26 जुलाई 2026
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सुप्रीम कोर्ट का आदेश: हाथी 'रमन' की अभिरक्षा केरल सरकार को, केयरटेकर कृष्णनकुट्टी अवमानना के दोषी

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सुप्रीम कोर्ट का आदेश: हाथी 'रमन' की अभिरक्षा केरल सरकार को, केयरटेकर कृष्णनकुट्टी अवमानना के दोषी

सारांश

सर्वोच्च न्यायालय ने हाथी 'रमन' मामले में कड़ा रुख अपनाया — केयरटेकर कृष्णनकुट्टी अवमानना के दोषी, केरल सरकार को अभिरक्षा का आदेश। अदालत ने कहा: मूक जीवों की भलाई से समझौता नहीं होगा।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 10 जून 2026 को केयरटेकर कृष्णनकुट्टी को अदालत की अवमानना का दोषी ठहराया और ₹2,000 जुर्माना लगाया।
केरल सरकार को हाथी 'रमन' की अस्थायी अभिरक्षा लेकर उसे उपयुक्त रेस्क्यू या पुनर्वास केंद्र में रखने का निर्देश।
कृष्णनकुट्टी ने अगस्त 2025 में दिए आश्वासन का उल्लंघन किया — 3 फरवरी 2026 को चावक्काड मंदिर उत्सव में 'रमन' को ले जाया गया।
स्वामित्व विवाद: याचिकाकर्ता जयकृष्ण मेनन का दावा है कि 'रमन' माता अमृतानंदमयी मठ का हाथी है।
राज्य सरकार के अधिकारियों को अवमानना मामले से मुक्त किया गया; देखभाल का खर्च वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत सरकार उठाएगी।

सर्वोच्च न्यायालय ने 10 जून 2026 को बंदी हाथी 'रमन' के केयरटेकर कृष्णनकुट्टी को अदालत की अवमानना का दोषी ठहराते हुए केरल सरकार को निर्देश दिया कि वह हाथी की अस्थायी अभिरक्षा तत्काल अपने हाथ में ले और उसे किसी उपयुक्त रेस्क्यू या पुनर्वास केंद्र में रखे। अदालत ने कृष्णनकुट्टी पर ₹2,000 का जुर्माना भी लगाया है।

मुख्य घटनाक्रम

न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति एस.सी. शर्मा की पीठ ने पाया कि कृष्णनकुट्टी ने अगस्त 2025 में सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष दिए गए उस आश्वासन का जानबूझकर उल्लंघन किया, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया था कि स्वामित्व विवाद के अंतिम निर्णय तक हाथी 'रमन' का उपयोग किसी भी व्यावसायिक या मंदिर-संबंधी गतिविधि में नहीं किया जाएगा।

याचिकाकर्ता जयकृष्ण मेनन का दावा है कि 'रमन' माता अमृतानंदमयी मठ का हाथी है और उसे केवल देखभाल के लिए अस्थायी रूप से कृष्णनकुट्टी को सौंपा गया था। याचिका में आरोप लगाया गया था कि अदालती आदेश के बावजूद 'रमन' को मंदिर उत्सवों, धार्मिक जुलूसों और व्यावसायिक आयोजनों में इस्तेमाल किया गया।

साक्ष्य और स्वीकारोक्ति

अदालत के समक्ष तस्वीरें, पोस्टर, सोशल मीडिया पोस्ट और प्रचार सामग्री प्रस्तुत की गई। केरल सरकार की रिपोर्ट में सामने आया कि 3 फरवरी 2026 को 'रमन' को चावक्काड स्थित एक मंदिर उत्सव में ले जाया गया था, जहाँ बाद में उसका पशु चिकित्सा परीक्षण भी किया गया।

कृष्णनकुट्टी ने आरोपों से इनकार किया, परंतु अपने लिखित बयान में स्वीकार किया कि एक अवसर पर दूसरे हाथी की अनुपस्थिति के कारण 'रमन' को मंदिर समारोह में ले जाया गया था और 'मस्त' अवधि समाप्त होने के बाद उसने एक मंदिर अनुष्ठान में भाग लिया था। उन्होंने अदालत से बिना शर्त माफी भी माँगी।

