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ऐतिहासिक मतदान: बंगाल में 91.78% और तमिलनाडु में 84.69% वोटिंग, महिलाएं सबसे आगे

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ऐतिहासिक मतदान: बंगाल में 91.78% और तमिलनाडु में 84.69% वोटिंग, महिलाएं सबसे आगे

सारांश

तमिलनाडु में 84.69% और पश्चिम बंगाल में 91.78% ऐतिहासिक मतदान दर्ज हुआ। दोनों राज्यों में महिला मतदाताओं ने पुरुषों को पीछे छोड़ा। 9.33 करोड़ से अधिक मतदाताओं ने वोट डाला। भारत निर्वाचन आयोग ने 100% लाइव वेबकास्टिंग से पारदर्शिता सुनिश्चित की।

मुख्य बातें

तमिलनाडु में 84.69% मतदान — 2011 के 78.29% के रिकॉर्ड को तोड़ा, राज्य का अब तक का सर्वाधिक मतदान।
पश्चिम बंगाल के पहले चरण में 91.78% मतदान — 2011 का 84.72% का पुराना रिकॉर्ड ध्वस्त।
दोनों राज्यों में महिला मतदाताओं ने पुरुषों को पीछे छोड़ा — तमिलनाडु में 85.76% और बंगाल में 92.69% महिला मतदान।
कुल 9.33 करोड़ से अधिक मतदाताओं के लिए 1.19 लाख से ज्यादा केंद्र और 6 लाख कर्मचारी तैनात।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की निगरानी में 100% पोलिंग स्टेशनों की लाइव वेबकास्टिंग हुई।
गुजरात और महाराष्ट्र के उपचुनावों में मतदान 55-59% के बीच रहा — बड़े राज्यों से काफी कम।

नई दिल्ली, 23 अप्रैल 2026भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने गुरुवार को घोषणा की कि तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 और पश्चिम बंगाल के पहले चरण में मतदान ने ऐतिहासिक रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। दोनों राज्यों में महिला मतदाताओं की भागीदारी पुरुषों से अधिक रही, जो भारतीय लोकतंत्र की परिपक्वता का प्रमाण है। यह मतदान न केवल संख्या में, बल्कि लोकतांत्रिक चेतना के स्तर पर भी एक नई ऊंचाई को दर्शाता है।

तमिलनाडु में रिकॉर्ड मतदान — 84.69% तक पहुंचा आंकड़ा

तमिलनाडु में शाम 5 बजे तक कुल 84.69 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। यह राज्य के इतिहास में अब तक का सर्वाधिक मतदान प्रतिशत है। इससे पहले 2011 के विधानसभा चुनावों में 78.29 प्रतिशत मतदान हुआ था, जो अब तक का सर्वोच्च रिकॉर्ड था।

इस बार महिला मतदाताओं ने 85.76 प्रतिशत मतदान कर पुरुष मतदाताओं (83.57 प्रतिशत) को पीछे छोड़ दिया। तुलनात्मक दृष्टि से देखें तो 2021 के विधानसभा चुनावों में यह आंकड़ा 73.63 प्रतिशत और 2024 के लोकसभा चुनावों में 70.14 प्रतिशत था। यानी महज पांच वर्षों में लगभग 14 प्रतिशत अंकों की छलांग लगाई गई है।

तमिलनाडु में 234 विधानसभा सीटों पर 5.7 करोड़ से अधिक मतदाताओं ने वोट डाला। राज्य में मतदान का यह उछाल उस दौर में आया है जब राष्ट्रीय स्तर पर कई राज्यों में मतदाता उदासीनता की चिंता जताई जा रही थी।

पश्चिम बंगाल में 91.78% — देश में सबसे ऊंचा मतदान

पश्चिम बंगाल के पहले चरण में 152 विधानसभा सीटों पर शाम 5 बजे तक 91.78 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया — जो राज्य के इतिहास में सर्वोच्च है। 2011 में बना पिछला रिकॉर्ड 84.72 प्रतिशत था, जिसे इस बार सात से अधिक अंकों से पीछे छोड़ा गया।

यहां भी महिला मतदाताओं ने बाजी मारी — उनकी भागीदारी 92.69 प्रतिशत रही, जबकि पुरुष मतदाताओं की भागीदारी 90.92 प्रतिशत थी। पश्चिम बंगाल पहले से ही देश में सर्वाधिक मतदान वाले राज्यों में शुमार रहा है। 1980 और 1990 के दशकों में यहां 80 प्रतिशत से अधिक मतदान का सिलसिला शुरू हुआ था, जो अब एक नई ऊंचाई पर पहुंच गया है।

पहले चरण में लगभग 3.6 करोड़ मतदाताओं ने हिस्सा लिया। यह आंकड़ा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पश्चिम बंगाल में चुनावी हिंसा और बूथ कैप्चरिंग की ऐतिहासिक शिकायतें रही हैं — ऐसे में इतने उच्च मतदान को सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराना प्रशासनिक उपलब्धि भी है।

चुनाव आयोग की तकनीकी निगरानी और पारदर्शिता

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त एस.एस. संधू और विवेक जोशी ने 100 प्रतिशत पोलिंग स्टेशनों की लाइव वेबकास्टिंग के जरिए रियल-टाइम निगरानी की। ईसीआईएनईटी प्लेटफॉर्म के माध्यम से पीठासीन अधिकारियों ने मतदान समाप्त होते ही डेटा तुरंत अपलोड किया।

