12 अक्टूबर 2026
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सीजेआई सूर्यकांत बोले — 'सुप्रीम कोर्ट के दरवाज़े सबके लिए खुले', इंडिया ब्लॉक से न मिलने की वजह बताई

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सीजेआई सूर्यकांत बोले — 'सुप्रीम कोर्ट के दरवाज़े सबके लिए खुले', इंडिया ब्लॉक से न मिलने की वजह बताई

सारांश

सीजेआई सूर्यकांत ने इंडिया ब्लॉक से न मिलने की वजह गोपनीय रखी, लेकिन संदेश साफ दिया — सर्वोच्च न्यायालय हर नागरिक के लिए खुला है। JPC दौरा 'हितों के टकराव' की आशंका से रद्द हुआ। अब विपक्ष के पास अदालत का रास्ता खुला है।

मुख्य बातें

सीजेआई सूर्यकांत ने 12 अक्टूबर 2026 को कहा कि सुप्रीम कोर्ट हर नागरिक और निर्वाचित प्रतिनिधि के लिए उपलब्ध है।
इंडिया ब्लॉक के पत्र का जवाब सीजेआई ने रात को ही दे दिया, लेकिन पत्र की विषय-वस्तु गोपनीय रखी।
'वन नेशन वन इलेक्शन' JPC का सुप्रीम कोर्ट दौरा हितों के टकराव की आशंका के चलते रद्द किया गया।
इंडिया गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर मार्च की योजना बनाई।
राहुल गांधी ने कहा — यह मार्च 'सभी भारतीयों का है, किसी एक पार्टी का नहीं।'

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने 12 अक्टूबर 2026 को स्पष्ट किया कि सर्वोच्च न्यायालय हर नागरिक के लिए खुला है और वह कानून के दायरे में सभी शिकायतों की सुनवाई करेगा। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के 33वें स्थापना दिवस समारोह के बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने इंडिया ब्लॉक के प्रतिनिधिमंडल से न मिलने के पीछे की वजह भी सार्वजनिक रूप से रखी।

सीजेआई का बयान: पत्र और गोपनीयता

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, 'मुझे उनका पत्र कल मिला और मैंने कल रात ही उसका जवाब दे दिया। पत्र पर परसों की तारीख थी, लेकिन मैं बाहर था, इसलिए मुझे वह कल मिला।' उन्होंने आगे जोड़ा, 'मैंने अपने जवाब में कुछ कारण बताए हैं और उनसे न मिल पाने की अपनी असमर्थता जाहिर की है। मैंने इसकी गोपनीयता बनाए रखी है।'

सीजेआई ने संवाददाताओं से अनुरोध किया कि पत्र की विषय-वस्तु के बारे में वे इंडिया ब्लॉक के प्रतिनिधियों से ही पूछें, क्योंकि उन्होंने उस पत्राचार को गोपनीय रखा है।

सुप्रीम कोर्ट सबके लिए उपलब्ध: सीजेआई का संदेश

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट के दरवाज़े सभी के लिए खुले हैं। कोई भी व्यक्ति याचिका दायर कर सकता है, चाहे वह आम नागरिक हो या किसी चुने हुए निकाय का सदस्य।' उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि भारत के हर नागरिक को सर्वोच्च न्यायालय में आने का संवैधानिक अधिकार है और न्यायालय यह सुनिश्चित करेगा कि जिन्हें राहत मिलनी चाहिए, उन्हें वह मिले।

'वन नेशन वन इलेक्शन' JPC दौरा क्यों रद्द हुआ

'वन नेशन वन इलेक्शन' विधेयक से जुड़ी संसद की संयुक्त समिति (JPC) के सर्वोच्च न्यायालय दौरे के रद्द होने पर सीजेआई ने कहा, 'उस मुद्दे में कोर्ट में हितों के टकराव की संभावना थी, जिसके कारण हमें प्रशासनिक पहलू पर विचार करना पड़ा।' उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके वरिष्ठ न्यायिक सहयोगियों के साथ सामूहिक मत यही था कि किसी भी प्रकार के हितों के टकराव की स्थिति से बचा जाए। यह निर्णय न्यायपालिका की स्वतंत्रता और पारदर्शिता के सिद्धांत को बरकरार रखने की दृष्टि से लिया गया।

