5 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

भाजपा नेता अजय आलोक का सीजेपी प्रदर्शन पर तंज, मणिशंकर अय्यर और इमरान मसूद पर भी हमला

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
भाजपा नेता अजय आलोक का सीजेपी प्रदर्शन पर तंज, मणिशंकर अय्यर और इमरान मसूद पर भी हमला

सारांश

भाजपा नेता अजय आलोक ने एक ही बयानबाज़ी में कई मोर्चे खोल दिए — सीजेपी के प्रदर्शन पर 'कॉकरोच स्प्रे' वाला तंज, मणिशंकर अय्यर को इस्लामाबाद जाने की नसीहत और कैप्टन स्मित मच्छार विवाद में कांग्रेस पर चुप्पी का आरोप। यह बयान भारत-पाकिस्तान तनाव के बाद की राजनीतिक धुर-ध्रुवीकरण की बड़ी तस्वीर का हिस्सा है।

मुख्य बातें

भाजपा नेता अजय आलोक ने 5 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में कई राजनीतिक मुद्दों पर एक साथ बयान दिए।
सीजेपी के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग वाले प्रदर्शन पर 'कॉकरोच स्प्रे' वाली टिप्पणी विवाद में आई।
कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर के पाकिस्तान-वार्ता के समर्थन पर आलोक ने कहा — व्यक्तिगत रूप से इस्लामाबाद जाकर करें बात।
कांग्रेस नेता इमरान मसूद और राहुल गांधी पर कैप्टन स्मित मच्छार के समर्थन में चुप रहने का आरोप लगाया।
आलोक ने संस्थाओं पर भरोसा तोड़ने के पीछे विदेशी ताकतों और कम्युनिस्ट संगठनों की भूमिका होने का आरोप लगाया — बिना सार्वजनिक साक्ष्य के।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता अजय आलोक ने 5 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में कई राजनीतिक मुद्दों पर एक साथ मोर्चा खोला — जिनमें 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) का मुख्य चुनाव आयुक्त के विरुद्ध प्रदर्शन, मणिशंकर अय्यर का पाकिस्तान-संवाद वाला बयान और कांग्रेस नेता इमरान मसूद की कैप्टन स्मित मच्छार को लेकर की गई टिप्पणी शामिल हैं। आलोक ने इन सभी मामलों को विपक्षी दलों की 'तुष्टिकरण की राजनीति' से जोड़ते हुए तीखे आरोप लगाए।

सीजेपी प्रदर्शन पर 'कॉकरोच' वाला तंज

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए 'कॉकरोच जनता पार्टी' के प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए अजय आलोक ने कहा, 'जब कॉकरोच अधिक एकत्रित हो जाते हैं तो स्प्रे करना ही पड़ता है।' यह बयान तत्काल विवाद का केंद्र बन गया, क्योंकि इसे विपक्षी प्रदर्शनकारियों पर सीधा हमला माना जा रहा है।

फारूक अब्दुल्ला और नेहरू की 'गलतियाँ'

नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला द्वारा चुनाव आयोग को स्वतंत्र न बनाए जाने की जिम्मेदारी पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पर डाले जाने के बाद आलोक ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि यह अच्छी बात है कि विपक्षी नेताओं को भी अब नेहरू-युग की गलतियाँ दिखने लगी हैं। BJP नेता ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के शासनकाल में चुनाव आयुक्त की नियुक्ति में पार्टी की पसंद हावी रहती थी।

आलोक ने दावा किया कि पहली बार कानून बनाकर तीन सदस्यीय नियुक्ति समिति की व्यवस्था लागू की गई है। उन्होंने सवाल किया कि यदि विपक्ष को चुनाव आयोग की स्वतंत्रता की चिंता थी, तो दशकों के शासन में ऐसी व्यवस्था क्यों नहीं बनाई गई।

मणिशंकर अय्यर के पाकिस्तान-बयान पर तीखी प्रतिक्रिया

कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर द्वारा पाकिस्तान के साथ बातचीत की वकालत किए जाने पर आलोक ने कहा कि यदि अय्यर व्यक्तिगत रूप से पाकिस्तान से वार्ता करना चाहते हैं तो वे इस्लामाबाद जाकर ऐसा कर सकते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि पाकिस्तान के प्रति इस तरह का 'आग्रह' कांग्रेस के एजेंडे में बार-बार क्यों उभरता है, जबकि दोनों देशों के बीच सीमा पर तनाव की स्थिति बनी रहती है।