अदालत की टिप्पणी

पीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि केरल के सबसे ऊँचे हाथियों में गिने जाने वाले 'रमन' का इस प्रकार व्यावसायिक उपयोग किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। पीठ ने कहा, "यदि हम ऐसे उल्लंघन पर आँखें मूँद लें तो यह मूक जीवों के प्रति अपने कर्तव्य से विमुख होना होगा। विशेषकर उन जानवरों के मामले में, जिनकी भलाई भी सर्वोपरि है।"

सरकार और अधिकारियों पर निर्णय

अदालत ने राज्य सरकार के अधिकारियों को अवमानना मामले से मुक्त कर दिया, यह कहते हुए कि उनकी ओर से आदेश की जानबूझकर अवहेलना का कोई प्रमाण नहीं मिला। हालाँकि, केरल सरकार को निर्देशित किया गया है कि वह वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के प्रावधानों के तहत 'रमन' की देखभाल अपने खर्च पर करे।

आगे क्या होगा

अदालत ने स्पष्ट किया कि केरल सरकार द्वारा 'रमन' की अभिरक्षा अस्थायी है और स्वामित्व विवाद के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगी। गौरतलब है कि यह मामला बंदी हाथियों के अधिकार और उनके व्यावसायिक दोहन पर देशभर में बढ़ती न्यायिक सक्रियता के व्यापक संदर्भ में आया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन अवमानना की सीधी कार्रवाई एक नई मिसाल कायम करती है। असली सवाल यह है कि क्या राज्य सरकार के पास पर्याप्त पुनर्वास अवसंरचना है — और क्या स्वामित्व विवाद का अंतिम निर्णय 'रमन' जैसे हाथियों के भविष्य के लिए एक स्थायी नीतिगत ढाँचा तय करेगा।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हाथी 'रमन' विवाद क्या है?
यह केरल के बंदी हाथी 'रमन' की अभिरक्षा और स्वामित्व को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में चल रहा मामला है। याचिकाकर्ता जयकृष्ण मेनन का दावा है कि 'रमन' माता अमृतानंदमयी मठ का हाथी है, जिसे केवल देखभाल के लिए अस्थायी रूप से कृष्णनकुट्टी को सौंपा गया था।
कृष्णनकुट्टी को अवमानना का दोषी क्यों ठहराया गया?
कृष्णनकुट्टी ने अगस्त 2025 में सर्वोच्च न्यायालय को दिए आश्वासन का उल्लंघन किया, जिसमें कहा गया था कि स्वामित्व विवाद लंबित रहने तक 'रमन' का उपयोग किसी व्यावसायिक या मंदिर गतिविधि में नहीं होगा। 3 फरवरी 2026 को चावक्काड मंदिर उत्सव में 'रमन' को ले जाया गया, जो इस आश्वासन का सीधा उल्लंघन था।
केरल सरकार को क्या करना होगा?
सर्वोच्च न्यायालय ने केरल सरकार को निर्देश दिया है कि वह 'रमन' की अस्थायी अभिरक्षा लेकर उसे किसी उपयुक्त रेस्क्यू या पुनर्वास केंद्र में रखे। देखभाल का पूरा खर्च वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के प्रावधानों के तहत सरकार को उठाना होगा।
क्या यह अभिरक्षा व्यवस्था स्थायी है?
नहीं, अदालत ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था पूरी तरह अस्थायी है और स्वामित्व विवाद के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगी। जब तक मामले का अंतिम फैसला नहीं आता, केरल सरकार 'रमन' की देखभाल करेगी।
राज्य सरकार के अधिकारियों पर क्या कार्रवाई हुई?
सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य सरकार के अधिकारियों को अवमानना मामले से मुक्त कर दिया। अदालत ने कहा कि उनकी ओर से अदालती आदेश की जानबूझकर अवहेलना का कोई प्रमाण नहीं मिला।
राष्ट्र प्रेस
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