मणिशंकर अय्यर के 'बातचीत' वाले बयान पर आनंद दुबे का पलटवार: 'शौक है तो इस्लामाबाद चले जाओ'
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर के इस बयान — 'भारत के पास सर्जिकल स्ट्राइक का साहस है, लेकिन बातचीत की मेज पर बैठने की हिम्मत नहीं' — ने 5 अक्टूबर 2026 को एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी, जबकि राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने बातचीत और कड़ी कार्रवाई — दोनों की वकालत करते हुए एक अलग रुख अपनाया।
आनंद दुबे की तीखी प्रतिक्रिया
शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने कहा कि जो जिस भाषा में समझता है, उसे उसी भाषा में समझाना पड़ता है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पाकिस्तान बातचीत की भाषा नहीं समझता, वह केवल 'ऑपरेशन सिंदूर' जैसी कार्रवाई और करारे जवाब की भाषा समझता है।
दुबे ने कहा कि भारतीय सेना ने अपनी ताकत की एक छोटी सी झलक दिखाई, जिसके नतीजे सामने आए। उन्होंने मणिशंकर अय्यर पर सीधा निशाना साधते हुए कहा, 'अगर उन्हें पाकिस्तान से बातचीत करने का इतना शौक है तो उन्हें किसने रोका है? वे इस्लामाबाद चले जाएं।'
उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में यह भी जोड़ा कि कांग्रेस नेताओं को तो वहाँ का वीजा तुरंत मिल जाता है, क्योंकि वे वहाँ के 'दोस्त' हैं।
भारत-पाकिस्तान संवाद पर दुबे का स्पष्ट रुख
आनंद दुबे ने कहा कि भारत अब पाकिस्तान से बातचीत नहीं करेगा, क्योंकि बातचीत के सारे अवसर पाकिस्तान ने खुद ही बंद कर दिए हैं। उनके अनुसार, अब समय आ गया है कि पाकिस्तान को मुँहतोड़ जवाब दिया जाए।
उन्होंने भारतीय सेना पर पूरा भरोसा जताते हुए कहा कि जब भी सेना को कार्रवाई की ज़रूरत महसूस होगी, वह अपना काम करेगी।
राजद का संतुलित रुख
दूसरी ओर, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता शक्ति सिंह यादव ने इस विवाद पर एक अलग और संतुलित दृष्टिकोण रखा। उन्होंने कहा कि यदि देश पर कोई आतंकी घटना होती है या कार्रवाई की कोशिश की जाती है, तो निश्चित रूप से सर्जिकल स्ट्राइक और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
साथ ही शक्ति सिंह यादव ने कहा कि बातचीत के दरवाजे कभी बंद नहीं होने चाहिए। उन्होंने विदेश नीति को और अधिक सशक्त बनाने और हर देश के साथ कूटनीति जारी रखने की ज़रूरत पर बल दिया।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब भारत-पाकिस्तान संबंध 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद से तनावपूर्ण बने हुए हैं। गौरतलब है कि पाकिस्तान के साथ कूटनीतिक बातचीत की वकालत करने वाले बयान घरेलू राजनीति में लंबे समय से तीखे विवादों को जन्म देते रहे हैं।
आलोचकों का कहना है कि इस तरह के बयान राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर विपक्षी दलों के बीच भी एकराय की कमी को उजागर करते हैं। वहीं राजद जैसे दलों का रुख दर्शाता है कि सभी विपक्षी दल एक ही पाले में नहीं हैं।
आगे क्या
इस बयानबाज़ी के बीच, राजनीतिक हलकों में भारत की पाकिस्तान नीति को लेकर बहस तेज होने के संकेत हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि संसद के अगले सत्र में यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया जा सकता है।