7 जुलाई 2026
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पीएम-सेतु योजना को राष्ट्रव्यापी मंजूरी, आईटीआई आधुनिकीकरण के लिए ₹1,237.58 करोड़ स्वीकृत

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पीएम-सेतु योजना को राष्ट्रव्यापी मंजूरी, आईटीआई आधुनिकीकरण के लिए ₹1,237.58 करोड़ स्वीकृत

सारांश

केंद्र सरकार ने पीएम-सेतु योजना को पायलट से राष्ट्रव्यापी स्तर पर ले जाने की मंजूरी दी है। ओडिशा, गुजरात और तेलंगाना के पाँच आईटीआई क्लस्टरों के लिए ₹1,237.58 करोड़ के उद्योग-साझेदारी निवेश प्रस्ताव स्वीकृत हुए हैं — जो देश के कौशल विकास ढाँचे को उद्योग की जरूरतों से जोड़ने की दिशा में एक अहम कदम है।

मुख्य बातें

पीएम-सेतु योजना को पायलट चरण से आगे बढ़ाकर 200 आईटीआई क्लस्टरों में राष्ट्रव्यापी लागू करने की मंजूरी दी गई।
₹1,237.58 करोड़ की पाँच रणनीतिक निवेश योजनाओं (एसआईपी) को 7 जुलाई 2026 को स्वीकृति मिली।
निवेश ओडिशा (बारबिल) , गुजरात (सूरत) और तेलंगाना (ओल्ड सिटी, पटानचेरू, संगारेड्डी) के क्लस्टरों के लिए है।
तेलंगाना के पटानचेरू क्लस्टर को सर्वाधिक ₹275.24 करोड़ का निवेश मिलेगा।
एनएससी की चौथी बैठक की अध्यक्षता सचिव देबाश्री मुखर्जी ने की; पीएसयू भागीदारी और प्रक्रिया-सरलीकरण को भी मंजूरी दी गई।

केंद्र सरकार ने 7 जुलाई 2026 को प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड आईटीआई (पीएम-सेतु) योजना को पायलट चरण से आगे बढ़ाकर पूरे देश में लागू करने की स्वीकृति दे दी है। इसके साथ ही कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) ने उद्योग-साझेदारी के आधार पर औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) के आधुनिकीकरण हेतु ₹1,237.58 करोड़ की पाँच रणनीतिक निवेश योजनाओं (एसआईपी) को भी हरी झंडी दी है। यह निर्णय पीएम-सेतु की राष्ट्रीय संचालन समिति (एनएससी) की चौथी बैठक में लिया गया।

राष्ट्रव्यापी विस्तार का स्वरूप

एनएससी की इस बैठक की अध्यक्षता कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय की सचिव देबाश्री मुखर्जी ने की। समिति ने तय किया कि पीएम-सेतु योजना को देश भर के 200 चिन्हित आईटीआई क्लस्टरों में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपनी उद्योग-तैयारी और कार्यान्वयन क्षमता के आधार पर इस योजना को अपनाने के लिए स्वतंत्र होंगे।

मंत्रालय के अनुसार, योजना के सुचारु क्रियान्वयन के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाने, उद्योगों की भागीदारी बढ़ाने, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) को अधिक सक्रिय रूप से जोड़ने और संस्थागत ढाँचे को सुदृढ़ करने के प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई है।

पाँच एसआईपी: राज्यवार निवेश विवरण

बैठक का सबसे अहम फैसला ₹1,237.58 करोड़ के पाँच रणनीतिक निवेश प्रस्तावों की स्वीकृति रही, जो ओडिशा, गुजरात और तेलंगाना के आईटीआई क्लस्टरों को उद्योग-साझेदारों के सहयोग से आधुनिक बनाएंगे।

ओडिशा में सरकारी आईटीआई बारबिल क्लस्टर के लिए एक कंपनी को एंकर इंडस्ट्री पार्टनर नियुक्त किया गया है, जो ₹240.21 करोड़ का निवेश करेगी। गुजरात में सरकारी आईटीआई सूरत क्लस्टर के लिए एक एकीकृत फ्लैट कार्बन स्टील निर्माता कंपनी ₹240.18 करोड़ लगाएगी।

तेलंगाना में तीन क्लस्टरों को मंजूरी मिली है। सरकारी आईटीआई ओल्ड सिटी क्लस्टर में स्वास्थ्य शिक्षा एवं प्रशिक्षण क्षेत्र की एक संस्था ₹241.01 करोड़ निवेश करेगी। सरकारी आईटीआई पटानचेरू क्लस्टर के लिए ₹275.24 करोड़ और सरकारी आईटीआई संगारेड्डी क्लस्टर के लिए ₹240.94 करोड़ का निवेश स्वीकृत किया गया है।

