16 अक्टूबर 2026
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लोथल राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर का CM भूपेंद्र पटेल ने किया दौरा, फेज-1 व फेज-2 की प्रगति समीक्षा

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लोथल राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर का CM भूपेंद्र पटेल ने किया दौरा, फेज-1 व फेज-2 की प्रगति समीक्षा

सारांश

लोथल में देश का पहला राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर आकार ले रहा है — 5,000 साल पुरानी सिंधु घाटी सभ्यता की धरती पर विश्व का सबसे ऊँचा लाइटहाउस म्यूजियम। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने 16 अक्टूबर को स्वयं साइट का दौरा कर फेज-1 व फेज-2 की समीक्षा की और समयबद्ध पूर्णता पर ज़ोर दिया।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने 16 अक्टूबर 2026 को लोथल स्थित निर्माणाधीन राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर (NMHC) का दौरा किया।
परिसर में भारत की समुद्री विरासत को समर्पित म्यूजियम, गैलरियाँ और विश्व का सबसे ऊँचा 'लाइटहाउस म्यूजियम' निर्मित किया जा रहा है।
बैठक में NMHC फेज-1 और फेज-2 के अंतर्गत सुविधाओं और निर्माण प्रगति की विस्तृत प्रेजेंटेशन दी गई।
मुख्यमंत्री ने परियोजना का कार्य समयबद्ध ढंग से पूरा करने के निर्देश दिए।
दौरे में मुख्य सचिव मनोज कुमार दास सहित राज्य प्रशासन के दर्जनभर से अधिक वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने 16 अक्टूबर 2026 को लोथल स्थित देश के पहले राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर (NMHC) का दौरा किया और निर्माण की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। प्राचीन सिंधु घाटी सभ्यता के इस ऐतिहासिक स्थल पर विश्वस्तरीय परियोजना आकार ले रही है, जिसमें भारत की समृद्ध समुद्री विरासत को प्रदर्शित करने वाले संग्रहालय, दीर्घाएँ और दुनिया का सबसे ऊँचा 'लाइटहाउस म्यूजियम' शामिल हैं।

मुख्यमंत्री का दौरा और समीक्षा बैठक

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने परिसर में चल रहे सभी कार्यों की मौजूदा स्थिति की बारीकी से जानकारी ली। उन्होंने परियोजना से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों और प्रतिनिधियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक भी की। इस बैठक में NMHC के फेज-1 और फेज-2 के अंतर्गत विकसित की जा रही सुविधाओं, साइट की विशेषताओं तथा अब तक पूर्ण एवं आगामी निर्माण कार्यों पर विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया गया।

मुख्यमंत्री ने इस परिसर का कार्य समयबद्ध तरीके से पूरा हो, इस पर विशेष ज़ोर दिया — ताकि यह स्थल वैश्विक पर्यटन के लिहाज से एक प्रमुख आकर्षण केंद्र बन सके।

परिसर में क्या बन रहा है

लोथल में निर्माणाधीन इस परिसर में भारत की समुद्री परंपराओं को समर्पित विशेष म्यूजियम और गैलरियाँ शामिल हैं। इसके अलावा, विश्व का सबसे ऊँचा 'लाइटहाउस म्यूजियम' भी यहाँ स्थापित किया जा रहा है। यह परिसर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकास भी, विरासत भी' के दर्शन को मूर्त रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

गौरतलब है कि लोथल, जो लगभग 5,000 वर्ष पुरानी सिंधु घाटी सभ्यता का अहम पड़ाव रहा है, दुनिया के सबसे प्राचीन ज्ञात बंदरगाहों में से एक माना जाता है। इसी ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए यहाँ इस अंतरराष्ट्रीय स्तर की परियोजना का चयन किया गया।

