मुख्यमंत्री मोहन यादव बोले: प्रकृति अनुकूल स्थापत्य है वास्तु का आधार, भोपाल में ग्रीन बिल्डिंग सेमिनार

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मुख्यमंत्री मोहन यादव बोले: प्रकृति अनुकूल स्थापत्य है वास्तु का आधार, भोपाल में ग्रीन बिल्डिंग सेमिनार

सारांश

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल में ग्रीन बिल्डिंग पर राष्ट्रीय सेमिनार में राजा भोज से लेकर आधुनिक जल संरक्षण तक की यात्रा को जोड़ा। मध्यप्रदेश ने जल संचयन में देश में पहला स्थान पाया है और अब IIT इंदौर के साथ MOU से निर्माण तकनीक में नया अध्याय लिखने की तैयारी है।

Key Takeaways

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 2 मई 2025 को भोपाल में ग्रीन बिल्डिंग पर अखिल भारतीय सेमिनार का शुभारंभ किया। इंडियन बिल्डिंग कांग्रेस की 113वीं गवर्निंग काउंसिल मीटिंग में 20 राज्यों के प्रतिनिधि शामिल हुए। आईआईटी इंदौर और लोक निर्माण विभाग के बीच निर्माण तकनीक पर एमओयू हस्ताक्षरित हुआ। मध्यप्रदेश जल संरक्षण में देश में प्रथम ; डिण्डौरी और खंडवा जिले राष्ट्रीय स्तर पर पहले-दूसरे स्थान पर। जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत गंगा दशहरा 25 मई को कुएं, बावड़ियों का जीर्णोद्धार होगा। प्रदेश के सभी नए भवन अब ग्रीन बिल्डिंग तकनीक पर बनाए जा रहे हैं।

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 2 मई 2025 को भोपाल में कहा कि प्रकृति अनुकूल स्थापत्य हमारे वास्तु का मूल आधार है और पर्यावरण अनुकूल निर्माण को प्रोत्साहित करना आज के दौर की सबसे बड़ी ज़रूरत है। वे कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में ग्रीन बिल्डिंग तकनीक पर आयोजित अखिल भारतीय सेमिनार और इंडियन बिल्डिंग कांग्रेस (IBC) की 113वीं गवर्निंग काउंसिल मीटिंग के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री का संबोधन: प्राचीन परंपरा और आधुनिक चुनौती

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम कंक्रीट के बढ़ते जंगलों और सिमटते प्राकृतिक संसाधनों के बीच खड़े हैं। उन्होंने कहा कि हमें गर्व होना चाहिए कि हम उस परंपरा के उत्तराधिकारी हैं, जिन्होंने स्वस्थ नगर नियोजन के साथ जल संरक्षण के लिए विशाल इकोलॉजिकल सिस्टम बनाए।

उन्होंने विद्वान वास्तुकार राजा भोज द्वारा विकसित भोपाल को इसका प्रत्यक्ष प्रमाण बताया। उन्होंने राजा भोज के ग्रंथ 'समरांगण सूत्रधार' का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रकृति के साथ प्रगति का यह संदेश सदियों पुराना है। उन्होंने प्राचीन श्लोक 'यत् पिण्डे तत् ब्रह्माण्डे' — अर्थात् जो शरीर में है वही ब्रह्मांड में है — का हवाला देते हुए कहा कि ग्रीन बिल्डिंग, पृथ्वी-जल-अग्नि-वायु-आकाश तत्वों के समावेश से घरों को उसी ब्रह्मांडीय संतुलन में वापस लाने की प्रक्रिया है।

ऐतिहासिक स्थलों का संदर्भ और भौगोलिक महत्व

मुख्यमंत्री ने भोपाल के बड़े तालाब, उज्जैन में शिप्रा नदी के आस-पास की संरचनाओं और तुंगभद्रा नदी के किनारे श्रृंगेरी में स्थापत्य कला के अद्भुत उदाहरणों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पृथ्वी का भौगोलिक केंद्र उज्जैन के पास डोंगला में है, जो प्राचीन काल से समय गणना का मुख्य केंद्र माना जाता है — और यह तथ्य तत्कालीन वैज्ञानिक सटीकता को सिद्ध करता है।

उन्होंने मांडव के जल प्रबंधन और नगर नियोजन की प्रशंसा करते हुए कहा कि वहाँ भी इस प्रकार के आयोजन होने चाहिए।

जल संरक्षण अभियान और राज्य की उपलब्धियाँ

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि ग्लोबल वॉर्मिंग की चुनौती से निपटने के लिए राज्य सरकार ने गुढ़ी पड़वा से जल गंगा संवर्धन अभियान की शुरुआत की है। गंगा दशहरा 25 मई को इसके अंतर्गत प्रदेश में कुएं, बावड़ियों और सभी जल संरचनाओं के जीर्णोद्धार का कार्य किया जा रहा है।

उन्होंने गर्व के साथ बताया कि मध्यप्रदेश जल संरक्षण कार्यों में देश में प्रथम स्थान पर है। जल संचयन में डिण्डौरी और खंडवा जिले देश में क्रमशः पहले और दूसरे स्थान पर रहे हैं।

