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दिल्ली पुलिस ने सीजेपी के आरोपों का खंडन किया, अभिजीत दिपके को दादी के निधन पर मदद की पेशकश का वीडियो जारी

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दिल्ली पुलिस ने सीजेपी के आरोपों का खंडन किया, अभिजीत दिपके को दादी के निधन पर मदद की पेशकश का वीडियो जारी

सारांश

दिल्ली पुलिस और सीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का यह मामला हिरासत के दौरान मानवीय व्यवहार पर सवाल उठाता है। पुलिस का वीडियो साक्ष्य और सीजेपी के आरोप — दोनों एक-दूसरे के विपरीत हैं। स्वतंत्र जाँच ही सच्चाई सामने ला सकती है।

मुख्य बातें

दिल्ली पुलिस ने सीजेपी के आरोपों का खंडन करते हुए 11 अक्टूबर 2026 को वीडियो साक्ष्य जारी किया।
डीसीपी नेहा यादव ने बताया कि अभिजीत दिपके को दादी के निधन की सूचना तत्काल दी गई और फ्लाइट, फोन कॉल सहित हर संभव मदद की पेशकश की गई।
दिपके और उनके दो साथियों को जंतर-मंतर पर अनुमति के बिना प्रदर्शन बुलाने के आरोप में हिरासत में लिया गया था।
धारा 163 (बीएनएसएस) लागू होने के कारण दिल्ली के कई क्षेत्रों में जमावड़े और प्रदर्शन पर पाबंदी थी।
सीजेपी के आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि दिपके के साथ परिजनों की मृत्यु के बाद भी 'क्रूर व्यवहार' हुआ।

नई दिल्ली, 11 अक्टूबर 2026। दिल्ली पुलिस ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के उन आरोपों का सख्त खंडन किया है, जिनमें कहा गया था कि हिरासत में बंद अभिजीत दिपके को उनकी दादी के निधन के बाद परिवार से संपर्क करने की अनुमति नहीं दी गई। पुलिस ने एक वीडियो जारी कर यह दिखाने का प्रयास किया कि उन्हें तत्काल सहायता की पेशकश की गई थी, जिसे दिपके ने स्वयं अस्वीकार कर दिया था।

मुख्य घटनाक्रम

दिल्ली पुलिस की ओर से डीसीपी नेहा यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि जैसे ही पुलिस को अभिजीत दिपके की दादी के निधन की सूचना मिली, पुलिसकर्मी तुरंत उनके पास पहुँचे और संवेदनशीलता के साथ मदद की पेशकश की। डीसीपी के अनुसार दिपके से फ्लाइट, फोन कॉल या किसी भी अन्य सहायता के बारे में बार-बार पूछा गया। उन्हें सोचने का समय भी दिया गया, और बाद में दोबारा भी पूछा गया — किंतु उन्होंने हर बार मना किया।

पुलिस ने एक वीडियो फुटेज भी सार्वजनिक किया, जिसमें पुलिसकर्मी दिपके से बातचीत करते और मदद की पेशकश करते दिखाई दे रहे हैं। पुलिस का कहना है कि सीजेपी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस तथ्य को 'गलत तरीके से' पेश किया गया।

सीजेपी के आरोप

सीजेपी की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस में आशुतोष रांका ने आरोप लगाया था कि दिपके ने पुलिस को बताया था कि उनके माता-पिता हृदय रोगी हैं और शोक-समाचार सुनकर बहुत परेशान हो सकते हैं। कथित तौर पर दिपके ने अपने चचेरे भाई से बात कराने की माँग की, लेकिन पुलिस ने उनकी बात नहीं सुनी। रांका ने आरोप लगाया कि किसी करीबी के निधन के बाद भी दिपके के साथ 'क्रूर व्यवहार' किया गया।

हिरासत का कारण और धारा 163

दिल्ली पुलिस के अनुसार, अभिजीत दिपके और उनके दो साथियों को जंतर-मंतर पर सीजेपी द्वारा बुलाए गए प्रदर्शन के सिलसिले में हिरासत में लिया गया था, क्योंकि संबंधित अनुमति नहीं दी गई थी। पुलिस ने बताया कि दिल्ली की सुरक्षा और नागरिकों के जीवन व संपत्ति की रक्षा के मद्देनज़र कई क्षेत्रों में धारा 163 (बीएनएसएस) लागू की गई थी, जिसके तहत किसी भी प्रकार का जमावड़ा या प्रदर्शन प्रतिबंधित था।