दौरे में मौजूद वरिष्ठ अधिकारी

मुख्यमंत्री के इस दौरे में गुजरात सरकार के मुख्य सचिव मनोज कुमार दास, मुख्यमंत्री के मुख्य सलाहकार एस.एस. राठौर, मुख्यमंत्री के अपर प्रधान सचिव डॉ. विक्रांत पांडे, पर्यटन विभाग के सचिव डॉ. कुलदीप आर्य, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की सचिव पी. भारती, गुजरात स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स मिशन की मिशन डायरेक्टर नेहा कुमारी, जिला विकास अधिकारी विदेह खरे, NMHC के चीफ ऑफ गैलरीज प्रोफेसर वसंत शिंदे, रेंज आईजी राघवेन्द्र वत्स तथा जिला पुलिस अधीक्षक ओमप्रकाश जाट सहित राज्य प्रशासन के अनेक वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

आगे की राह

यह परियोजना अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित करने की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री के इस दौरे से संकेत मिलता है कि राज्य सरकार परियोजना की समय-सीमा के प्रति गंभीर है। आने वाले महीनों में फेज-1 के अंतर्गत निर्माण कार्य पूर्ण होने की उम्मीद है, जिसके बाद यह स्थल देश और दुनिया के पर्यटकों के लिए एक नई सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर के रूप में उपलब्ध होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि 'विकास और विरासत' की राजनीतिक कथा का एक अहम प्रतीक बन चुका है — और मुख्यमंत्री का व्यक्तिगत दौरा इसी प्राथमिकता को रेखांकित करता है। सवाल यह है कि इतनी उच्च-स्तरीय निगरानी के बावजूद समय-सीमा पर कितनी बार पुनरावलोकन हो चुका है — जो सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। भारत में हेरिटेज-टूरिज्म परियोजनाओं का इतिहास रहा है कि घोषणाएँ जल्दी होती हैं, लेकिन वैश्विक-स्तर की सुविधाएँ और पर्यटक-प्रवाह हमेशा अनुमान के अनुरूप नहीं आता। लोथल की विरासत निर्विवाद है — असली परीक्षा यह होगी कि यह परिसर अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को कितना और कब तक टिकाए रख पाता है।
RashtraPress
16 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर (NMHC) लोथल क्या है?
लोथल स्थित राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर (NMHC) देश की पहली ऐसी परियोजना है जो भारत की प्राचीन समुद्री विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करेगी। इसमें विशेष म्यूजियम, गैलरियाँ और विश्व का सबसे ऊँचा 'लाइटहाउस म्यूजियम' शामिल हैं।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने लोथल का दौरा क्यों किया?
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने 16 अक्टूबर 2026 को NMHC की निर्माण प्रगति की व्यक्तिगत समीक्षा के लिए लोथल का दौरा किया। उन्होंने फेज-1 और फेज-2 के कार्यों की स्थिति जानी और परियोजना को समयबद्ध पूरा करने पर ज़ोर दिया।
NMHC लोथल में फेज-1 और फेज-2 में क्या-क्या शामिल है?
बैठक में फेज-1 और फेज-2 के तहत विकसित होने वाली विभिन्न सुविधाओं और साइट की विशेषताओं पर विस्तृत प्रेजेंटेशन दी गई। इनमें समुद्री इतिहास की गैलरियाँ, लाइटहाउस म्यूजियम और अन्य अंतरराष्ट्रीय स्तर के पर्यटन आकर्षण शामिल हैं।
लोथल का ऐतिहासिक महत्व क्या है?
लोथल लगभग 5,000 वर्ष पुरानी सिंधु घाटी सभ्यता का एक प्रमुख केंद्र था और दुनिया के सबसे प्राचीन ज्ञात बंदरगाहों में से एक माना जाता है। इसी ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व के कारण यहाँ NMHC की स्थापना का चयन किया गया।
NMHC कब तक पर्यटकों के लिए खुलेगा?
परियोजना की सटीक उद्घाटन तिथि अभी आधिकारिक रूप से घोषित नहीं की गई है। मुख्यमंत्री ने 16 अक्टूबर 2026 के दौरे में कार्य की समयबद्ध समाप्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, और फेज-1 के निकट भविष्य में पूर्ण होने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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