योजना का उद्देश्य और महत्व

मंत्रालय के अनुसार, इन रणनीतिक निवेश योजनाओं की सिफारिश संबंधित राज्यों की संचालन समितियों ने की थी। इनका मुख्य उद्देश्य आईटीआई की आधारभूत संरचना को आधुनिक रूप देना, उद्योगों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप नए प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करना और प्रशिक्षण संस्थानों तथा उद्योगों के बीच बेहतर तालमेल के जरिये युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना है।

यह ऐसे समय में आया है जब देश में कुशल कार्यबल की माँग तेजी से बढ़ रही है और पारंपरिक आईटीआई पाठ्यक्रमों पर उद्योग-प्रासंगिकता को लेकर सवाल उठते रहे हैं। गौरतलब है कि पीएम-सेतु केंद्र सरकार की प्रमुख कौशल विकास योजनाओं में से एक है, जिसका लक्ष्य आईटीआई नेटवर्क को अत्याधुनिक सुविधाओं, भविष्योन्मुखी पाठ्यक्रमों और उद्योग-साझेदारी से सुसज्जित करना है।

आगे की राह

राज्यों की संचालन समितियों की सिफारिशों के आधार पर चुने गए इन पाँच क्लस्टरों के साथ, पीएम-सेतु का राष्ट्रव्यापी विस्तार अब औपचारिक रूप से शुरू हो गया है। आने वाले महीनों में शेष 200 क्लस्टरों में योजना के क्रियान्वयन की गति इस बात पर निर्भर करेगी कि राज्य सरकारें उद्योग-साझेदारी कितनी तेजी से सुनिश्चित कर पाती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन में है। देश के हजारों आईटीआई में से महज 200 क्लस्टरों से शुरुआत और उद्योग-साझेदारी पर निर्भरता यह सवाल उठाती है कि बाकी संस्थान कब और कैसे आधुनिक बनेंगे। गौरतलब है कि भारत के आईटीआई नेटवर्क की उद्योग-प्रासंगिकता पर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं, और पिछली कौशल योजनाओं में प्लेसमेंट डेटा अक्सर लक्ष्यों से पीछे रहा है। बिना पारदर्शी रोजगार-परिणाम मापन के, यह निवेश बुनियादी ढाँचे की चमक तो दे सकता है, पर युवाओं के हाथ में नौकरी देने की गारंटी नहीं।
RashtraPress
7 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएम-सेतु योजना क्या है?
पीएम-सेतु यानी 'प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड आईटीआई' केंद्र सरकार की प्रमुख कौशल विकास योजना है, जिसका उद्देश्य देश के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) को उद्योग-साझेदारी के जरिये आधुनिक बनाना और युवाओं की रोजगार-क्षमता बढ़ाना है। 7 जुलाई 2026 को इसे पायलट चरण से राष्ट्रव्यापी स्तर पर विस्तारित करने की मंजूरी दी गई।
₹1,237.58 करोड़ का निवेश किन राज्यों में होगा?
यह निवेश ओडिशा (बारबिल क्लस्टर — ₹240.21 करोड़), गुजरात (सूरत क्लस्टर — ₹240.18 करोड़) और तेलंगाना (ओल्ड सिटी — ₹241.01 करोड़, पटानचेरू — ₹275.24 करोड़, संगारेड्डी — ₹240.94 करोड़) के पाँच आईटीआई क्लस्टरों में किया जाएगा। इन परियोजनाओं की सिफारिश संबंधित राज्यों की संचालन समितियों ने की थी।
पीएम-सेतु के तहत कितने आईटीआई क्लस्टर कवर होंगे?
राष्ट्रव्यापी विस्तार के तहत देश भर के 200 चिन्हित आईटीआई क्लस्टरों में यह योजना लागू की जाएगी। राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपनी उद्योग-तैयारी और कार्यान्वयन क्षमता के अनुसार इसे अपना सकेंगे।
इस योजना की देखरेख कौन करेगा?
पीएम-सेतु की राष्ट्रीय संचालन समिति (एनएससी) इस योजना की निगरानी करती है, जिसकी अध्यक्षता कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय की सचिव देबाश्री मुखर्जी करती हैं। 7 जुलाई 2026 को हुई एनएससी की चौथी बैठक में राष्ट्रव्यापी विस्तार और पाँच एसआईपी को मंजूरी दी गई।
इस योजना से युवाओं को क्या फायदा होगा?
पीएम-सेतु के तहत आईटीआई की आधारभूत संरचना को उन्नत किया जाएगा, उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप नए प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू होंगे और प्रशिक्षण संस्थानों व उद्योगों के बीच बेहतर तालमेल से युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। पीएसयू की बढ़ी भागीदारी और सरलीकृत प्रक्रियाएँ इस लक्ष्य को और मजबूत करेंगी।
राष्ट्र प्रेस
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