एमओयू और कार्यक्रम की मुख्य गतिविधियाँ

कार्यक्रम में आईआईटी इंदौर और लोक निर्माण विभाग के बीच निर्माण तकनीक पर केंद्रित एमओयू का आदान-प्रदान किया गया। दूसरा एमओयू लोक निर्माण विभाग तथा गृहा संस्था के साथ किया गया। मुख्यमंत्री ने लोक निर्माण विभाग की स्मारिका, न्यूज़लेटर और आईबीसी की 'बिल्ट इन्वायरमेंट' पत्रिका का विमोचन भी किया।

लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि प्रदेश में बनने वाले सभी भवन अब ग्रीन बिल्डिंग तकनीक पर बनाए जा रहे हैं और हाईवे व फ्लाईओवर्स को रेन वॉटर हार्वेस्टिंग तकनीक के साथ तैयार किया जा रहा है। उन्होंने विशेषज्ञों से आह्वान किया कि मध्यप्रदेश की विविध भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कम लागत वाली ग्रीन बिल्डिंग तकनीकों का विकास किया जाए।

विशेषज्ञों की राय और आगे की राह

आईबीसी प्रेसिडेंट चिन्मय देवनाथ ने कहा कि इस बैठक में ग्रीन बिल्डिंग सामग्री, ऊर्जा दक्षता, प्राकृतिक प्रकाश एवं वेंटिलेशन, स्मार्ट टेक्नोलॉजी, 3डी प्रिंटिंग एवं प्री-फैब्रिकेशन जैसे विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श होगा। आईबीसी के संस्थापक अध्यक्ष ओपी गोयल ने कहा कि लक्ष्य भारत को अधोसंरचना क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाते हुए विकसित भारत का निर्माण करना है।

कार्यक्रम में लगभग 20 राज्यों के प्रतिनिधि, सिटी प्लानर्स, नीति-निर्माता और वरिष्ठ अभियंता उपस्थित रहे। यह सेमिनार भारत में टिकाऊ निर्माण की दिशा में नीति और तकनीक को एक मंच पर लाने का महत्वपूर्ण प्रयास साबित हो सकता है।

Point of View

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन में है — राज्य के सभी भवनों को ग्रीन बिल्डिंग मानकों पर लाने की घोषणा तब तक अधूरी है जब तक स्वतंत्र सत्यापन तंत्र न हो। जल संरक्षण में देश में प्रथम स्थान का दावा उत्साहजनक है, परंतु डिण्डौरी और खंडवा जैसे जिलों की सफलता को पूरे प्रदेश में दोहराना एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती है। IIT इंदौर के साथ MOU एक सकारात्मक कदम है, लेकिन आम नागरिक तक कम लागत वाली ग्रीन तकनीक पहुँचाने का रोडमैप अभी स्पष्ट नहीं है।
NationPress
02/05/2026

Frequently Asked Questions

ग्रीन बिल्डिंग सेमिनार भोपाल में किसने आयोजित किया?
यह सेमिनार लोक निर्माण विभाग, मध्यप्रदेश और इंडियन बिल्डिंग कांग्रेस (IBC) ने संयुक्त रूप से आयोजित किया। कार्यक्रम 2 मई 2025 को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार, भोपाल में हुआ और इसमें लगभग 20 राज्यों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
मध्यप्रदेश जल संरक्षण में देश में पहले स्थान पर कैसे है?
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के अनुसार मध्यप्रदेश जल संरक्षण कार्यों में देश में प्रथम स्थान पर है। जल संचयन में डिण्डौरी जिला राष्ट्रीय स्तर पर पहले और खंडवा जिला दूसरे स्थान पर रहा है।
IIT इंदौर और लोक निर्माण विभाग के बीच MOU किस विषय पर हुआ?
यह एमओयू निर्माण तकनीक पर केंद्रित है। इसके तहत आईआईटी इंदौर और लोक निर्माण विभाग, मध्यप्रदेश मिलकर ग्रीन बिल्डिंग और टिकाऊ निर्माण के क्षेत्र में सहयोग करेंगे।
जल गंगा संवर्धन अभियान क्या है और यह कब शुरू हुआ?
यह मध्यप्रदेश सरकार का जन-सहभागिता आधारित जल संरक्षण अभियान है, जो गुढ़ी पड़वा से प्रारंभ हुआ। गंगा दशहरा 25 मई को इसके अंतर्गत प्रदेशभर में कुएं, बावड़ियों और जल संरचनाओं का जीर्णोद्धार किया जाएगा।
राजा भोज का ग्रीन बिल्डिंग से क्या संबंध है?
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राजा भोज के ग्रंथ 'समरांगण सूत्रधार' का हवाला देते हुए बताया कि इसमें प्रकृति के साथ प्रगति का संदेश स्पष्ट रूप से दिया गया है। भोपाल स्वयं राजा भोज द्वारा विकसित नगर नियोजन और जल संरक्षण का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
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