पद्मश्री आदिवासी किसान चेरुवयल रमन का निधन, केरल CM सतीशन बोले — 'अपूरणीय क्षति'
सारांश
मुख्य बातें
पारंपरिक धान की 50 से अधिक किस्मों के संरक्षक और पद्मश्री से सम्मानित आदिवासी किसान चेरुवयल रमन का 14 अक्टूबर 2026 को निधन हो गया। 74 वर्षीय रमन का कोझिकोड मेडिकल कॉलेज अस्पताल में उपचार के दौरान देहांत हुआ। उनके जाने से केरल ने अपनी कृषि विरासत का एक अप्रतिम संरक्षक खो दिया।
कौन थे चेरुवयल रमन
वायनाड की माटी से जुड़े चेरुवयल रमन ने प्राथमिक स्तर तक ही औपचारिक शिक्षा प्राप्त की, लेकिन दशकों के व्यावहारिक अनुभव के बल पर पारंपरिक धान की खेती के क्षेत्र में एक विशिष्ट पहचान बनाई। वह अपनी जमीन पर दुर्लभ धान की किस्में उगाते और उनके बीजों को सावधानीपूर्वक संग्रहीत रखते, ताकि ये भविष्य की पीढ़ियों के लिए उपलब्ध रहें। उनके इस अथक प्रयास ने देश-विदेश के शोधकर्ताओं, कृषि विशेषज्ञों और जिज्ञासु आगंतुकों को उनके खेत तक खींचा।
पद्मश्री और ओमन चांडी पुरस्कार
भारत सरकार ने स्वदेशी धान की किस्मों और पारंपरिक कृषि पद्धतियों के संरक्षण में उनके असाधारण योगदान को मान्यता देते हुए वर्ष 2023 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया। इसके अतिरिक्त, केरल की वर्तमान यूडीएफ सरकार ने उन्हें पहला ओमन चांडी स्मृति कृषि पुरस्कार प्रदान किया, जिसकी घोषणा सरकार के सत्तारूढ़ होने के बाद चिंगम महीने में की गई थी।
मुख्यमंत्री सतीशन की श्रद्धांजलि
केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने शोक संदेश में कहा कि रमन ने उन पारंपरिक धान की किस्मों को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाया, जो अन्यथा लुप्त हो जातीं। सतीशन के अनुसार, रमन ने अपने जीवन से यह सिद्ध किया कि खेती केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि मिट्टी और प्रकृति के प्रति एक गहरी जिम्मेदारी भी है। मुख्यमंत्री ने उनके निधन को केरल के कृषि क्षेत्र और विरासत संरक्षण के लिए अपूरणीय क्षति बताया।
सतीशन ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा, 'उनके द्वारा संरक्षित किया गया हर बीज आने वाली पीढ़ियों के लिए उम्मीद लेकर चलता है। मिट्टी में उस उम्मीद को जीवित रखना ही उन्हें दी जाने वाली सबसे बड़ी श्रद्धांजलि है।'
कृषि विरासत के लिए महत्व
गौरतलब है कि केरल में पारंपरिक धान की किस्में तेज़ी से उच्च-उपज वाली हाइब्रिड फसलों की जगह खोती जा रही हैं। रमन जैसे संरक्षकों के प्रयास न केवल जैव-विविधता की दृष्टि से, बल्कि खाद्य सुरक्षा और सांस्कृतिक पहचान की दृष्टि से भी अमूल्य माने जाते हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, पारंपरिक बीज बैंक जलवायु परिवर्तन के विरुद्ध दीर्घकालिक कृषि लचीलेपन की आधारशिला हैं।
आगे की राह
रमन के निधन के बाद उनके द्वारा संरक्षित दुर्लभ धान की किस्मों के भविष्य पर सवाल उठने लगे हैं। कृषि विशेषज्ञ और स्थानीय समुदाय उनकी विरासत को जीवित रखने की दिशा में प्रयासों को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दे रहे हैं। केरल सरकार से अपेक्षा है कि वह उनके बीज संग्रह और ज्ञान को संस्थागत रूप से संरक्षित करने की पहल करे।