डिजिटल वॉरफेयर में सैनिक परिवारों को खतरा: कर्नल अजय रैना की सोशल मीडिया चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
सेवानिवृत्त कर्नल अजय रैना ने 19 अक्टूबर 2026 को जम्मू में डिजिटल वॉरफेयर के बढ़ते खतरे पर कड़ी चेतावनी जारी की — विशेषकर उन सैनिक परिवारों के लिए जो सोशल मीडिया पर लापरवाही से सैन्य जीवन की जानकारी साझा करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक भी पोस्ट दुश्मन को उस परिवार को 'टारगेट' के रूप में पहचानने का मौका दे सकती है।
सोशल मीडिया की एक पोस्ट बन सकती है जानलेवा
कर्नल रैना ने कहा, 'चाहे सेना हो, वायु सेना हो या नौसेना, बड़े स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल हैं कि क्या करना है, क्या नहीं करना है।' उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि जब कोई महिला अपने पति के साथ यूनिफॉर्म में फोटो पोस्ट करके यह लिख देती है कि वे फौजी आवास में रहते हैं, तो दुश्मन उस पोस्ट से उन्हें पहचान लेता है और फिर ट्रैप करने की कोशिश करता है।
उन्होंने हनी ट्रैपिंग के खतरे का भी उल्लेख किया — जहाँ महिलाओं के माध्यम से सैनिकों या उनके परिवारों को फँसाया जाता है। रैना ने कहा कि डिजिटल वॉरफेयर के इस युग में यह भय बना रहेगा और इसलिए अपनी पूरी बिरादरी को जागरूक करना अनिवार्य है।
जवान सतर्क, परिवारों की निगरानी में कमी
कर्नल रैना ने स्वीकार किया कि सैनिक स्वयं काफी जागरूक होते हैं — यूनिट स्तर पर हर सप्ताह कम से कम एक बार इस विषय पर व्याख्यान दिया जाता है, जो एक प्रकार की एसओपी (SOP) बन चुकी है। लेकिन समस्या तब उत्पन्न होती है जब परिवार के सदस्य जवान से दूर रहते हैं। उन्होंने कहा, 'जब परिवार साथ नहीं रहता, तो उनकी सतर्कता थोड़ी कम हो जाती है।'
उन्होंने यह भी जोड़ा कि जब वे स्वयं कमांडिंग ऑफिसर थे, तब भी देश में ऐसी किसी घटना के बाद वे अपने जवानों को दोबारा जागरूक करते थे। यह ऐसे समय में आया है जब सोशल मीडिया पर सैन्य परिवारों से जुड़े सुरक्षा उल्लंघनों की घटनाएँ बढ़ रही हैं।
देशद्रोह के मामलों पर कानून है, अमल नहीं
कर्नल रैना ने देश के विभिन्न हिस्सों में दर्ज हो रही एफआईआर का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय कानून में सब कुछ है, लेकिन उसे लागू नहीं किया जाता। उन्होंने कहा, 'हमारी समस्या यह है कि हमारे कानून में सब कुछ है, लेकिन हम उसे लागू नहीं करते।' उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि यदि उन्हें लगता है कि कोई बयान या कार्रवाई गलत है, तो वे अपने नज़दीकी थाने में जाकर जीरो एफआईआर दर्ज कराएँ।
गौरतलब है कि उन्होंने पूर्व में हुए एक आंदोलन का संदर्भ देते हुए कहा कि जब शेहला राशिद ने सार्वजनिक रूप से विवादित बयान दिया था, तो वह आंदोलन ही समाप्त हो गया। उन्होंने कहा कि अब भी जो लोग मंच पर थे, वे सफाई देने में लगे हैं।
फिल्म इंडस्ट्री की 'अज्ञात फंडिंग' पर तीखी टिप्पणी
टाइगर श्रॉफ पर कथित फायरिंग की घटना के संदर्भ में रैना ने फिल्म इंडस्ट्री में संदिग्ध फंडिंग का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि ₹100 करोड़ से ₹200 करोड़ तक की फिल्मों में धन कहाँ से आता है, यह किसी से छिपा नहीं है। उनके अनुसार जब कोई बाहर से फंडिंग लेता है तो उससे जुड़ी माँगें भी आती हैं और जब टकराव होता है तो ऐसी घटनाएँ घटित होती हैं।
उन्होंने गुलशन कुमार की हत्या का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय भी सभी को पता था कि यह क्यों हुई थी — यह इंडस्ट्री में उसी 'खेल का हिस्सा' था जो आज भी जारी है।
आगे क्या होगा
कर्नल रैना की सलाह है कि सैनिकों के परिवारों को अपनी सोशल मीडिया उपस्थिति पर गंभीरता से पुनर्विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा, 'दिखावा न करें और खुद को निशाना न बनने दें।' इस बयान को सुरक्षा विश्लेषकों ने ऐसे समय में अत्यंत प्रासंगिक बताया है जब सीमापार डिजिटल खुफिया अभियान तेज़ी से बढ़ रहे हैं।