क्या तेजस्वी का बयान सही है? चिराग पासवान ने पलटवार किया
सारांश
Key Takeaways
- चिराग पासवान ने तेजस्वी यादव के आरोपों का जवाब दिया।
- बिहार में राजनीतिक संघर्ष जारी है।
- तेजस्वी का जनाधार चोरी होने की बात उठाई गई।
- चिराग ने ईवीएम पर आरोपों की आलोचना की।
- डबल इंजन सरकार के वादों पर सवाल उठाए गए।
पटना, 11 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के उस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें उन्होंने कहा कि पूरे देश का मानना है कि हालिया बिहार चुनाव में लोकतंत्र हारा और तंत्र जीता। चिराग ने स्पष्ट किया कि वोट चोरी नहीं हुआ है, बल्कि इनका जनाधार चोरी हो गया है।
पटना में मीडिया से बातचीत में केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि इस प्रकार का जनादेश का अपमान करना ही उनकी हार का कारण है। ये लोग हमेशा आरोप लगाते हैं कि 'यह लोकतंत्र नहीं बल्कि एक सिस्टम जीता है। कभी ईवीएम पर दोष लगाते हैं, कभी एसआईआर पर। जब ये जीतते हैं तो ईवीएम सही होती है, लेकिन हारने पर धांधली का आरोप लगाते हैं। जब तक ये लोग स्वयं पर विचार नहीं करेंगे, तब तक इनके पैरों के नीचे से जमीन खिसकती रहेगी।
चिराग ने कहा कि विधानसभा के सेशन लंबे समय तक चलते हैं। तेजस्वी यादव विपक्ष के नेता हैं, फिर भी वे सेशन में उपस्थित नहीं रहते। उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं से नतीजों के बारे में बात नहीं की है। जब उनके पास कुछ कहने को होगा, तभी वे बोलेंगे। 2005 से लगातार राजद और विपक्षी दल हारते रहे हैं, अपने दम पर राजद उभरकर सामने नहीं आई।
राजद नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि पूरा देश मानता है कि हालिया बिहार विधानसभा चुनाव में लोकतंत्र हारा और तंत्र जीता। इन लोगों ने जनतंत्र को धन-तंत्र और मशीन तंत्र बना दिया है। छल-कपट और मशीनरी से प्राप्त जनादेश को जनता कितनी स्वीकार कर रही है, यह सबको पता है। हम सकारात्मक राजनीति करते आए हैं और सरकार गठन के 100 दिन तक नई सरकार की नीतियों पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। हम जनता के साथ सरकार के कार्यों की विवेचना करते रहेंगे।
तेजस्वी यादव ने कहा कि डबल इंजन सरकार में अपराध, भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी, पलायन, शिक्षा, चिकित्सा और विधि व्यवस्था का क्या हाल है, यह किसी से छुपा नहीं है। हम चाहते हैं कि डबल इंजन सरकार अपने घोषणा पत्र पर अमल करें जिसमें प्रदेश की 2.5 करोड़ महिलाओं को 2 लाख रुपए देने का वादा था, 1 करोड़ नौकरियों का प्रण था और हर जिले में 4-5 बड़े उद्योग और फैक्ट्री लगाने समेत अनेक वादे थे।