मंत्रिमंडल ने पीएम-सेतु योजना को दी मंजूरी, युवा, महिलाएं और ग्रामीण उद्यमियों को मिलेगा विशेष लाभ
सारांश
Key Takeaways
- पीएम-सेतु योजना से व्यावसायिक प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार होगा।
- युवाओं और महिलाओं को विशेष समर्थन मिलेगा।
- स्थानिक उद्योग की आवश्यकताओं के अनुसार पाठ्यक्रम को अद्यतन किया जाएगा।
- केंद्र सरकार और राज्य सरकार मिलकर कार्यान्वयन करेंगे।
- वैश्विक भागीदारी से प्रशिक्षकों का उन्नत प्रशिक्षण होगा।
नई दिल्ली, 9 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। मंत्रिमंडल ने देश में व्यावसायिक प्रशिक्षण की गुणवत्ता और प्रासंगिकता को बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री कौशल और रोजगार परिवर्तन की उन्नत आईटीआई (पीएम सेतु) योजना को मंजूरी दी है।
इस योजना के मुख्य उद्देश्य हैं: औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) एवं राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों (एनएसटीआई) में प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार, उद्योग मानकों के अनुसार बुनियादी ढांचे और उपकरणों का आधुनिकीकरण, नए और उभरते क्षेत्रों में उद्योग-संरेखित दीर्घकालिक और अल्पकालिक पाठ्यक्रमों की शुरुआत, मांग-संचालित कौशल और बेहतर रोजगार परिणामों के लिए उद्योग संबंध को मजबूत करना, और प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए एनएसटीआई की क्षमता को बढ़ाना।
इस योजना में दो प्रमुख घटक शामिल हैं। पहले घटक में हब और स्पोक मॉडल के अंतर्गत 1000 सरकारी आईटीआई (200 हब आईटीआई और 800 स्पोक आईटीआई) का उन्नयन किया जाएगा, जिसमें स्मार्ट क्लासरूम, आधुनिक प्रयोगशालाएं, डिजिटल सामग्री, और उद्योग की आवश्यकताओं के अनुसार नए पाठ्यक्रम शामिल होंगे।
दूसरे घटक में भुवनेश्वर, चेन्नई, हैदराबाद, कानपुर और लुधियाना में स्थित पांच एनएसटीआई की क्षमता बढ़ाई जाएगी, जिसमें वैश्विक भागीदारी के माध्यम से प्रशिक्षकों के उन्नत प्रशिक्षण पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
पीएम-सेतु का उद्देश्य उद्योग के नेतृत्व वाले शासन के माध्यम से रोजगार परिणामों में सुधार करना है और यह शिक्षार्थियों (प्रारंभिक चरण के उद्यमों और पहली बार उद्यमियों सहित) को उद्योग-प्रासंगिक कौशल, वास्तविक कार्य वातावरण, और मजबूत संस्थागत प्रणालियों तथा उद्योग संबंधों के माध्यम से करियर मार्गदर्शन, प्लेसमेंट सहायता और स्व-रोजगार सहायता प्रदान करने में सक्षम बनाता है।
इस योजना के अंतर्गत उद्योग के नेतृत्व वाले विशेष प्रयोजन वाहन (एसपीवी) उन्नयन का नेतृत्व करेंगे और स्थानीय उद्योग की आवश्यकताओं के अनुसार पाठ्यक्रम की पुनर्रचना, प्रशिक्षण वितरण मॉडल, अवसंरचना का उन्नयन, उद्योग के साथ संपर्क, और नौकरी या स्वरोजगार की सुविधा से संबंधित आवश्यक हस्तक्षेपों का प्रस्ताव करने में सक्षम होंगे।
इस योजना का कार्यान्वयन केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और उद्योग भागीदारों से बनी एक राष्ट्रीय संचालन समिति (एनएससी) द्वारा निगरानी की जाएगी। इसके अलावा, राज्य संचालन समितियां (एसएससी) प्रगति की निगरानी करेंगी। योजना में प्रभावी कार्यान्वयन के लिए समय-समय पर निगरानी और तृतीय-पक्ष द्वारा आकलन का भी प्रावधान है।
यह जानकारी केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयंत चौधरी ने लोकसभा में लिखित उत्तर में दी।