केरल की किशोरी जो ट्रैकिंग के दौरान लापता हुई, चिकमंगलूर में मृत पाई गई

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केरल की किशोरी जो ट्रैकिंग के दौरान लापता हुई, चिकमंगलूर में मृत पाई गई

सारांश

चिकमंगलूर में एक किशोरी का शव मिलने से क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। यह किशोरी अपने माता-पिता के साथ ट्रैकिंग पर गई थी, और उसके लापता होने के बाद तीन दिन तक खोज अभियान चलाया गया।

Key Takeaways

  • किशोरी केरल से चिकमंगलूर में ट्रैकिंग पर गई थी।
  • लापता होने के बाद तीन दिन तक खोज अभियान चलाया गया।
  • अधिकारियों ने ड्रोन और थर्मल कैमरों का इस्तेमाल किया।
  • पुलिस ने माता-पिता के मोबाइल फोन जब्त किए।
  • इस मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है।

चिकमंगलूर (कर्नाटक), 10 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। कर्नाटक के चिकमंगलूर जिले की पहाड़ी चोटी पर अपने माता-पिता के साथ ट्रैकिंग के दौरान लापता हुई केरल की किशोरी को शुक्रवार को एक पहाड़ी खाई में मृत पाया गया।

तीन दिनों से चल रहे खोज अभियान के दौरान अधिकारियों ने उसका शव उस स्थान से लगभग 2,000 फुट नीचे खोजा, जहां से वह लापता हुई थी।

पुलिस के अनुसार, पलक्कड़, केरल की निवासी श्रीनंदा चंद्रद्रोण पर्वत श्रृंखला से लापता हो गई थी। वह 7 अप्रैल को शाम 6 बजे उस समय गायब हुई जब वह 40 सदस्यों के समूह का हिस्सा थी। उसे आखिरी बार पर्वत के माणिक्यधारा क्षेत्र में देखा गया था। उसके माता-पिता ने उसे खोजने के लिए काफी प्रयास किए, लेकिन वे सफल नहीं हो सके।

एंटी-नक्सल फोर्स (एएनएफ), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ), पुलिस टीमें, फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज के कर्मचारी और वन विभाग के अधिकारी मिलकर उस क्षेत्र में तलाशी अभियान चला रहे थे। अधिकारियों ने पहाड़ी के खतरनाक ढलानों और ऊबड़-खाबड़ इलाके को देखते हुए ड्रोन और थर्मल कैमरों का इस्तेमाल किया।

अधिकारी सभी संभावनाओं की जांच कर रहे हैं यह जानने के लिए कि क्या वह पहाड़ से फिसल गई थी या इसके पीछे कोई अन्य कारण था।

चिकमंगलूर में किशोरी के संदिग्ध लापता होने के मामले पर टिप्पणी करते हुए गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने कहा था कि उन्होंने इस मामले की प्रारंभिक जानकारी ले ली है। उन्होंने कहा कि एक संभावना यह है कि लड़की का अपहरण किया गया हो, जबकि दूसरी संभावना यह है कि वह संभवतः किसी के साथ चली गई हो। उन्होंने बताया कि इस विषय पर अलग-अलग बातें सामने आ रही हैं। हालांकि, सच्चाई का पता तब चलेगा जब मामला स्पष्ट होगा।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार पीड़िता अपने परिवार के साथ कर्नाटक की यात्रा पर आई थी। उन्होंने उत्तरी कर्नाटक में स्थित यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल हम्पी का दौरा किया और 7 अप्रैल को दोपहर 3 बजे चिकमंगलूर शहर पहुँचे थे। इसके बाद वे निजी जीपों से इनाम दत्तात्रेय बाबाबुडांगिरी तीर्थस्थल और माणिक्यधारा पहाड़ी क्षेत्र की ओर गए। माणिक्यधारा क्षेत्र में एक झरने के पास यह नाबालिग लड़की लापता हो गई।

हालांकि, अधिकारियों ने तुरंत तलाशी अभियान शुरू कर दिया था और थर्मल कैमरों और ड्रोन जैसे आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल किया था। शुरुआत में कोई सुराग नहीं मिलने के कारण संदेह पैदा हो गया। अधिकारी पूरी पर्वत श्रृंखला में सघन तलाशी अभियान (कॉम्बिंग ऑपरेशन) शुरू करने की योजना बना रहे थे। इस घटना के बाद केरल से पुलिस की एक टीम भी वहां पहुँची।

पुलिस ने पीड़िता के माता-पिता के मोबाइल फोन जब्त कर लिए हैं और मामले की हर पहलू से जांच कर रही है। माता-पिता को छोड़कर केरल से आए बाकी सभी पर्यटक अपने घर लौट चुके हैं। चिकमंगलूर से एक टीम भी केरल भेजी गई है। आगे की जांच जारी है। फिलहाल, अतिरिक्त विवरण अभी सामने आने बाकी हैं।

केरल की एक अन्य ट्रेकर शरण्या, जो कई दिनों तक मडिकेरी के जंगल में लापता थी, उसे पिछले हफ्ते कर्नाटक के अधिकारियों ने बचा लिया था। वह मडिकेरी जिले के ताडियंडामोल जंगल से लापता हो गई थी।

Point of View

और हमें उम्मीद है कि वे सभी पहलुओं की जांच करेंगे।
NationPress
11/04/2026

Frequently Asked Questions

लापता किशोरी का नाम क्या था?
लापता किशोरी का नाम श्रीनंदा चंद्रद्रोण था।
किशोरी कब लापता हुई?
किशोरी 7 अप्रैल को शाम 6 बजे लापता हुई।
तलाशी अभियान में कौन-कौन शामिल था?
तलाशी अभियान में एंटी-नक्सल फोर्स, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल, पुलिस, फायर सर्विसेज और वन विभाग के अधिकारी शामिल थे।
किशोरी के माता-पिता ने क्या प्रयास किए?
किशोरी के माता-पिता ने उसे ढूंढने के लिए काफी प्रयास किए, लेकिन वे सफल नहीं हो सके।
क्या पुलिस ने कोई सुराग पाया?
शुरुआत में पुलिस को कोई सुराग नहीं मिला था, लेकिन बाद में शव एक पहाड़ी खाई में पाया गया।
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