ई-मोबिलिटी की सफलता सिर्फ EV बिक्री से नहीं मापें, तकनीक और स्थानीय मूल्यवर्धन पर ज़ोर दें: कुमारस्वामी
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने 2 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में स्पष्ट किया कि भारत के इलेक्ट्रिक मोबिलिटी परिवर्तन को केवल बेचे गए इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या से नहीं आँका जाना चाहिए। उन्होंने ऑटोमोटिव और ऑटो कंपोनेंट उद्योग से प्रौद्योगिकी विकास, डिज़ाइन और घरेलू मूल्यवर्धन में अधिक साहसपूर्वक निवेश करने का आह्वान किया।
मुख्य घटनाक्रम
ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ACMA) के 66वें वार्षिक सत्र को संबोधित करते हुए कुमारस्वामी ने कहा कि भारत के गतिशीलता परिवर्तन के अगले चरण में पैमाने का निर्माण, स्थानीयकरण को गहरा करना, नवाचार में तेज़ी लाना और देश को उन्नत एवं हरित गतिशीलता प्रौद्योगिकियों के लिए वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी केंद्र के रूप में स्थापित करना प्राथमिकता होनी चाहिए।
उन्होंने कहा, "हमारी सफलता को केवल बेचे गए इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या से नहीं मापा जा सकता। इसे इस बात से भी मापा जाना चाहिए कि भारत में कितनी तकनीक विकसित की गई है, घरेलू स्तर पर कितना मूल्यवर्धन किया गया है, नई आपूर्ति श्रृंखलाओं में कितने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) भाग ले रहे हैं और भारतीय उत्पाद वैश्विक बाज़ारों में कितनी प्रभावी ढंग से प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं।"
PLI योजना के उत्साहजनक आँकड़े
कुमारस्वामी ने बताया कि ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट उद्योग के लिए उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना उत्साहजनक परिणाम दे रही है। 30 जून 2026 तक योजना के तहत स्वीकृत आवेदकों ने ₹45,477 करोड़ के निवेश की सूचना दी, जिससे 67,000 से अधिक रोज़गार के अवसर सृजित हुए। यह आँकड़ा उद्योग की PLI के प्रति बढ़ती प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
वैश्विक नेतृत्व का आह्वान
मंत्री ने ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट निर्माताओं से स्वच्छ, अधिक कुशल और उभरती प्रौद्योगिकियों में निवेश बढ़ाने का आग्रह किया — जिसका उद्देश्य न केवल भारत के लिए उत्पाद बनाना हो, बल्कि उन्हें वैश्विक बाज़ारों के लिए भी विकसित करना हो। उन्होंने कहा, "भारत को वैश्विक गतिशीलता संक्रमण में केवल भाग ही नहीं लेना चाहिए — भारत को इसका नेतृत्व करने में मदद करनी चाहिए।"
उद्योग पर व्यापक प्रभाव
कुमारस्वामी ने रेखांकित किया कि ऑटोमोटिव और ऑटो कंपोनेंट क्षेत्र भारत के औद्योगिक विकास के लिए केंद्रीय महत्व रखता है। यह क्षेत्र लाखों लोगों की आजीविका का आधार है और MSME के एक विशाल पारिस्थितिकी तंत्र को सहारा देता है। इसके अतिरिक्त इसका इस्पात, इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजीनियरिंग, रसायन, लॉजिस्टिक्स और सेवाओं जैसे उद्योगों पर भी गुणक प्रभाव पड़ता है।
आगे की राह
भारी उद्योग मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि वह PLI योजना के कार्यान्वयन को और बेहतर बनाने, परिचालन संबंधी चुनौतियों को दूर करने तथा निवेश और नवाचार के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने के लिए ACMA और सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) जैसे उद्योग निकायों के साथ मिलकर काम करता रहेगा। यह सहयोग तब और महत्वपूर्ण हो जाता है जब भारत 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रहा है।