दोनों राज्यों में कुल 9.33 करोड़ से अधिक मतदाताओं के लिए 1.19 लाख से अधिक मतदान केंद्र स्थापित किए गए थे। इन केंद्रों पर लगभग 6 लाख मतदान कर्मचारी तैनात रहे। यह लॉजिस्टिक्स किसी बड़े देश के आम चुनाव के बराबर था।

गुजरात और महाराष्ट्र के उपचुनावों में कम मतदान

इसी दिन गुजरात और महाराष्ट्र के कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में उपचुनाव भी संपन्न हुए। गुजरात के उमरेठ में 59.03 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। महाराष्ट्र के बारामती में 57.48 प्रतिशत और राहुरी में 55.31 प्रतिशत मतदान हुआ।

उपचुनावों में मतदान का यह अपेक्षाकृत कम स्तर एक राष्ट्रव्यापी प्रवृत्ति को दर्शाता है — उपचुनावों में सामान्यतः मतदाता उत्साह कम होता है, क्योंकि सत्ता का समीकरण तत्काल नहीं बदलता।

महिला मतदाताओं की बढ़ती भूमिका — राष्ट्रीय रुझान

दोनों बड़े राज्यों में महिलाओं की मतदान भागीदारी पुरुषों से अधिक रहना एक महत्वपूर्ण संकेत है। 2019 के लोकसभा चुनावों से ही राष्ट्रीय स्तर पर यह रुझान उभरने लगा था, जब पहली बार महिला मतदान प्रतिशत पुरुषों के बराबर पहुंचा था। 2026 के इन राज्य चुनावों में यह अंतर और स्पष्ट हो गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी योजनाओं — जैसे मुफ्त राशन, महिला स्वयं सहायता समूह, और आर्थिक सशक्तिकरण कार्यक्रम — ने महिलाओं को राजनीतिक प्रक्रिया से अधिक जोड़ा है। यह सिर्फ मतदान नहीं, बल्कि नीतिगत बदलाव का प्रतिबिंब भी है।

अब सभी की नजरें मतगणना और चुनाव परिणामों पर टिकी हैं। पश्चिम बंगाल के शेष चरणों में भी इसी उत्साह के बने रहने की उम्मीद जताई जा रही है। भारत निर्वाचन आयोग ने संकेत दिया है कि अंतिम मतदान आंकड़े — जिनमें डाक मतपत्र और सर्विस वोटर शामिल होंगे — जल्द जारी किए जाएंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

वहीं लोकतांत्रिक भागीदारी भी सबसे ऊंची है — यह दर्शाता है कि जनता चुनावी प्रक्रिया में विश्वास रखती है। महिलाओं का पुरुषों से अधिक मतदान करना उस बदलाव का संकेत है जहां सरकारी कल्याण योजनाएं मतदाता व्यवहार को सीधे प्रभावित कर रही हैं। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूक जाती है वह यह है कि यह 'महिला वोट बैंक' अब किसी एक दल का बंधक नहीं — यह स्वतंत्र, सचेत और निर्णायक शक्ति बन चुका है।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिलनाडु में 2026 विधानसभा चुनाव में कितने प्रतिशत मतदान हुआ?
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 में शाम 5 बजे तक 84.69 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। यह 2011 के 78.29 प्रतिशत के पिछले रिकॉर्ड को तोड़ते हुए राज्य का अब तक का सर्वाधिक मतदान है।
पश्चिम बंगाल के पहले चरण में महिलाओं का मतदान प्रतिशत कितना रहा?
पश्चिम बंगाल के पहले चरण में महिला मतदाताओं की भागीदारी 92.69 प्रतिशत रही, जबकि पुरुष मतदाताओं की भागीदारी 90.92 प्रतिशत थी। कुल मतदान 91.78 प्रतिशत दर्ज किया गया।
2026 चुनाव में भारत निर्वाचन आयोग ने पारदर्शिता के लिए क्या किया?
भारत निर्वाचन आयोग ने सभी पोलिंग स्टेशनों की 100 प्रतिशत लाइव वेबकास्टिंग सुनिश्चित की। ईसीआईएनईटी प्लेटफॉर्म के जरिए पीठासीन अधिकारियों ने मतदान डेटा तुरंत अपलोड किया, जिससे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार सहित अन्य आयुक्त रियल-टाइम निगरानी कर सके।
गुजरात और महाराष्ट्र के उपचुनावों में कितना मतदान हुआ?
गुजरात के उमरेठ में 59.03 प्रतिशत, महाराष्ट्र के बारामती में 57.48 प्रतिशत और राहुरी में 55.31 प्रतिशत मतदान हुआ। उपचुनावों में मतदान प्रतिशत बड़े राज्य चुनावों की तुलना में अपेक्षाकृत कम रहा।
दोनों राज्यों में कितने मतदाताओं और मतदान केंद्रों की व्यवस्था थी?
तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में कुल मिलाकर 9.33 करोड़ से अधिक मतदाताओं के लिए 1.19 लाख से अधिक मतदान केंद्र बनाए गए। इन केंद्रों पर लगभग 6 लाख मतदान कर्मचारी तैनात किए गए थे।
राष्ट्र प्रेस
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