इंडिया ब्लॉक का मार्च और विपक्ष की माँगें

इंडिया गठबंधन ने 12 अक्टूबर को मार्च निकालने की योजना बनाई थी, जिसे प्रतिबंध के बावजूद आगे बढ़ाए जाने की संभावना बताई जा रही थी। यह प्रदर्शन विपक्षी दलों के व्यापक आंदोलन का हिस्सा है, जिसमें मतदाता सूची के 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) में कथित अनियमितताओं का मुद्दा प्रमुख है।

विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग की है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि यह मार्च 'किसी राजनीतिक पार्टी का नहीं, बल्कि सभी भारतीयों का है।' उन्होंने आरोप लगाया है कि SIR प्रक्रिया से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार को अनुचित लाभ हुआ है।

आगे क्या होगा

सीजेआई के बयान के बाद सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या इंडिया ब्लॉक अब सर्वोच्च न्यायालय में याचिका का रास्ता अपनाएगा। गौरतलब है कि सीजेआई ने स्वयं सभी नागरिकों और निर्वाचित प्रतिनिधियों को अदालत का दरवाजा खटखटाने का खुला निमंत्रण दिया है। न्यायपालिका और विपक्ष के बीच इस राजनीतिक-संवैधानिक तनाव का अगला मोड़ निर्णायक हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन राजनीतिक संदर्भ में यह एक सूक्ष्म संदेश है — यदि विपक्ष को न्याय चाहिए, तो अदालत का दरवाजा खटखटाएँ, सीजेआई के दफ्तर का नहीं। JPC दौरे को 'हितों के टकराव' के आधार पर रद्द करना न्यायपालिका की संस्थागत सतर्कता दर्शाता है, लेकिन यह सवाल भी उठाता है कि संसदीय समितियों और उच्चतम न्यायालय के बीच संवाद की सीमाएँ कहाँ हैं। SIR विवाद और चुनाव आयोग पर विपक्ष का हमला एक बड़े संवैधानिक संकट की आहट है — और यदि इंडिया ब्लॉक अदालत जाता है, तो न्यायपालिका को उस विवाद में मध्यस्थ की भूमिका निभानी होगी जिससे वह अभी दूरी बना रही है।
RashtraPress
12 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीजेआई सूर्यकांत ने इंडिया ब्लॉक से मिलने से क्यों मना किया?
सीजेआई सूर्यकांत ने बताया कि उन्होंने इंडिया ब्लॉक के पत्र का जवाब तुरंत दे दिया और न मिल पाने की असमर्थता जाहिर की। हालाँकि उन्होंने पत्र की विषय-वस्तु गोपनीय रखी और पत्रकारों से अनुरोध किया कि वे इंडिया ब्लॉक के प्रतिनिधियों से ही पूछें।
'वन नेशन वन इलेक्शन' JPC का सुप्रीम कोर्ट दौरा क्यों रद्द हुआ?
सीजेआई सूर्यकांत ने बताया कि उस बैठक में सर्वोच्च न्यायालय के लिए हितों के टकराव की संभावना थी। उनके वरिष्ठ न्यायिक सहयोगियों के साथ सामूहिक निर्णय यह था कि किसी भी ऐसी स्थिति से बचा जाए।
इंडिया ब्लॉक के मार्च का उद्देश्य क्या है?
इंडिया गठबंधन ने मतदाता सूची के 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) में कथित अनियमितताओं और अन्य मुद्दों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग की है। राहुल गांधी ने इसे सभी भारतीयों का मार्च बताया है।
SIR विवाद क्या है और इससे कौन प्रभावित है?
SIR यानी 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' मतदाता सूची को अद्यतन करने की एक प्रक्रिया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया में अनियमितताएँ हैं और इससे सत्तारूढ़ दल को फायदा पहुँचा है। यह विवाद चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच बड़े टकराव का केंद्र बन गया है।
क्या इंडिया ब्लॉक अब सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर सकता है?
सीजेआई सूर्यकांत ने स्पष्ट कहा कि सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा हर नागरिक और निर्वाचित प्रतिनिधि के लिए खुला है। इस बयान के बाद यह संभावना है कि इंडिया ब्लॉक SIR या चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर न्यायालय में याचिका दायर कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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