मोदी सरकार के 12 साल: GDP $1.9 ट्रिलियन से $4.1 ट्रिलियन, एसोचैम ने गिनाईं उपलब्धियाँ
सारांश
मुख्य बातें
उद्योग संगठन एसोचैम (ASSOCHAM) ने 10 जून 2026 को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीते 12 वर्षों में भारत की अर्थव्यवस्था ने व्यापक और ठोस रूपांतरण देखा है — सकल घरेलू उत्पाद (GDP) 2013-14 के 1.9 लाख करोड़ डॉलर से बढ़कर 2025-26 में 4.1 लाख करोड़ डॉलर हो गई है। संगठन के अनुसार, विनिर्माण, सेवा क्षेत्र, निर्यात और निवेश — सभी प्रमुख संकेतकों में उल्लेखनीय सुधार दर्ज हुआ है।
GDP वृद्धि और मुख्य आर्थिक संकेतक
एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल के. मिंडा ने कहा, 'हमारी अर्थव्यवस्था के विकास के बुनियादी सिद्धांत दुनिया की किसी भी बड़ी अर्थव्यवस्था के बराबर या उससे बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।' उन्होंने बताया कि GDP वृद्धि दर 2013-14 के 6.4 प्रतिशत से बढ़कर 2025-26 में 7.7 प्रतिशत हो गई है। शीर्ष 10 प्रमुख आर्थिक संकेतकों का प्रदर्शन भी मज़बूत रहा है, जिससे भारत की पहचान दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में और सुदृढ़ हुई है।
मिंडा ने प्रधानमंत्री मोदी को भारत का सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाला प्रधानमंत्री बनने पर बधाई देते हुए कहा कि इस अवधि में देश ने कई ऐतिहासिक उपलब्धियाँ अर्जित की हैं।
विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में उछाल
एसोचैम के महासचिव सौरभ सान्याल ने विनिर्माण क्षेत्र के आँकड़े साझा करते हुए बताया कि यह क्षेत्र 2013-14 में 0.7 प्रतिशत की गिरावट में था, जो 2025-26 में 10.7 प्रतिशत की वृद्धि दर तक पहुँच गया है। यह बदलाव उल्लेखनीय है, क्योंकि एक दशक पहले विनिर्माण क्षेत्र संकुचन में था।
सेवा क्षेत्र की वृद्धि दर भी इसी अवधि में 7.8 प्रतिशत से बढ़कर 9.3 प्रतिशत हो गई है। सान्याल के अनुसार, यह दोहरी तेज़ी — विनिर्माण और सेवाओं दोनों में — भारत की आर्थिक संरचना को अधिक संतुलित बना रही है।
निर्यात और निवेश में सुधार
बाहरी क्षेत्र के प्रदर्शन पर सान्याल ने बताया कि भारत का कुल निर्यात 2013-14 के 466 अरब डॉलर से बढ़कर 2025-26 में 860 अरब डॉलर हो गया है। चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) 1.7 प्रतिशत से घटकर 0.6 प्रतिशत पर आ गया है, जो बाह्य वित्तीय स्थिरता का संकेत है।
निवेश परिदृश्य में भी बड़ा बदलाव आया है। BSE सेंसेक्स 2013-14 के 22,386 अंक से बढ़कर 2025-26 में 71,947 अंक पर पहुँच गया है। इसी तरह प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) 45 अरब डॉलर से बढ़कर 95 अरब डॉलर हो गया है।
किन योजनाओं को दिया गया श्रेय
एसोचैम के मुख्य अर्थशास्त्री डॉ. एस.पी. शर्मा ने कहा कि अर्थव्यवस्था को लगातार किए गए सुधारों और संरचनात्मक पहलों का लाभ मिला है। संगठन ने जिन प्रमुख सरकारी कार्यक्रमों का उल्लेख किया उनमें मेक इन इंडिया, जन धन योजना, डिजिटल इंडिया, स्किल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, वस्तु एवं सेवा कर (GST), उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना, हरित हाइड्रोजन मिशन, नई विदेश व्यापार नीति 2023, लॉजिस्टिक्स व सीमा शुल्क का डिजिटलीकरण और भारत औद्योगिक विकास योजना (भव्य) शामिल हैं।
गौरतलब है कि यह मूल्यांकन ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर मंदी की आशंकाएँ बनी हुई हैं और भारत की विकास दर प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे ऊपर बनी हुई है। एसोचैम के अनुसार, इन नीतियों और सुधारों ने मिलकर भारत को वैश्विक आर्थिक मानचित्र पर एक 'चमकता हुआ केंद्र' बनाया है।