20 अक्टूबर 2026
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अभिजीत दिपके की समर्थकों से अपील: त्योहार परिवार संग मनाएं, नफरत को मन में जगह न दें

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अभिजीत दिपके की समर्थकों से अपील: त्योहार परिवार संग मनाएं, नफरत को मन में जगह न दें

सारांश

आंदोलन के बीच त्योहारी मौसम में अभिजीत दिपके का संदेश — नफरत नहीं, संयम और परिवार। दो वरिष्ठ नेता जेल में हैं, दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर हो रही है, फिर भी दिपके बोले: 'हम पीछे नहीं हटेंगे।'

मुख्य बातें

अभिजीत दिपके ने 20 अक्टूबर 2026 को वीडियो संदेश जारी कर सीजेपी समर्थकों से त्योहार परिवार के साथ मनाने की अपील की।
दिपके ने समर्थकों को चेताया कि नफरत उनके भीतर नहीं आनी चाहिए, क्योंकि उनका आंदोलन नफरत के खिलाफ है।
सीजेपी नेता सौरभ दास और आशुतोष रांका को 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर में गिरफ्तार किया गया था; सोमवार को हिरासत दो दिन और बढ़ाई गई।
दिल्ली उच्च न्यायालय में दोनों नेताओं की रिहाई के लिए याचिका दायर की जा रही है।
दिपके ने आंदोलन की तुलना नेपाल व बांग्लादेश के आंदोलनों से किए जाने को खारिज किया; गांधीवादी अहिंसा पर जोर दिया।

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को एक वीडियो संदेश जारी कर पार्टी समर्थकों से आग्रह किया कि वे त्योहारों के मौसम में अपने परिवारों के साथ समय बिताएं और किसी के प्रति भी मन में नफरत न पालें। यह संदेश ऐसे समय आया जब सीजेपी के दो वरिष्ठ नेताओं को न्यायिक हिरासत में रखा गया है और संगठन एक सक्रिय आंदोलन के दौर से गुज़र रहा है।

दिपके का समर्थकों को संदेश

दिपके ने वीडियो में स्वीकार किया कि पिछले कुछ महीनों में उनके समर्थकों और उनके परिवारों को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा है। उन्होंने कहा, 'पिछले कुछ दिनों से आप सभी सड़कों पर कड़ा संघर्ष कर रहे हैं और आपने बहुत कुछ सहा है। मैं खुद को बहुत भाग्यशाली मानता हूं कि मेरे साथ इतने नेक और ईमानदार लोग हैं, जो उस चीज के लिए लड़ रहे हैं जिस पर वे विश्वास करते हैं और जो सही है।'

उन्होंने आंदोलन की भावना को बनाए रखते हुए यह भी सावधान किया कि नफरत उनके भीतर नहीं आनी चाहिए। उनके शब्दों में, 'हम नफरत के खिलाफ लड़ रहे हैं। वह नफरत हमारे भीतर नहीं आनी चाहिए।'

नेताओं की हिरासत और कानूनी स्थिति

सीजेपी नेता सौरभ दास और आशुतोष रांका को दिल्ली पुलिस ने 13 अक्टूबर 2026 को जंतर-मंतर में कथित तौर पर अवैध रूप से प्रवेश करने और बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। सोमवार को दिल्ली की एक अदालत ने उनकी न्यायिक हिरासत दो और दिन बढ़ा दी।

गौरतलब है कि इस आदेश को चुनौती देने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की जा रही है, जिसमें दोनों नेताओं की रिहाई की माँग की गई है। दिपके ने इन दोनों की तुलना सत्याग्रहियों से करते हुए कहा कि महात्मा गांधी भी मुस्कुराते हुए जेल गए थे।

