वैश्विक सप्लाई चेन बदलाव में भारत सबसे बड़ा लाभार्थी, एसोचैम रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
सारांश
मुख्य बातें
उद्योग संगठन एसोचैम (ASSOCHAM) ने 7 जुलाई 2026 को एक विस्तृत रिपोर्ट जारी की, जिसके अनुसार भारत वैश्विक सप्लाई चेन में हो रहे ऐतिहासिक बदलाव का सबसे बड़ा लाभार्थी बनकर उभर रहा है और दुनिया के प्रमुख विनिर्माण केंद्रों में अपनी स्थिति तेज़ी से मज़बूत कर रहा है। रिपोर्ट में दुनिया की 10 सबसे बड़ी विनिर्माण अर्थव्यवस्थाओं का विश्लेषण किया गया है, जो मिलकर वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग उत्पादन का लगभग 65 प्रतिशत हिस्सा हैं।
महामारी के बाद विनिर्माण वृद्धि में उछाल
रिपोर्ट के आँकड़ों के अनुसार, 2016–19 के महामारी-पूर्व दौर में भारत की औसत विनिर्माण वृद्धि दर 3.44 प्रतिशत थी, जो 2022–25 के दौरान बढ़कर 4.15 प्रतिशत हो गई। यह वृद्धि न केवल वैश्विक औसत से ऊपर है, बल्कि विश्व औसत से लगभग दो प्रतिशत अंक अधिक है। गौरतलब है कि महामारी से पहले केवल चीन, मेक्सिको और रूस ही वैश्विक औसत से अधिक विनिर्माण वृद्धि दर्ज कर रहे थे। अब भारत उस सूची में अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, इटली और ब्रिटेन के साथ शामिल हो गया है।
चीन+1 रणनीति और भारत का उभार
रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविड-19 महामारी के बाद वैश्विक विनिर्माण व्यवस्था में बुनियादी बदलाव आया है। दुनिया भर की कंपनियाँ अब केवल चीन पर निर्भर रहने के बजाय 'चीन+1', नियरशोरिंग और फ्रेंडशोरिंग जैसी रणनीतियाँ अपना रही हैं, ताकि उनकी सप्लाई चेन अधिक मज़बूत और सुरक्षित बन सके। यह ऐसे समय में आया है जब भू-राजनीतिक तनाव और व्यापार अनिश्चितताओं ने बहुराष्ट्रीय कंपनियों को अपने उत्पादन आधार में विविधता लाने पर मजबूर किया है।
सरकारी पहलों की भूमिका
रिपोर्ट के अनुसार, भारत की बढ़ती प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता के पीछे कई प्रमुख कारण हैं — मज़बूत घरेलू माँग, बेहतर आधारभूत ढाँचा, लॉजिस्टिक्स में सुधार और वैश्विक निवेश का बढ़ता प्रवाह। प्रोडक्शन लिंक्ड इन्सेंटिव (PLI) योजना, औद्योगिक कॉरिडोर और PM गति शक्ति जैसी सरकारी पहलों ने भारत को वैश्विक विनिर्माण निवेश के लिए एक पसंदीदा गंतव्य बनाने में अहम भूमिका निभाई है।
एसोचैम अध्यक्ष की राय
एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल के. मिंडा ने कहा, 'वैश्विक विनिर्माण व्यवस्था में धीरे-धीरे लेकिन महत्वपूर्ण बदलाव हो रहा है। अब कंपनियाँ केवल उत्पादन दक्षता पर ही नहीं, बल्कि सप्लाई चेन की मज़बूती और विविधता पर भी समान रूप से ध्यान दे रही हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि भारत के विनिर्माण क्षेत्र में लगातार हो रहे सुधार सरकार के आर्थिक सुधारों और निवेशकों के बढ़ते विश्वास का परिणाम हैं।
आगे की राह और सिफारिशें
एसोचैम का मानना है कि यदि भारत लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक बुनियादी ढाँचे को और मज़बूत करे, घरेलू सप्लायर नेटवर्क विकसित करे, ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस में और सुधार लाए, इंडस्ट्री 4.0 तकनीकों को बढ़ावा दे और मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) का प्रभावी उपयोग करे, तो वह वैश्विक वैल्यू चेन में अपनी स्थिति और अधिक सुदृढ़ कर सकता है। रिपोर्ट संकेत देती है कि अगले कुछ वर्ष भारत के लिए वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में अपनी पहचान स्थापित करने का सबसे उपयुक्त अवसर हो सकते हैं।