सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके का भावुक संदेश: 'आशुतोष और सौरव के बिना आधी सफलता भी नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
सीजेपी (कॉकरोच जनता पार्टी) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने जेल में बंद अपने सह-संयोजकों सौरव दास और आशुतोष रांका को याद करते हुए सोशल मीडिया पर एक भावनापूर्ण और विस्तृत संदेश साझा किया है। दिपके ने लिखा कि दोनों के बिना संगठन अपनी मौजूदा उपलब्धियों का आधा भी हासिल नहीं कर पाता, और उनकी एकमात्र इच्छा है कि दोनों जल्द जेल से बाहर आएं।
दिपके का भावुक संदेश
दिपके ने सोशल मीडिया पर आशुतोष रांका और सौरव दास को सीधे संबोधित करते हुए लिखा, 'आज आप दोनों का जेल में छठा दिन है। मैं बता नहीं सकता कि मुझे तुम्हारी कितनी याद आ रही है।' उन्होंने स्वीकार किया कि पिछले तीन महीनों में दोनों की लगातार आने वाली कॉलों और संदेशों को वे अक्सर अनदेखा कर देते थे, क्योंकि उन्हें भरोसा था कि दोनों हर परिस्थिति को संभाल लेंगे।
दिपके ने आगे लिखा कि भले ही लोगों ने उन्हें सीजेपी का चेहरा माना हो, लेकिन असल में आशुतोष और सौरव ही इस संगठन को चला रहे थे और उसे एकजुट रखे हुए थे। उनके शब्दों में, 'हो सकता है कि सीजेपी की शुरुआत मुझसे अनजाने में हुई हो, लेकिन यह तुम्हारी समझदारी, लगन और हिम्मत ही थी जिसने इसे आज इस मुकाम तक पहुंचाया है।'
संगठन में योगदान को स्वीकारा
दिपके ने अपने संदेश में कहा, 'मुझे सच में नहीं लगता कि तुम दोनों के बिना सीजेपी अपनी मौजूदा उपलब्धियों का आधा भी हासिल कर पाता।' उन्होंने इस बात पर अफसोस जताया कि दोनों ने आंदोलन के लिए जो बलिदान दिए, वे आम लोगों की नज़रों से ओझल रहे और कभी कोई श्रेय भी नहीं मांगा।
संस्थापक ने परिवारों से भी माफी माँगी। उन्होंने लिखा, 'मैं तुम्हारे परिवारों से भी माफी मांगना चाहता हूं, जिन्हें इस दर्द, चिंता और अनिश्चितता का सामना करना पड़ा है। मुझे पता है कि माफी मांगने से हालात आसान नहीं हो जाएंगे।'
हिरासत का पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि 13 अक्टूबर 2026 को जंतर-मंतर, नई दिल्ली पर कथित तौर पर अनधिकृत रूप से प्रवेश करने और राष्ट्रीय ध्वज फहराने के आरोप में आशुतोष रांका और सौरव दास को हिरासत में लिया गया था। इसके बाद दोनों को अदालत में पेश किया गया और न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब सीजेपी एक उभरते राजनीतिक संगठन के रूप में अपनी पहचान बना रहा है और इसके नेताओं की गिरफ्तारी ने पार्टी के भीतर और बाहर दोनों जगह चर्चा छेड़ दी है।
आगे क्या
दिपके ने अपने संदेश के अंत में उम्मीद जताई कि दोनों जल्द रिहा होंगे। उन्होंने लिखा, 'मुझे बस अपने भाई वापस चाहिए।' 19 अक्टूबर 2026 तक दोनों की रिहाई या ज़मानत को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। मामले की अगली सुनवाई पर सबकी नज़रें टिकी हैं।