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पीएम-सेतु योजना के तहत पहली एसआईपी मंजूर: विशाखापट्टनम आईटीआई क्लस्टर को हरी झंडी

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पीएम-सेतु योजना के तहत पहली एसआईपी मंजूर: विशाखापट्टनम आईटीआई क्लस्टर को हरी झंडी

सारांश

पीएम-सेतु योजना के तहत पहली एसआईपी मंजूरी मिलना महज एक प्रशासनिक कदम नहीं — यह ₹60,000 करोड़ की उस महत्वाकांक्षी योजना का पहला ठोस परिणाम है जो 1,000 सरकारी आईटीआई को उद्योग-नेतृत्व वाले संस्थानों में बदलने का लक्ष्य रखती है। आंध्र प्रदेश ने पहल करके शेष राज्यों के लिए रास्ता खोल दिया है।

मुख्य बातें

राष्ट्रीय संचालन समिति ने विशाखापट्टनम आईटीआई क्लस्टर के लिए पीएम-सेतु के तहत पहली एसआईपी को मंजूरी दी।
प्रस्ताव आर्सेलरमित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया (एएम/एनएस इंडिया) द्वारा प्रस्तुत किया गया था।
आंध्र प्रदेश , एंकर इंडस्ट्री पार्टनर के साथ उद्योग साझेदारी लागू करने वाला पहला राज्य बना।
₹60,000 करोड़ की पीएम-सेतु योजना का लक्ष्य 1,000 सरकारी आईटीआई का आधुनिकीकरण।
अब तक 32 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने राज्य स्तरीय संचालन समितियाँ गठित कीं; 12 ने आरएफपी जारी किए।

राष्ट्रीय संचालन समिति (एनएससी) ने आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम आईटीआई क्लस्टर के लिए स्ट्रैटेजिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) को मंजूरी दे दी है। यह पीएम-सेतु (प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड आईटीआई) योजना के अंतर्गत स्वीकृत होने वाला पहला प्रस्ताव है। 30 मई को कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) ने इसकी पुष्टि की।

प्रस्ताव किसने रखा और क्या है इसकी विशेषता

यह प्रस्ताव आर्सेलरमित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया (एएम/एनएस इंडिया) द्वारा प्रस्तुत किया गया था। इस मंजूरी के साथ आंध्र प्रदेश, पीएम-सेतु के तहत एंकर इंडस्ट्री पार्टनर (एआईपी) को शामिल करते हुए उद्योग साझेदारी लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। अधिकारियों के अनुसार, यह उपलब्धि अन्य राज्यों के लिए एक अनुकरणीय मॉडल के रूप में काम करेगी।

बैठक का विवरण और नेतृत्व

यह मंजूरी एमएसडीई द्वारा आयोजित राष्ट्रीय संचालन समिति की तीसरी बैठक में दी गई। बैठक की अध्यक्षता मंत्रालय की सचिव देबाश्री मुखर्जी ने की। बैठक में प्रशिक्षण महानिदेशक (डीजीटी) दिलीप कुमार, विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी, राज्य सरकारों के प्रतिनिधि, उद्योग संगठनों और विकास सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

पीएम-सेतु योजना की व्यापक रूपरेखा

₹60,000 करोड़ के बजट वाली पीएम-सेतु योजना का उद्देश्य देशभर के 1,000 सरकारी आईटीआई को उद्योग-नेतृत्व वाले 'हब एंड स्पोक' मॉडल के ज़रिए आधुनिक बनाना है। इस योजना के तहत सरकारी आईटीआई को उद्योग-प्रबंधित और परिणाम-आधारित संस्थानों में रूपांतरित किया जाएगा, जिसमें बुनियादी ढाँचे के उन्नयन, उद्योगों के साथ सक्रिय जुड़ाव और युवाओं की रोज़गार क्षमता बढ़ाने पर विशेष बल दिया गया है।

