6 अगस्त 2026
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क्लीन एनर्जी टेक्नोलॉजी में भारत बने ग्लोबल प्रोड्यूसर: कुमारस्वामी का CII मंच से आह्वान

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क्लीन एनर्जी टेक्नोलॉजी में भारत बने ग्लोबल प्रोड्यूसर: कुमारस्वामी का CII मंच से आह्वान

सारांश

केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी ने CII मंच से साफ़ कहा — भारत को क्लीन एनर्जी का उपभोक्ता नहीं, निर्माता बनना है। ₹18,100 करोड़ की बैटरी PLI, ₹10,900 करोड़ की पीएम ई-ड्राइव और ₹7,280 करोड़ की रेयर अर्थ मैग्नेट योजना इसी महत्वाकांक्षा की नींव हैं।

मुख्य बातें

कुमारस्वामी ने 6 अगस्त 2026 को 7वें CII इंटरनेशनल एनर्जी कॉन्फ्रेंस में भारत को क्लीन एनर्जी टेक्नोलॉजी का वैश्विक उत्पादक बनाने का आह्वान किया।
उन्नत रसायन सेल बैटरी PLI के तहत ₹18,100 करोड़ की प्रतिबद्धता; लक्ष्य 50 गीगावॉट घरेलू बैटरी विनिर्माण क्षमता।
₹10,900 करोड़ की पीएम ई-ड्राइव योजना इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के साथ-साथ पूरा औद्योगिक इकोसिस्टम विकसित करने पर केंद्रित।
₹7,280 करोड़ की 'सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट' योजना से ऑटोमोटिव, रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र की आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षित होगी।
भारत को दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्टील उत्पादक बताते हुए ग्रीन स्टील और डीकार्बोनाइजेशन को ऊर्जा संक्रमण की रीढ़ कहा गया।

केंद्रीय इस्पात एवं भारी उद्योग मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने 6 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 7वें CII इंटरनेशनल एनर्जी कॉन्फ्रेंस और एग्जिबिशन में स्पष्ट किया कि भारत को स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकी का महज उपभोक्ता नहीं, बल्कि उसका अग्रणी वैश्विक उत्पादक बनना होगा। 'एनर्जी सिक्योरिटी और सप्लाई चेन' विषयक विशेष पूर्ण सत्र में मुख्य भाषण देते हुए उन्होंने कहा कि किसी राष्ट्र की असली शक्ति अब ऊर्जा संसाधनों तक पहुँच से नहीं, बल्कि भविष्य की प्रौद्योगिकियों के लिए मैन्युफैक्चरिंग क्षमता, नवाचार और सुदृढ़ आपूर्ति श्रृंखला से तय होती है।

वैश्विक बदलाव और भारत की रणनीति

कुमारस्वामी ने रेखांकित किया कि हालिया भू-राजनीतिक उथल-पुथल, सप्लाई चेन में व्यवधान और आवश्यक खनिजों के लिए बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धा ने औद्योगिक प्राथमिकताओं को मौलिक रूप से बदल दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 'आत्मनिर्भर भारत' के विज़न का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत विश्वसनीय अंतरराष्ट्रीय मूल्य श्रृंखलाओं से जुड़े रहते हुए घरेलू स्तर पर प्रतिस्पर्धी मैन्युफैक्चरिंग क्षमताएँ विकसित कर रहा है। गौरतलब है कि औद्योगिक क्षमता और ऊर्जा सुरक्षा को अब अलग-अलग नहीं देखा जा सकता — यह सोच नीति-निर्माण में एक बड़े बदलाव का संकेत है।

स्टील: स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण की रीढ़

मंत्री ने इस्पात को ऊर्जा परिवर्तन की आधारशिला बताया। उनके अनुसार, सोलर पार्क, विंड टर्बाइन, ट्रांसमिशन नेटवर्क, बैटरी विनिर्माण सुविधाएँ, बंदरगाह और ग्रीन हाइड्रोजन परियोजनाएँ — सभी अंततः स्टील पर ही निर्भर हैं। दुनिया के दूसरे सबसे बड़े स्टील उत्पादक के रूप में भारत, घरेलू बुनियादी ढाँचे की बढ़ती माँग के साथ-साथ सस्टेनेबल स्टील की वैश्विक माँग को पूरा करने की स्थिति में है। उन्होंने ग्रीन स्टील की ओर बढ़ने को पर्यावरणीय और आर्थिक, दोनों दृष्टियों से अनिवार्य बताया और कहा कि सरकार इस्पात मूल्य श्रृंखला में नवीकरणीय ऊर्जा की तैनाती, ऊर्जा-कुशल प्रौद्योगिकियाँ और त्वरित डीकार्बोनाइजेशन को बढ़ावा दे रही है।

बैटरी, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और PLI का दाँव

कुमारस्वामी ने ₹10,900 करोड़ के बजट वाली पीएम ई-ड्राइव योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह केवल इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री बढ़ाने की कोशिश नहीं है, बल्कि एक पूर्ण औद्योगिक इकोसिस्टम खड़ा करने का प्रयास है — जिसमें घरेलू मैन्युफैक्चरिंग, लोकलाइजेशन और आपूर्ति श्रृंखला की मज़बूती एक साथ सुनिश्चित की जा रही है। उन्नत रसायन सेल बैटरियों के लिए उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना के तहत सरकार ने 50 गीगावॉट घरेलू बैटरी विनिर्माण क्षमता स्थापित करने के लिए ₹18,100 करोड़ की प्रतिबद्धता जताई है। यह निवेश आयातित बैटरी प्रौद्योगिकी पर निर्भरता कम करने की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है।

