क्या छात्रों को अपने दम पर ईरान छोड़ने के लिए कहा गया है? जेकेएसए
सारांश
Key Takeaways
- छात्रों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
- सरकार को समन्वित एवेकेशन योजना बनानी चाहिए।
- स्वयं व्यवस्था करना कई छात्रों के लिए संभव नहीं है।
नई दिल्ली, १४ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। जम्मू और कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (जेकेएसए) ने मंगलवार को ईरान में फंसे कश्मीरी छात्रों और अन्य भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। एसोसिएशन ने कहा कि तेहरान में स्थित भारतीय दूतावास ने छात्रों को सलाह दी है कि वे ईरान जल्द छोड़ें, लेकिन उन्हें यह स्वयं करना होगा। हालांकि, अभी तक कोई औपचारिक या समन्वित एवेकेशन योजना नहीं बनाई गई है।
एसोसिएशन ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से तुरंत कदम उठाने और ईरान में फंसे भारतीय नागरिकों, विशेषकर कश्मीरी छात्रों, की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने का अनुरोध किया।
एसोसिएशन के राष्ट्रीय संयोजक नासिर खुएमी ने कहा कि हालात बिगड़ने से कश्मीर में भय, असमंजस और चिंता का माहौल बन गया है, और माता-पिता अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर बेहद चिंतित हैं। एसोसिएशन ने जोर दिया कि छात्रों से खुद अपने लिए बाहर निकलने की अपेक्षा करना असुरक्षित और व्यावहारिक नहीं है।
उन्होंने कहा, "स्वयं व्यवस्था करके बाहर निकलना कई छात्रों के लिए संभव नहीं है, क्योंकि सुरक्षा जोखिम, परिवहन की कमी और भरोसेमंद संपर्क साधनों की सीमितता है।" उन्होंने यह भी कहा कि संगठित और व्यवस्थित एवेकेशन का अभाव छात्रों और उनके परिवारों की परेशानी को और बढ़ा रहा है।
जम्मू और कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने भारतीय विदेश मंत्रालय की क्षमताओं पर पूर्ण विश्वास व्यक्त किया और सरकार के निरंतर प्रयासों की सराहना की। लेकिन उन्होंने कहा कि वर्तमान गंभीर स्थिति में तेजी से, सक्रिय और समन्वित कूटनीतिक कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि छात्र अकेले संकट का सामना न करें।
एसोसिएशन ने सरकार से स्पष्ट एवेकेशन योजना बनाने, आपातकालीन हेल्पलाइन स्थापित करने और सुरक्षित ट्रांजिट मार्ग सुनिश्चित करने का आग्रह किया, ताकि भारतीय छात्र सुरक्षित, संरक्षित और सम्मान के साथ घर लौट सकें।
उन्होंने कहा कि भारत सरकार को बिना देरी के निर्णायक कदम उठाने चाहिए और छात्रों को सुरक्षित घर लाने के लिए पूर्ण तैयारी करनी चाहिए। उनकी सुरक्षा और संरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।