कैप्टन स्मित मच्छार विवाद और इमरान मसूद पर हमला

कांग्रेस नेता इमरान मसूद के कैप्टन स्मित मच्छार से जुड़े बयान पर आलोक ने गंभीर आरोप लगाते हुए इस मामले को 9/11 आतंकी हमलों से भी जोड़ा। उनका दावा है कि दुनिया के कई प्रमुख नेताओं ने कैप्टन मच्छार की प्रशंसा की, लेकिन कांग्रेस नेताओं ने उनके समर्थन में एक शब्द नहीं कहा। आलोक ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को भी इस संदर्भ में निशाने पर लिया।

गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब भारत-पाकिस्तान तनाव के बाद देश में राष्ट्रवाद बनाम संवाद की राजनीतिक बहस तेज़ हो गई है। आलोक ने कहा कि इस तरह की राजनीति से भारतीय मुसलमानों का भी अपमान होता है।

संस्थाओं पर भरोसा तोड़ने का आरोप

भाजपा नेता ने अंत में एक व्यापक आरोप लगाया कि भारत में अस्थिरता और अराजकता फैलाने तथा संवैधानिक संस्थाओं से जनता का भरोसा उठाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसके पीछे विदेशी ताकतों, इस्लामिक संगठनों और कम्युनिस्ट ताकतों की भूमिका होने का आरोप है — हालाँकि उन्होंने इन दावों के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत नहीं किए। आने वाले दिनों में इन बयानों पर विपक्षी प्रतिक्रिया और तेज़ होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी असली अहमियत इसकी रणनीति में है — एक ही बयान में चुनाव आयोग की साख, पाकिस्तान-नीति और राष्ट्रवाद के तीन मुद्दों को एक धागे में पिरोना। यह ऐसे समय में आया है जब भारत-पाकिस्तान तनाव के बाद विपक्षी दलों पर 'नरम रुख' का आरोप राजनीतिक रूप से कारगर साबित हो रहा है। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूक जाती है, वह यह है कि इस तरह के बयान विपक्ष को रक्षात्मक मुद्रा में धकेलते हैं और मूल मुद्दे — चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता — से ध्यान हटा देते हैं। संस्थाओं पर विदेशी षड्यंत्र के आरोप बिना साक्ष्य के दोहराए जाएँ तो जवाबदेही की भाषा कमज़ोर पड़ती है।
RashtraPress
5 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अजय आलोक ने सीजेपी के प्रदर्शन पर क्या कहा?
भाजपा नेता अजय आलोक ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए 'कॉकरोच जनता पार्टी' के प्रदर्शन पर कहा — 'जब कॉकरोच अधिक एकत्रित हो जाते हैं तो स्प्रे करना ही पड़ता है।' यह बयान विपक्षी प्रदर्शनकारियों पर सीधे हमले के रूप में देखा जा रहा है।
मणिशंकर अय्यर के पाकिस्तान-बयान पर भाजपा की क्या प्रतिक्रिया रही?
अजय आलोक ने कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर के पाकिस्तान से बातचीत के समर्थन पर कहा कि यदि वे इतना ज़ोर देते हैं तो व्यक्तिगत रूप से इस्लामाबाद जाकर बात करें — भारत से पाकिस्तान के साथ संवाद की उम्मीद करना उचित नहीं है। उन्होंने इसे कांग्रेस की पाकिस्तान के प्रति 'सॉफ्ट' नीति से जोड़ा।
कैप्टन स्मित मच्छार विवाद क्या है और इमरान मसूद पर क्या आरोप लगे?
कांग्रेस नेता इमरान मसूद के कैप्टन स्मित मच्छार से जुड़े बयान को लेकर अजय आलोक ने आरोप लगाया कि दुनिया के प्रमुख नेताओं ने कैप्टन मच्छार की प्रशंसा की, लेकिन कांग्रेस नेताओं की ओर से उनके समर्थन में कुछ नहीं कहा गया। आलोक ने इस मामले को 9/11 आतंकी हमलों से भी जोड़ते हुए राहुल गांधी पर भी निशाना साधा।
चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया पर अजय आलोक का क्या रुख है?
अजय आलोक ने दावा किया कि पहली बार कानून बनाकर तीन सदस्यीय नियुक्ति समिति की व्यवस्था की गई है, जो पहले नहीं थी। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उनके शासनकाल में पार्टी की पसंद के लोगों को चुनाव आयुक्त बनाया जाता था।
आलोक ने संस्थाओं पर हमले के पीछे किसे ज़िम्मेदार बताया?
भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि भारत में संवैधानिक संस्थाओं पर लोगों का भरोसा कम करने के प्रयासों के पीछे विदेशी ताकतों, इस्लामिक संगठनों और कम्युनिस्ट ताकतों की भूमिका है। हालाँकि उन्होंने इन आरोपों के समर्थन में कोई सार्वजनिक साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 घंटा पहले
  2. 21 घंटे पहले
  3. कल
  4. 1 महीना पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 6 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 8 महीने पहले