दुर्लभ खनिज और अंतरराष्ट्रीय सहयोग

मंत्री ने माना कि आवश्यक खनिजों तक पहुँच अब एक रणनीतिक अनिवार्यता बन चुकी है। उन्होंने बताया कि भारत रेयर अर्थ, एडवांस्ड मटीरियल्स और खनिज प्रसंस्करण के क्षेत्रों में घरेलू क्षमता के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी बढ़ा रहा है। इसी कड़ी में सरकार की ₹7,280 करोड़ की 'सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट' विनिर्माण योजना का ज़िक्र किया, जिसे ऑटोमोटिव, रक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा और एयरोस्पेस क्षेत्रों की आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षित करने की दिशा में महत्त्वपूर्ण कदम बताया।

सहयोग का आह्वान और आगे की राह

कुमारस्वामी ने सरकार, उद्योग, शिक्षा जगत, अनुसंधान संस्थानों और वित्तीय संगठनों के बीच गहरे तालमेल का आह्वान करते हुए कहा कि मज़बूत सप्लाई चेन केवल नीतिगत बदलावों से नहीं बनती — इसके लिए समग्र पारिस्थितिकी तंत्र की ज़रूरत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश की ऊर्जा महत्वाकांक्षाएँ तभी साकार होंगी जब स्टील, भारी इंजीनियरिंग, बैटरी, ट्रांसफार्मर, विद्युत उपकरण, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और उन्नत औद्योगिक प्रौद्योगिकी को समेटने वाला एक सशक्त मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम तैयार हो। आने वाले वर्षों में भारत की इस क्षेत्र में नीतिगत सक्रियता और निवेश की गति यह तय करेगी कि वह वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन में उपभोक्ता की भूमिका से आगे बढ़कर निर्माता की भूमिका में कब और कैसे स्थापित होता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि ₹18,100 करोड़ की बैटरी PLI और ₹10,900 करोड़ की पीएम ई-ड्राइव जैसी योजनाएँ घोषणाओं से ज़मीनी उत्पादन तक कितनी तेज़ी से पहुँचती हैं — क्योंकि भारत की PLI योजनाओं का इतिहास बताता है कि क्षमता निर्माण और वास्तविक रोज़गार-उत्पादन के बीच का अंतर अक्सर बड़ा रहा है। रेयर अर्थ और बैटरी खनिजों में चीन की वैश्विक पकड़ को देखते हुए, भारत का अंतरराष्ट्रीय सहयोग का रास्ता सही है, पर उसकी गति और विशिष्टता अभी अस्पष्ट है। ग्रीन स्टील की बात करना और उसके लिए ठोस कार्बन-मूल्य निर्धारण ढाँचा तैयार करना — दोनों में फ़र्क है, जिस पर सरकार को जल्द स्पष्टता देनी होगी।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एच.डी. कुमारस्वामी ने CII एनर्जी कॉन्फ्रेंस में क्या कहा?
केंद्रीय इस्पात एवं भारी उद्योग मंत्री कुमारस्वामी ने कहा कि भारत को क्लीन एनर्जी टेक्नोलॉजी का वैश्विक उपभोक्ता नहीं, बल्कि उसके उपकरणों, सामग्रियों और प्रौद्योगिकियों का प्रमुख वैश्विक उत्पादक बनना चाहिए। उन्होंने इसके लिए मैन्युफैक्चरिंग, नवाचार और सुदृढ़ सप्लाई चेन को अनिवार्य बताया।
पीएम ई-ड्राइव योजना क्या है और इसका बजट कितना है?
पीएम ई-ड्राइव योजना केंद्र सरकार की ₹10,900 करोड़ की पहल है, जो केवल इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री बढ़ाने तक सीमित नहीं है — यह घरेलू मैन्युफैक्चरिंग, लोकलाइजेशन और आपूर्ति श्रृंखला की मज़बूती को एक साथ विकसित करने पर केंद्रित है।
भारत की बैटरी PLI योजना का लक्ष्य क्या है?
उन्नत रसायन सेल बैटरियों के लिए PLI योजना के तहत सरकार ने ₹18,100 करोड़ की प्रतिबद्धता जताई है और लक्ष्य 50 गीगावॉट घरेलू बैटरी विनिर्माण क्षमता स्थापित करना है। इससे आयातित बैटरी तकनीक पर निर्भरता कम होगी और दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा मज़बूत होगी।
सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट योजना क्यों अहम है?
यह ₹7,280 करोड़ की योजना ऑटोमोटिव, रक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा और एयरोस्पेस जैसे रणनीतिक क्षेत्रों के लिए रेयर अर्थ मैग्नेट की घरेलू आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षित करने के लिए है। यह भारत की आयात-निर्भरता घटाने और महत्त्वपूर्ण खनिज क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
ग्रीन स्टील को ऊर्जा संक्रमण से कैसे जोड़ा जा रहा है?
कुमारस्वामी ने स्टील को स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण की रीढ़ बताया, क्योंकि सोलर पार्क, विंड टर्बाइन, ट्रांसमिशन नेटवर्क और ग्रीन हाइड्रोजन परियोजनाएँ सभी स्टील पर निर्भर हैं। सरकार इस्पात क्षेत्र में नवीकरणीय ऊर्जा की अधिक तैनाती, ऊर्जा-कुशल प्रौद्योगिकियाँ और डीकार्बोनाइजेशन को प्रोत्साहित कर रही है।
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