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कोल इंडिया का ₹69,346 करोड़ का विस्तार: कोयला गैसीकरण, नवीकरणीय ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों में बड़ी छलांग

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कोल इंडिया का ₹69,346 करोड़ का विस्तार: कोयला गैसीकरण, नवीकरणीय ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों में बड़ी छलांग

सारांश

कोल इंडिया अब सिर्फ कोयला खनन कंपनी नहीं — यह भारत की ऊर्जा रूपांतरण कहानी का नया किरदार बनने की तैयारी में है। ₹69,346 करोड़ के निवेश, 550 मेगावाट सौर क्षमता और महत्वपूर्ण खनिजों में विस्तार के साथ, CIL का यह दांव बताता है कि सार्वजनिक क्षेत्र भी ऊर्जा बदलाव की दौड़ में है।

मुख्य बातें

कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) पाँच क्षेत्रों — कोयला गैसीकरण, थर्मल पावर, नवीकरणीय ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज और विविधीकृत खनिज — में विस्तार कर रही है।
चार कोयले से रसायन परियोजनाओं में ₹69,346 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है।
CIL लगभग 550 मेगावाट सौर क्षमता चालू कर चुकी है; गोरखपुर में 20 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट विकासाधीन है।
ओडिशा में 80 मेगावाट / 320 मेगावाट-घंटा BESS पोर्टफोलियो और तेलंगाना में TGGENCO परियोजना पर काम जारी।
मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ में ग्रेफाइट तथा आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र में दुर्लभ पृथ्वी तत्वों के खनिज अवसर चिह्नित।
CIL-DVC संयुक्त उद्यम में झारखंड के चंद्रपुरा में 2×800 मेगावाट अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल प्लांट; दोनों की 50:50 हिस्सेदारी।

कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) अपनी पारंपरिक कोयला खनन पहचान से बाहर निकलकर एक विविधीकृत ऊर्जा, खनिज और प्रौद्योगिकी-केंद्रित संगठन के रूप में तेज़ी से कदम बढ़ा रही है। 20 सितंबर 2026 को जारी कंपनी के बयान के अनुसार, कोयला गैसीकरण, नवीकरणीय ऊर्जा, बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS), महत्वपूर्ण खनिज और उन्नत सामग्री — इन पाँच परस्पर पूरक क्षेत्रों में CIL का व्यापक विस्तार कार्यक्रम राष्ट्रीय ऊर्जा रूपांतरण का अहम स्तंभ बनता जा रहा है।

पाँच मज़बूत क्षेत्रों पर टिका विस्तार पोर्टफोलियो

CIL का बिज़नेस डेवलपमेंट पोर्टफोलियो पाँच प्रमुख स्तंभों पर खड़ा है — कोयला गैसीकरण एवं कोयले से रसायन, थर्मल पावर, नवीकरणीय ऊर्जा एवं स्टोरेज, महत्वपूर्ण खनिज एवं उन्नत सामग्री, तथा लौह अयस्क सहित विविधीकृत खनिज। इस पोर्टफोलियो में चार कोयले से रसायन परियोजनाओं में ₹69,346 करोड़ का निवेश, 2×800 मेगावाट चंद्रपुरा अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल विस्तार और 550 मेगावाट से अधिक की चालू सौर क्षमता पहले से शामिल है।

कोयला गैसीकरण: आयात निर्भरता घटाने की रणनीति

कोयला गैसीकरण प्रक्रिया में कोयले को सिंथेसिस गैस (सिनगैस) में बदला जाता है, जिससे सिंथेटिक नेचुरल गैस (SNG), अमोनिया, यूरिया, मेथनॉल और अन्य रसायन बनाए जा सकते हैं। CIL की चार प्रमुख कोयले से रसायन पहलों में तलचर फर्टिलाइजर्स लिमिटेड, भारत कोल गैसीफिकेशन एंड केमिकल्स लिमिटेड, कोल गैस इंडिया लिमिटेड और CIL-BPCL चंद्रपुरा कोल-टू-SNG पहल शामिल हैं। कंपनी का मानना है कि यह तकनीक रासायनिक मूल्य निर्माण के साथ-साथ आयात पर निर्भरता घटाने में सहायक होगी।

तकनीकी स्तर पर प्राथमिकता उच्च-राख वाले भारतीय कोयले के अनुरूप प्रक्रियाओं को अनुकूलित करना, महत्वपूर्ण उपकरणों का स्थानीयकरण, डिजिटल ट्विन तकनीक, पूर्वानुमान आधारित रखरखाव और उत्सर्जन प्रबंधन पर है। परियोजनाओं को दोहराने का निर्णय परिचालन आँकड़ों और वाणिज्यिक प्रदर्शन की पुष्टि के बाद ही लिया जाएगा — एक सावधान और चरणबद्ध दृष्टिकोण।

गौरतलब है कि अंडरग्राउंड कोल गैसीफिकेशन (UCG) अभी वैश्विक स्तर पर व्यावसायिक रूप से सिद्ध नहीं है। CIL ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) के कस्ता वेस्ट ब्लॉक में इस पर चरणबद्ध पायलट परियोजना चला रही है।

थर्मल पावर और नवीकरणीय ऊर्जा: दोहरी रणनीति

CIL और दामोदर वैली कॉरपोरेशन (DVC) झारखंड के चंद्रपुरा में 2×800 मेगावाट अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल ब्राउनफील्ड विस्तार पर मिलकर काम कर रहे हैं। प्रस्तावित संयुक्त उद्यम में दोनों की 50:50 हिस्सेदारी होगी और DVC बिजली बिक्री में सहयोग करेगा।