गौरतलब है कि पुलिस ने पिछली अनुमति का हवाला देते हुए कहा कि उस दौरान बुलाई गई भीड़ ने पथराव, आगजनी और हिंसा की थी, जिससे सरकारी संपत्ति को भारी नुकसान हुआ था। पुलिस ने इसी पृष्ठभूमि में इस बार प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार किया।

विवाद का केंद्र

यह विवाद मुख्यतः इस बात पर केंद्रित है कि क्या हिरासत के दौरान दिपके को पर्याप्त मानवीय सुविधाएँ दी गईं या नहीं। एक ओर सीजेपी का दावा है कि पुलिस ने परिजनों से संपर्क में बाधा डाली, तो दूसरी ओर दिल्ली पुलिस ने वीडियो साक्ष्य के साथ इसे पूरी तरह नकारा है। यह ऐसे समय में आया है जब हिरासत में बंद व्यक्तियों के साथ व्यवहार को लेकर देशव्यापी बहस जारी है।

आगे की स्थिति

फिलहाल दोनों पक्षों का यह विवाद सार्वजनिक मंच पर है और जारी वीडियो साक्ष्य की जाँच होना बाकी है। दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए लिए गए निर्णय प्रक्रिया सम्मत थे। आलोचकों का कहना है कि स्वतंत्र जाँच के बिना इस मामले में किसी एक पक्ष का दावा स्वीकार करना उचित नहीं होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

और जारी किया गया वीडियो एकमात्र साक्ष्य है जो अभी तक सार्वजनिक है — लेकिन वह वीडियो स्वयं पुलिस द्वारा प्रस्तुत किया गया है, जो इसकी निष्पक्षता पर सवाल उठाता है। हिरासत में व्यक्ति के साथ व्यवहार के मानक, विशेष रूप से शोक की स्थिति में, कानूनी और नैतिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण हैं। मुख्यधारा की कवरेज आरोप-प्रत्यारोप पर केंद्रित है, जबकि असली प्रश्न यह है कि हिरासत के दौरान बीएनएसएस और मानवाधिकार दिशानिर्देशों का पालन सुनिश्चित करने की जवाबदेही किसकी है। बिना स्वतंत्र जाँच के यह मामला महज़ एक पीआर युद्ध बनकर रह जाएगा।
RashtraPress
11 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अभिजीत दिपके को दिल्ली पुलिस ने किस कारण हिरासत में लिया?
अभिजीत दिपके और उनके दो साथियों को जंतर-मंतर पर सीजेपी द्वारा बुलाए गए प्रदर्शन के सिलसिले में हिरासत में लिया गया था, क्योंकि धारा 163 (बीएनएसएस) के तहत उस क्षेत्र में सभा और प्रदर्शन की अनुमति नहीं थी।
सीजेपी ने दिल्ली पुलिस पर क्या आरोप लगाए हैं?
सीजेपी के आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि अभिजीत दिपके की दादी के निधन के बाद भी पुलिस ने उन्हें परिजनों से बात करने की अनुमति नहीं दी और उनके साथ 'क्रूर व्यवहार' किया गया। दिपके ने कथित तौर पर अपने हृदय रोगी माता-पिता के लिए चिंता जताई और चचेरे भाई से बात कराने की माँग की थी।
दिल्ली पुलिस ने सीजेपी के आरोपों का खंडन कैसे किया?
डीसीपी नेहा यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि दिपके को दादी के निधन की सूचना तुरंत दी गई और फ्लाइट, फोन कॉल सहित हर सहायता की पेशकश की गई, जिसे दिपके ने स्वयं अस्वीकार किया। पुलिस ने इस बातचीत का वीडियो भी सार्वजनिक किया।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति क्यों नहीं दी गई?
पुलिस के अनुसार, पहले दी गई अनुमति के दौरान बुलाई गई भीड़ ने पथराव, आगजनी और हिंसा की थी, जिससे सरकारी संपत्ति को नुकसान हुआ था। इसी पृष्ठभूमि और धारा 163 (बीएनएसएस) के तहत लागू पाबंदियों के कारण इस बार प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई।
धारा 163 (बीएनएसएस) क्या है और इसे दिल्ली में क्यों लागू किया गया?
धारा 163 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता) किसी क्षेत्र में जमावड़े और प्रदर्शन पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार देती है। दिल्ली पुलिस ने नागरिकों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए 11 अक्टूबर 2026 को कई क्षेत्रों में यह धारा लागू की थी।
राष्ट्र प्रेस
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