राष्ट्रव्यापी प्रगति की समीक्षा

बैठक में एनएससी ने विभिन्न राज्यों में योजना की प्रगति की समीक्षा की। उद्योगों की भागीदारी बढ़ाने, प्रशासनिक ढाँचे को सुदृढ़ करने, विशेष प्रयोजन वाहनों (एसपीवी) की वित्तीय स्थिरता सुधारने और परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेज़ी लाने जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। मंत्रालय के अनुसार, अब तक 32 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने राज्य स्तरीय संचालन समितियों का गठन कर लिया है, जबकि 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने एंकर इंडस्ट्री पार्टनर्स के चयन के लिए 'रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल' (आरएफपी) जारी कर दिए हैं।

आगे की राह

गौरतलब है कि विशाखापट्टनम क्लस्टर की यह स्वीकृति पीएम-सेतु के व्यापक विस्तार की नींव रखती है। अधिकारियों ने संकेत दिया कि शेष राज्यों में भी एसआईपी प्रस्तावों की प्रक्रिया तेज़ की जाएगी, ताकि योजना का लाभ देशभर के युवाओं तक पहुँच सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा अभी बाकी है — ₹60,000 करोड़ की योजना के लिए 1,000 आईटीआई में से अब तक केवल एक क्लस्टर को हरी झंडी मिली है। 'हब एंड स्पोक' मॉडल की अवधारणा सराहनीय है, परंतु 32 में से केवल 12 राज्यों का आरएफपी जारी करना यह बताता है कि ज़मीनी क्रियान्वयन की गति अपेक्षाओं से धीमी है। भारत में कौशल विकास योजनाओं का इतिहास बताता है कि घोषणाएँ और वास्तविक नामांकन-से-रोज़गार रूपांतरण के बीच की खाई अक्सर गहरी रहती है। बिना पारदर्शी परिणाम-ट्रैकिंग के, यह योजना भी उसी श्रृंखला की अगली कड़ी बन सकती है।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएम-सेतु योजना क्या है?
पीएम-सेतु (प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड आईटीआई) एक केंद्रीय योजना है जिसका बजट ₹60,000 करोड़ है। इसका उद्देश्य देशभर के 1,000 सरकारी आईटीआई को उद्योग-नेतृत्व वाले 'हब एंड स्पोक' मॉडल के ज़रिए आधुनिक और रोज़गार-केंद्रित संस्थानों में बदलना है।
विशाखापट्टनम आईटीआई क्लस्टर की एसआईपी मंजूरी क्यों अहम है?
यह पीएम-सेतु योजना के तहत स्वीकृत होने वाला पहला स्ट्रैटेजिक इन्वेस्टमेंट प्लान है, जो योजना के व्यावहारिक क्रियान्वयन की शुरुआत का प्रतीक है। इससे आंध्र प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है जिसने एंकर इंडस्ट्री पार्टनर के साथ उद्योग साझेदारी लागू की है।
एंकर इंडस्ट्री पार्टनर (एआईपी) की भूमिका क्या होती है?
एंकर इंडस्ट्री पार्टनर वह प्रमुख उद्योग समूह होता है जो आईटीआई के प्रबंधन, पाठ्यक्रम निर्धारण और प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सीधी भागीदारी निभाता है। इस मॉडल में सरकार और उद्योग मिलकर संस्थान को बाज़ार की ज़रूरतों के अनुरूप संचालित करते हैं।
अब तक कितने राज्यों ने पीएम-सेतु के लिए कदम उठाए हैं?
32 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने राज्य स्तरीय संचालन समितियों का गठन कर लिया है। इनमें से 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने एंकर इंडस्ट्री पार्टनर्स के चयन के लिए 'रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल' (आरएफपी) भी जारी कर दिए हैं।
पीएम-सेतु के तहत आगे क्या होगा?
अधिकारियों के अनुसार, विशाखापट्टनम क्लस्टर की मंजूरी अन्य राज्यों के लिए एक मॉडल के रूप में काम करेगी। शेष राज्यों में एसआईपी प्रस्तावों की प्रक्रिया तेज़ करने और एसपीवी की वित्तीय स्थिरता सुधारने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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