नवीकरणीय ऊर्जा मोर्चे पर CIL दो मॉडल पर काम कर रही है — कार्बन फुटप्रिंट घटाने के लिए कैप्टिव सौर परियोजनाएँ और वाणिज्यिक उत्पादन के लिए यूटिलिटी-स्केल परियोजनाएँ। उल्लेखनीय है कि गोरखपुर के चिलवा ताल में 20 मेगावाट AC ग्रिड-कनेक्टेड फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट भी विकसित किया जा रहा है, जो भूमि की बचत करने वाला समाधान है।

BESS और महत्वपूर्ण खनिज: भविष्य की नींव

CIL के बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) नवीकरणीय ऊर्जा के ग्रिड एकीकरण, पीक डिमांड प्रबंधन और ट्रांसमिशन दक्षता बढ़ाने में भूमिका निभाते हैं। कंपनी तेलंगाना की TGGENCO चौटुप्पल परियोजना के साथ-साथ ओडिशा में चार स्थानों पर 80 मेगावाट / 320 मेगावाट-घंटा क्षमता का BESS पोर्टफोलियो विकसित कर रही है, जिसमें चार घंटे की स्टोरेज अवधि होगी।

महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्र में CIL की नज़र मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में ग्रेफाइट संपत्तियों तथा आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र में दुर्लभ पृथ्वी तत्वों (REE) और दुर्लभ धातुओं के अवसरों पर है। ये खनिज बैटरी, इलेक्ट्रिक वाहनों, नवीकरणीय ऊर्जा, एयरोस्पेस और रक्षा उद्योग की बढ़ती माँग के लिए अनिवार्य हैं।

आगे की दिशा

CIL की यह बहुआयामी रणनीति भारत के ऊर्जा रूपांतरण लक्ष्यों और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। विशेषज्ञों का मानना है कि परियोजनाओं का क्रियान्वयन जितनी तेज़ी और दक्षता से होगा, उतनी ही अधिक क्षमता CIL के पास वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन में भारत की भूमिका मज़बूत करने की होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके साथ कुछ बड़े सवाल भी खड़े होते हैं। कोयला गैसीकरण तकनीक, विशेषकर UCG, अभी तक वैश्विक स्तर पर व्यावसायिक रूप से सिद्ध नहीं हुई है — ऐसे में ₹69,346 करोड़ का दाँव जोखिम से खाली नहीं। दूसरी बात, भारत के उच्च-राख कोयले के लिए प्रक्रिया अनुकूलन एक तकनीकी चुनौती है जिसका समाधान अभी प्रयोगशाला स्तर पर है। सौर और BESS विस्तार सकारात्मक संकेत हैं, लेकिन मुख्य आय अभी भी कोयले पर टिकी है। असली परीक्षा यह होगी कि क्या यह विविधीकरण व्यावसायिक परिणामों में बदलता है या महज़ परियोजनाओं की लंबी सूची बनकर रह जाता है।
RashtraPress
20 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोल इंडिया किन नए क्षेत्रों में विस्तार कर रही है?
कोल इंडिया कोयला गैसीकरण, थर्मल पावर, नवीकरणीय ऊर्जा एवं बैटरी स्टोरेज, महत्वपूर्ण खनिज और लौह अयस्क सहित विविधीकृत खनिजों में विस्तार कर रही है। इन पाँच क्षेत्रों में कंपनी ने राष्ट्रीय स्तर की कई परियोजनाएँ शुरू की हैं।
CIL की कोयला गैसीकरण परियोजनाओं में कितना निवेश है?
कोल इंडिया की चार प्रमुख कोयले से रसायन परियोजनाओं में कुल ₹69,346 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है। इनमें तलचर फर्टिलाइजर्स लिमिटेड, भारत कोल गैसीफिकेशन एंड केमिकल्स लिमिटेड, कोल गैस इंडिया लिमिटेड और CIL-BPCL चंद्रपुरा कोल-टू-SNG पहल शामिल हैं।
कोल इंडिया की BESS परियोजनाएँ कहाँ हैं?
कोल इंडिया ओडिशा में चार स्थानों पर 80 मेगावाट / 320 मेगावाट-घंटा क्षमता का BESS पोर्टफोलियो विकसित कर रही है, जिसमें चार घंटे की स्टोरेज अवधि होगी। इसके अलावा तेलंगाना में TGGENCO चौटुप्पल परियोजना भी शामिल है।
CIL महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में क्या कर रही है?
CIL मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में ग्रेफाइट संपत्तियों तथा आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र में दुर्लभ पृथ्वी तत्वों और दुर्लभ धातुओं के अवसरों पर काम कर रही है। ये खनिज बैटरी, इलेक्ट्रिक वाहनों, एयरोस्पेस और रक्षा उद्योग के लिए अनिवार्य हैं।
चंद्रपुरा अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल पावर प्रोजेक्ट क्या है?
यह झारखंड के चंद्रपुरा में CIL और दामोदर वैली कॉरपोरेशन (DVC) का 2×800 मेगावाट अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल ब्राउनफील्ड विस्तार प्रोजेक्ट है, जिसमें दोनों की 50:50 हिस्सेदारी होगी। DVC बिजली बिक्री में सहयोग करेगा।
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