राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस 2025: बघेल करेंगे शुभारंभ, 33 साल की ऐतिहासिक यात्रा का जश्न
सारांश
Key Takeaways
- 24 अप्रैल 2025 को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस पर विज्ञान भवन, नई दिल्ली में मुख्य समारोह होगा।
- केंद्रीय राज्य मंत्री एसपी सिंह बघेल कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे और PM मोदी का संदेश प्रसारित होगा।
- 73वें संवैधानिक संशोधन के 33 वर्ष पूरे होने पर यह दिवस विशेष महत्व रखता है।
- पंचायत उन्नति सूचकांक (पीएआई)-2.0 रिपोर्ट और 'मेरी पंचायत मेरी धरोहर' की तीन पुस्तकें जारी होंगी।
- स्वामित्व योजना के तहत अब तक 2.25 करोड़ संपत्ति कार्ड वितरित हो चुके हैं।
- देशभर की ग्राम पंचायतें इस दिन ग्राम सभाओं का आयोजन कर सहभागी लोकतंत्र को मजबूत करेंगी।
नई दिल्ली, 24 अप्रैल 2025: राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस (एनपीआरडी) के अवसर पर केंद्रीय पंचायती राज राज्य मंत्री एसपी सिंह बघेल शुक्रवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में मुख्य समारोह का शुभारंभ करेंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विशेष संदेश देशभर की पंचायतों और स्थानीय निकायों के पदाधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा। यह दिन भारत के जमीनी लोकतंत्र की नींव रखने वाले 73वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम के लागू होने की स्मृति में प्रतिवर्ष मनाया जाता है।
33 वर्षों की लोकतांत्रिक विरासत
इस वर्ष राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस विशेष महत्व रखता है क्योंकि 73वें संवैधानिक संशोधन को लागू हुए पूरे 33 वर्ष हो रहे हैं। इस संशोधन ने देशभर की पंचायती राज संस्थाओं (पीआरआई) को संवैधानिक दर्जा और कानूनी मान्यता प्रदान की थी, जिसने ग्रामीण भारत में सत्ता के विकेंद्रीकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक मोड़ लाया।
गौरतलब है कि इस संशोधन से पहले पंचायतें केवल राज्य सरकारों की मर्जी पर निर्भर थीं और उनके अस्तित्व की कोई संवैधानिक गारंटी नहीं थी। 1992 में यह कानून लागू होने के बाद त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था — ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद — को संवैधानिक ढांचे में स्थान मिला।
विज्ञान भवन में प्रमुख प्रकाशनों का लोकार्पण
समारोह के दौरान पंचायत उन्नति सूचकांक (पीएआई)-2.0 पर एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट जारी की जाएगी, जो देशभर की पंचायतों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करती है। साथ ही 'मेरी पंचायत मेरी धरोहर' शीर्षक से तीन सचित्र पुस्तकें भी लोकार्पित होंगी।
मंत्रालय की 'पंचायत धरोहर पहल' के अंतर्गत जारी होने वाली ये तीन पुस्तकें हैं:
— त्रिपुरा की ग्रामीण विरासत पर एक मोनोग्राफ
— तिरुपति की ग्रामीण विरासत पर एक मोनोग्राफ
— 'उत्तरकाशी: सौम्या काशी: हिमालयी विरासत की आत्मा'
ये प्रकाशन ग्रामीण भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित करने की दिशा में एक सार्थक पहल हैं, जो पंचायती राज को केवल प्रशासनिक इकाई नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान का केंद्र भी मानती है।
देशव्यापी ग्राम सभाओं का आयोजन
पंचायती राज मंत्रालय ने इस दिवस को राज्य, जिला, ब्लॉक और ग्राम पंचायत — सभी स्तरों पर उत्साहपूर्वक मनाने की व्यापक योजना तैयार की है। देशभर की ग्राम पंचायतें इस अवसर पर ग्राम सभाओं का आयोजन करेंगी, जो जमीनी स्तर पर सहभागी लोकतंत्र की भावना को पुनः जीवंत करेंगी।
यह आयोजन केवल उत्सव नहीं, बल्कि विकसित भारत के लक्ष्य की ओर त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था की भूमिका को रेखांकित करने का अवसर भी है।
स्वामित्व योजना: जमीनी अधिकारों की क्रांति
इस संदर्भ में उल्लेखनीय है कि जनवरी 2025 में प्रधानमंत्री मोदी ने स्वामित्व योजना (ग्रामीण क्षेत्रों में उन्नत प्रौद्योगिकी के साथ गांवों का सर्वेक्षण और मानचित्रण) के तहत संपत्ति कार्डों के वितरण की अध्यक्षता की थी। एक ही दिन में 65 लाख ग्रामीण नागरिकों को कानूनी स्वामित्व दस्तावेज सौंपे गए।
इस वितरण में 10 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों के 50,000 से अधिक गांवों को शामिल किया गया। इससे स्वामित्व योजना के तहत अब तक वितरित संपत्ति कार्डों की कुल संख्या 2.25 करोड़ हो गई है। उस समारोह में केंद्रीय मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों, राज्यपालों, उपराज्यपालों और 237 जिलों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया था।
विश्लेषण: पंचायती राज — दिखावे से परे जमीनी हकीकत
33 वर्षों के बाद भी विशेषज्ञ यह प्रश्न उठाते हैं कि क्या पंचायतों को वास्तविक वित्तीय और प्रशासनिक स्वायत्तता मिल पाई है। 15वें वित्त आयोग की सिफारिशों के बावजूद कई राज्यों में पंचायतों को समय पर धनराशि नहीं मिलती। आंकड़ों के अनुसार, देश की अधिकांश ग्राम पंचायतें अपने बजट के लिए राज्य और केंद्र सरकार पर निर्भर हैं।
स्वामित्व योजना और पीएआई जैसे उपकरण पंचायतों को डेटा-संचालित शासन की ओर ले जाने की कोशिश हैं — यह सकारात्मक बदलाव है। लेकिन असली परीक्षा इस बात में है कि क्या ग्राम सभाएं केवल औपचारिकता रहती हैं या वास्तव में नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित होती है।
आने वाले दिनों में पंचायती राज मंत्रालय द्वारा पीएआई-2.0 रिपोर्ट के आधार पर राज्यों की रैंकिंग जारी होने की उम्मीद है, जो यह स्पष्ट करेगी कि कौन से राज्य पंचायती सशक्तिकरण में आगे हैं और कौन पिछड़ रहे हैं।