ग्रीन जॉब्स क्रांति: रिन्यूएबल एनर्जी और ईवी से लाखों रोजगार देगा भारत — डॉ. जितेंद्र सिंह

Click to start listening
ग्रीन जॉब्स क्रांति: रिन्यूएबल एनर्जी और ईवी से लाखों रोजगार देगा भारत — डॉ. जितेंद्र सिंह

सारांश

केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने पृथ्वी दिवस पर जामिया मिलिया इस्लामिया में कहा कि रिन्यूएबल एनर्जी, ईवी और ग्रीन फ्यूल सेक्टर भारत के युवाओं के लिए लाखों रोजगार के द्वार खोलेंगे। ₹19,000 करोड़ के हरित हाइड्रोजन मिशन और ₹1 लाख करोड़ के आरडीआई फंड से ग्रीन इकोनॉमी को रफ्तार मिलेगी।

Key Takeaways

  • डॉ. जितेंद्र सिंह ने 23 अप्रैल, पृथ्वी दिवस पर जामिया मिलिया इस्लामिया में कहा कि रिन्यूएबल एनर्जी और ईवी सेक्टर लाखों ग्रीन जॉब्स पैदा करेंगे।
  • राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन में ₹19,000 करोड़ से अधिक का निवेश किया जा रहा है, जो स्टील-सीमेंट उद्योगों को स्वच्छ ऊर्जा की ओर ले जाएगा।
  • सरकार ने स्टार्टअप्स और नवाचार के लिए ₹1 लाख करोड़ का आरडीआई (रिसर्च, डेवलपमेंट और इनोवेशन) फंड बनाया है।
  • सोलर मैन्युफैक्चरिंग, बैटरी उत्पादन, बायोफ्यूल और पावर ग्रिड मैनेजमेंट में रोजगार के नए अवसर उभर रहे हैं।
  • भारत 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा और 2070 तक नेट-ज़ीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य लेकर चल रहा है।
  • स्पेस और परमाणु ऊर्जा क्षेत्रों में निजी कंपनियों की भागीदारी से निवेश और इनोवेशन को नई गति मिलेगी।

नई दिल्ली, 23 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने पृथ्वी दिवस (23 अप्रैल) के अवसर पर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में घोषणा की कि रिन्यूएबल एनर्जी, इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी), ग्रीन फ्यूल और सर्कुलर इकोनॉमी जैसे उभरते क्षेत्र भारत के युवाओं के लिए आने वाले वर्षों में लाखों ग्रीन जॉब्स के द्वार खोलेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश तेज़ी से ग्रीन इकोनॉमी की दिशा में आगे बढ़ रहा है और यह बदलाव रोजगार के नए युग की शुरुआत करेगा।

ग्रीन सेक्टर में रोजगार का उभरता परिदृश्य

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, "ग्रीन जॉब्स और ग्रीन उद्यमिता भविष्य की ग्रीन इकोनॉमी की सबसे बड़ी ताकत बनेंगे, जो युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर नौकरी के मौके पैदा करेंगे।" उन्होंने बताया कि सोलर मैन्युफैक्चरिंग, बैटरी उत्पादन, पावर ग्रिड मैनेजमेंट और बायोफ्यूल जैसे क्षेत्रों में रोजगार की अपार संभावनाएं मौजूद हैं।

मंत्री ने यह भी बताया कि पारंपरिक वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहनों में रूपांतरित करने की तकनीक तेज़ी से सस्ती और सुलभ होती जा रही है, जिससे इस सेक्टर में नए उद्यमों और रोजगार के अवसर खुल रहे हैं। इस्तेमाल किए गए कुकिंग ऑयल को बायोफ्यूल में बदलने जैसे अभिनव कार्य भी नए व्यापारिक अवसर प्रदान कर रहे हैं।

राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन और सरकारी निवेश

डॉ. सिंह ने राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का विशेष उल्लेख किया, जिसमें सरकार ₹19,000 करोड़ से अधिक का निवेश कर रही है। यह मिशन स्टील, सीमेंट जैसे भारी उद्योगों को स्वच्छ ऊर्जा की ओर स्थानांतरित करने में अहम भूमिका निभाएगा।

उन्होंने ₹1 लाख करोड़ के रिसर्च, डेवलपमेंट और इनोवेशन (आरडीआई) फंड का भी जिक्र किया, जिसे स्टार्टअप्स और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए स्थापित किया गया है। कम कार्बन वाली अर्थव्यवस्था की ओर यह संक्रमण न केवल रोजगार बढ़ाएगा, बल्कि भारत की दीर्घकालिक सस्टेनेबल विकास दर को भी मजबूत करेगा।

