राजगीर में शिल्पकारों का मेला: जीतन राम मांझी करेंगे उद्घाटन
सारांश
Key Takeaways
- राजगीर में दो दिवसीय शिल्पकार मेला 15 और 16 मार्च को आयोजित होगा।
- उद्घाटन जीतन राम मांझी करेंगे।
- 18 पारंपरिक व्यवसायों के कारीगर भाग लेंगे।
- उत्पादों की प्रदर्शनी के साथ-साथ योजना के लाभों की जानकारी दी जाएगी।
- स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने का अवसर।
नालंदा, 14 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। बिहार के ऐतिहासिक नगर राजगीर में पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों की कला को नया आयाम देने के लिए एक दो दिवसीय प्रदर्शनी-सह-व्यापार मेला कल 15 मार्च से आरंभ हो रहा है। यह मेला राजगीर के अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में 15 और 16 मार्च को आयोजित किया जाएगा। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत होने वाले इस मेले का उद्घाटन केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) मंत्री जीतन राम मांझी करेंगे।
एमएसएमई विकास कार्यालय, पटना के सहायक निदेशक एवं कार्यक्रम समन्वयक घमंडी लाल मीणा ने जानकारी दी कि मेले की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। केंद्रीय मंत्री ने उद्घाटन के लिए अपनी सहमति दे दी है। यह आयोजन पारंपरिक शिल्पकारों को बड़ा बाजार उपलब्ध कराने, उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने और ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
मेले में प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना से जुड़े 18 पारंपरिक व्यवसायों के कारीगर भाग लेंगे। इसमें बढ़ई, लोहार, कुम्हार, सुनार, दर्जी, राजमिस्त्री, मोची, और नाई जैसे शिल्पकार शामिल हैं। ये कारीगर अपने हाथों से बने उत्कृष्ट हस्तनिर्मित उत्पादों की भव्य प्रदर्शनी प्रस्तुत करेंगे। आने वाले दर्शक और खरीदार इन उत्पादों की बारीकी देख सकेंगे, उन्हें खरीद सकेंगे और स्थानीय हुनरमंदों का उत्साह बढ़ा सकेंगे। इससे कारीगरों को सीधे आर्थिक लाभ होगा और उनके उत्पादों का विपणन आसान हो जाएगा।
इस मेले का उद्देश्य केवल बिक्री तक सीमित नहीं है। यहाँ कारीगरों को योजना के तहत मिलने वाले लाभों की सम्पूर्ण जानकारी प्रदान की जाएगी। इसमें निःशुल्क कौशल प्रशिक्षण, टूलकिट प्रोत्साहन, डिजिटल लेन-देन के लाभ और कम ब्याज दर पर उपलब्ध ऋण जैसी सुविधाओं पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। इसके अतिरिक्त, एमएसएमई मंत्रालय की अन्य योजनाओं जैसे उद्यम पंजीकरण, उद्यमिता विकास और स्वरोजगार से जुड़ी जानकारी भी साझा की जाएगी।
विभाग ने आम नागरिकों, युवाओं और उद्यमियों से अपील की है कि वे बड़ी संख्या में इस मेले में पहुंचें। इससे स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा मिलेगा और आत्मनिर्भर भारत के सपने को मजबूती मिलेगी। राजगीर का यह मेला न केवल शिल्पकारों के लिए एक अवसर है, बल्कि पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनेगा, जहां वे प्राचीन विरासत के साथ आधुनिक बाजार का अनुभव कर सकेंगे।
यह आयोजन पूर्वी भारत में प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के प्रभावी कार्यान्वयन का एक उत्कृष्ट उदाहरण साबित होगा, जो पारंपरिक कला को वैश्विक पहचान दिलाने में सहायता करेगा।