल प्रवाह और बाधित हो गया है। इसके अलावा, कई स्थानों पर नदी में अनुपचारित गंदा पानी छोड़े जाने से जल गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है, जो कृषि उपयोग के लिए अतिरिक्त चिंता का विषय है।
सरकार की प्रतिक्रिया
सेलम जल संसाधन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नेइक्कारपट्टी आपूर्ति नहर के जीर्णोद्धार का प्रस्ताव राज्य सरकार की बजट घोषणा के अंतर्गत पहले ही भेजा जा चुका है। परियोजना का विस्तृत अनुमान तैयार कर प्रशासनिक मंजूरी के लिए प्रेषित कर दिया गया है। विभाग को उम्मीद है कि मंजूरी और आवश्यक धनराशि मिलते ही मरम्मत और नवीनीकरण का काम शुरू हो जाएगा।
किसानों पर असर और आगे की राह
किसानों का कहना है कि यदि चेक डैम की मरम्मत और आपूर्ति नहर की सफाई हो जाए, तो सिंचाई व्यवस्था पुनर्जीवित हो सकती है, भूजल स्तर में सुधार होगा और मानसून का पानी खेती के काम आएगा। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब तमिलनाडु में भूजल की कमी एक बड़ी चुनौती बन चुकी है। प्रशासनिक मंजूरी की गति ही तय करेगी कि इस खरीफ सीजन में किसानों को राहत मिल पाती है या नहीं।