अवध ओझा का ऐलान: पतंजलि अकादमी में UPSC के साथ मिलेगा 'प्लान बी', वैकल्पिक करियर भी सिखाएंगे
सारांश
मुख्य बातें
शिक्षाविद् और आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व नेता अवध ओझा ने 15 जून 2026 को नई दिल्ली में कहा कि पतंजलि समूह की प्रस्तावित अकादमी पारंपरिक कोचिंग संस्थानों से बिल्कुल अलग होगी — यहाँ सिविल सेवा की तैयारी के साथ-साथ छात्रों के लिए एक ठोस 'प्लान बी' भी तैयार किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि नया एकेडमिक मॉडल केवल परीक्षा-केंद्रित नहीं, बल्कि समग्र विकास पर आधारित होगा।
नए एकेडमिक मॉडल में क्या होगा खास
ओझा के अनुसार, इस संस्थान में क्लासरूम सत्र समाप्त होने के बाद भी छात्रों को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा। स्पोर्ट्स, योग, लाइब्रेरी और मेंटल हेल्थ काउंसलिंग जैसी सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएंगी। उन्होंने कहा कि एक सुव्यवस्थित 'प्लान बी' सिस्टम विकसित किया जाएगा, जिससे छात्र केवल परीक्षा की तैयारी तक सीमित न रहें, बल्कि वैकल्पिक करियर विकल्पों से भी भलीभाँति परिचित हों।
यह ऐसे समय में आया है जब UPSC परीक्षाओं में असफलता के बाद छात्रों में मानसिक दबाव और करियर-संकट की समस्याएँ राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन चुकी हैं। गौरतलब है कि देश भर में लाखों छात्र हर साल सिविल सेवा की तैयारी में वर्षों लगाते हैं, और चयन दर अत्यंत कम रहती है।
UPSC तक सीमित नहीं रहेगी अकादमी
ओझा ने स्पष्ट किया कि यह अकादमी केवल संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षाओं तक सीमित नहीं रहेगी। राज्य स्तरीय लोक सेवा आयोग (PSC) परीक्षाओं की तैयारी के साथ-साथ अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाएगा। यह दृष्टिकोण उन छात्रों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जो केंद्रीय सेवाओं के साथ-साथ राज्य सरकार की नौकरियों की भी तैयारी करना चाहते हैं।
पतंजलि का शिक्षा क्षेत्र में विस्तार
उल्लेखनीय है कि बाबा रामदेव ने इससे पहले शनिवार को घोषणा की थी कि पतंजलि समूह जल्द ही UPSC परीक्षा की तैयारी के लिए एक अकादमी शुरू करेगा, और इसका संचालन अवध ओझा करेंगे। ओझा ने इस संदर्भ में बताया कि पतंजलि पहले से ही गुरुकुल, विश्वविद्यालय और विभिन्न व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के ज़रिए शिक्षा क्षेत्र में सक्रिय है। अब प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की कोचिंग में प्रवेश इस विस्तार का अगला स्वाभाविक कदम बताया जा रहा है।
ममता बनर्जी की हार और 'अति-आत्मविश्वास'
पश्चिम बंगाल की राजनीति पर टिप्पणी करते हुए ओझा ने कहा कि किसी भी नेता की सबसे बड़ी कमज़ोरी 'अति-आत्मविश्वास' होती है। उनके अनुसार, पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की हार के पीछे यही भावना काम कर रही थी — जब कोई नेता यह मान लेता है कि उसे कोई हरा नहीं सकता, तभी से राजनीतिक पराजय की पृष्ठभूमि तैयार होने लगती है।
मोदी की ताकत: जनसंपर्क और संगठनात्मक ढाँचा
ओझा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत को जनता से सीधे जुड़ाव और मज़बूत संगठनात्मक ढाँचे में देखा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का जमीनी नेटवर्क भारतीय जनता पार्टी (BJP) को एक अनूठी संगठनात्मक शक्ति प्रदान करता है, जिसका सीधा लाभ पार्टी को चुनावी मैदान में मिलता है। आने वाले समय में यह देखना होगा कि पतंजलि की यह शैक्षणिक पहल छात्रों के करियर परिदृश्य को किस हद तक बदल पाती है।