आंदोलन की पहचान और तुलनाओं को खारिज करना

दिपके ने भारत के इस आंदोलन की तुलना नेपाल और बांग्लादेश के आंदोलनों से किए जाने को सिरे से खारिज किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका अभियान अहिंसा और गांधीवादी सिद्धांतों पर आधारित है। इस सुझाव को भी नकारते हुए कि मुख्य न्यायाधीश पीछे हट गए हैं, उन्होंने कहा, 'हम डरते नहीं हैं। कोई हमें डरा नहीं सकता।'

हिरासत में बंद साथियों को समर्पण

दिपके ने दास और रांका को 'आंदोलन की रीढ़' बताया और कहा कि त्योहारों के दौरान समर्थक उन्हें याद रखें, क्योंकि वे अपने परिवारों के साथ यह अवसर नहीं मना पाएंगे। उन्होंने इन गिरफ्तारियों से निराश न होने का आह्वान करते हुए कहा, 'हम पीछे नहीं हटेंगे। अगर आशु और सौरभ जेल में हैं, तो हम डरेंगे नहीं। हम सही चीज के लिए लड़ रहे हैं।'

आगे क्या

दिल्ली उच्च न्यायालय में दायर याचिका पर सुनवाई के नतीजे और दोनों नेताओं की हिरासत का भविष्य इस आंदोलन की अगली दिशा तय करेंगे। सीजेपी के आंदोलन की तीव्रता और संगठन की रणनीति आने वाले दिनों में स्पष्ट होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा तब होगी जब न्यायिक हिरासत लंबी खिंचे और समर्थकों का धैर्य चुकने लगे। गांधीवाद का हवाला देना आंदोलन को वैचारिक वैधता देता है, परंतु मुख्यधारा की कवरेज इस सवाल से बचती है कि क्या बॉन्ड शर्तों का कथित उल्लंघन रणनीतिक था या संयोगवश। जब तक दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका पर सुनवाई नहीं होती, आंदोलन की कानूनी व सामाजिक साख दोनों दांव पर हैं।
RashtraPress
20 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अभिजीत दिपके ने समर्थकों से क्या अपील की है?
दिपके ने 20 अक्टूबर 2026 को जारी वीडियो संदेश में समर्थकों से आग्रह किया कि वे त्योहारों के दौरान अपने परिवारों के साथ समय बिताएं और किसी के प्रति नफरत न रखें। उन्होंने कहा कि उनका आंदोलन नफरत के खिलाफ है, इसलिए यह भावना उनके भीतर नहीं आनी चाहिए।
सौरभ दास और आशुतोष रांका को क्यों गिरफ्तार किया गया?
दिल्ली पुलिस ने सीजेपी नेता सौरभ दास और आशुतोष रांका को 13 अक्टूबर 2026 को जंतर-मंतर में कथित तौर पर अवैध रूप से प्रवेश करने और बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। सोमवार को अदालत ने उनकी न्यायिक हिरासत दो दिन और बढ़ा दी।
दिल्ली उच्च न्यायालय में क्या याचिका दायर की जा रही है?
सीजेपी की ओर से दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की जा रही है, जिसमें सौरभ दास और आशुतोष रांका की रिहाई की माँग की गई है और अदालत के हिरासत विस्तार के आदेश को चुनौती दी गई है।
दिपके ने अपने आंदोलन को नेपाल और बांग्लादेश के आंदोलनों से तुलना पर क्या कहा?
दिपके ने इस तुलना को सिरे से खारिज किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका अभियान अहिंसा और गांधीवादी सिद्धांतों पर आधारित है और इसे किसी अन्य देश के आंदोलन से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) क्या है और इसका आंदोलन किस बारे में है?
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) अभिजीत दिपके द्वारा स्थापित एक राजनीतिक संगठन है। दिपके के अनुसार यह आंदोलन नफरत के विरुद्ध और गांधीवादी अहिंसा के सिद्धांतों पर आधारित है। हाल के महीनों में संगठन के नेताओं और समर्थकों ने कई विरोध प्रदर्शनों में भाग लिया है।
राष्ट्र प्रेस
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