परमाणु ऊर्जा और समुद्री ऊर्जा की भूमिका

ऊर्जा सुरक्षा के संदर्भ में मंत्री ने बताया कि भारत न्यूक्लियर पावर के विस्तार पर भी ध्यान दे रहा है और स्पेस तथा परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में निजी कंपनियों को भागीदारी का अवसर दिया जा रहा है। इससे निवेश और नवाचार दोनों में वृद्धि होगी।

उन्होंने यह भी कहा कि समुद्री ऊर्जा अभी काफी अनुपयोगित है, लेकिन भविष्य में यह सोलर और विंड एनर्जी के साथ मिलकर देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।

युवाओं से अपील और वैश्विक नेतृत्व का संकल्प

डॉ. जितेंद्र सिंह ने जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर कहा कि भारत 'लाइफस्टाइल फॉर इनवायरमेंट (LiFE)' के दृष्टिकोण के साथ वैश्विक स्तर पर ग्रीन परिवर्तन का नेतृत्व करने की स्थिति में है। उन्होंने छात्रों और युवाओं से आग्रह किया कि वे सस्टेनेबिलिटी से जुड़े अवसरों को पहचानें और उन्हें अपनाएं।

गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत 2070 तक नेट-ज़ीरो कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है और 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करने का संकल्प ले चुका है। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के अनुमान के अनुसार, वैश्विक स्तर पर ग्रीन ट्रांजिशन से 2030 तक 2.4 करोड़ नए रोजगार सृजित हो सकते हैं, जिसमें भारत की हिस्सेदारी उल्लेखनीय रह सकती है।

आने वाले महीनों में सरकार की पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना और फेम-III जैसी नीतियों के क्रियान्वयन से ग्रीन सेक्टर में रोजगार की गति और तेज़ होने की उम्मीद है।

Point of View

बल्कि भारत की रोजगार नीति में एक रणनीतिक बदलाव का संकेत है। विडंबना यह है कि जहां एक ओर सरकार ग्रीन जॉब्स का सपना दिखा रही है, वहीं कौशल विकास के बुनियादी ढांचे और तकनीकी प्रशिक्षण की कमी अभी भी एक बड़ी चुनौती है। असली सवाल यह है कि ₹19,000 करोड़ के हरित हाइड्रोजन मिशन का फायदा क्या वाकई छोटे शहरों और ग्रामीण युवाओं तक पहुंचेगा, या यह महज बड़े कॉरपोरेट घरानों की झोली भरेगा? भारत को ग्रीन ट्रांजिशन में वैश्विक नेता बनना है तो नीति और ज़मीनी क्रियान्वयन के बीच की खाई को पाटना अनिवार्य होगा।
NationPress
23/04/2026

Frequently Asked Questions

ग्रीन जॉब्स क्या होती हैं और भारत में इनकी संभावना कितनी है?
ग्रीन जॉब्स वे रोजगार हैं जो पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ विकास से जुड़े होते हैं, जैसे सोलर पैनल निर्माण, ईवी तकनीक और बायोफ्यूल उत्पादन। भारत में 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य के साथ इस क्षेत्र में लाखों रोजगार सृजित होने की संभावना है।
राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन क्या है और इसमें कितना निवेश है?
राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन भारत सरकार की एक प्रमुख योजना है जिसमें ₹19,000 करोड़ से अधिक का निवेश किया जा रहा है। यह मिशन स्टील और सीमेंट जैसे भारी उद्योगों को स्वच्छ हाइड्रोजन ऊर्जा की ओर ले जाने के लिए बनाया गया है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने पृथ्वी दिवस पर क्या कहा?
डॉ. जितेंद्र सिंह ने 23 अप्रैल को जामिया मिलिया इस्लामिया में कहा कि रिन्यूएबल एनर्जी, ईवी, ग्रीन फ्यूल और सर्कुलर इकोनॉमी युवाओं के लिए रोजगार के बड़े स्रोत बनेंगे। उन्होंने ₹1 लाख करोड़ के आरडीआई फंड और हरित हाइड्रोजन मिशन का भी उल्लेख किया।
ईवी सेक्टर में कौन-कौन से रोजगार के अवसर हैं?
ईवी सेक्टर में बैटरी उत्पादन, वाहन रूपांतरण तकनीक, चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रबंधन और इलेक्ट्रिक वाहन डिजाइन जैसे क्षेत्रों में रोजगार के व्यापक अवसर हैं। पारंपरिक वाहनों को ईवी में बदलने की तकनीक सस्ती होने से इस क्षेत्र में नए उद्यम और नौकरियां तेज़ी से बढ़ रही हैं।
भारत 2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा में क्या लक्ष्य हासिल करना चाहता है?
भारत ने 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। इसके साथ ही देश 2070 तक नेट-ज़ीरो कार्बन उत्सर्जन का संकल्प भी ले चुका है, जो ग्रीन सेक्टर में रोजगार की मांग को और बढ़ाएगा।
Nation Press