क्या चाइनीज वीजा स्कैम के मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट की सुनवाई टल गई?
सारांश
Key Takeaways
- चाइनीज वीजा स्कैम में गंभीर आरोप हैं।
- अगली सुनवाई 4 फरवरी को होगी।
- सीबीआई ने आरोप तय किए हैं।
- भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाने की आवश्यकता है।
- इस मामले की न्यायिक जांच आवश्यक है।
नई दिल्ली, 16 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में शुक्रवार को चाइनीज वीजा स्कैम के सीबीआई मामले में सुनवाई टल गई है। अब मामले की अगली सुनवाई 4 फरवरी को होगी।
कोर्ट कांग्रेस सांसद कार्ती चिदंबरम के खिलाफ आरोप तय करने के बाद सुनवाई कर रहा है। इस मामले में कोर्ट ने कार्ती चिदंबरम और उनके चार्टर्ड अकाउंटेंट एस. भाष्कर रमन के खिलाफ आरोप तय किया है।
सीबीआई के अनुसार, 2011 में हुए इस लेन-देन के माध्यम से 263 चीनी श्रमिकों के लिए वीजा का गलत इस्तेमाल किया गया, जिससे गृह मंत्रालय के नियमों का उल्लंघन हुआ।
आरोप है कि वेदांता समूह की कंपनी तलवंडी साबो पावर लिमिटेड ने पंजाब में बिजली संयंत्र बनाते समय, तय सीमा से ज़्यादा चीनी कर्मचारियों के लिए वीजा रिन्यू कराने के लिए कार्ति चिदंबरम और उनके सहयोगी एस. भास्कर रमन को 50 लाख रुपए की रिश्वत दी थी।
जानकारी के अनुसार, इससे पहले 23 दिसंबर 2025 को अदालत ने इसी मामले में कार्ति चिदंबरम के चार्टर्ड अकाउंटेंट एस. भास्कर रमन के खिलाफ भी आरोप तय किए हैं। अब इस मामले में अगली सुनवाई 16 जनवरी 2026 को होगी।
जांच एजेंसी का कहना है कि टीएसपीएल कंपनी ने इस काम के बदले करीब 50 लाख रुपये की रिश्वत दी थी। यह राशि कथित तौर पर कार्ति चिदंबरम और उनके करीबी एस. भास्कर रमन को दी गई, ताकि तय सीमा से ज्यादा चीनी कर्मचारियों के वीजा दिए जा सकें।
सीबीआई का दावा है कि यह पूरा लेन-देन नियमों के खिलाफ था और इसमें सरकारी पद का गलत इस्तेमाल किया गया। इसी आधार पर भ्रष्टाचार से जुड़े कानूनों के तहत केस दर्ज किया गया और अब कोर्ट ने इस मामले में आरोप तय कर दिए हैं।
राउज एवेन्यू कोर्ट ने सीबीआई द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर प्रथम दृष्टया मामला बनता पाया और दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार से जुड़े आरोप तय कर दिए। अदालत के इस फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि मामले में नियमित सुनवाई आगे बढ़ेगी और आरोपों की न्यायिक जांच की जाएगी।