भारतीय सेना ने ड्रोन प्रशिक्षण में सफलतापूर्वक प्रगति की, 2027 तक बनेंगे ड्रोन वॉरियर

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भारतीय सेना ने ड्रोन प्रशिक्षण में सफलतापूर्वक प्रगति की, 2027 तक बनेंगे ड्रोन वॉरियर

सारांश

भारतीय सेना ने ड्रोन वॉरफेयर में अपनी क्षमताओं को बढ़ाने के लिए बेसिक ड्रोन ट्रेनिंग पूरी कर ली है। अब हर इंफेंट्री जवान को ड्रोन संचालन की जानकारी मिल चुकी है। जानें, कैसे भारतीय सेना ड्रोन तकनीक का उपयोग कर रही है और 2027 तक सभी जवानों को दक्ष बनाने का लक्ष्य।

Key Takeaways

  • ड्रोन प्रशिक्षण में भारतीय सेना ने महत्वपूर्ण प्रगति की है।
  • हर इंफेंट्री जवान को ड्रोन संचालन की ट्रेनिंग दी जा रही है।
  • 2027 तक 100%25 जवानों को ड्रोन ऑपरेशन में दक्ष बनाने का लक्ष्य है।
  • ड्रोन और काउंटर-ड्रोन सिस्टम की खरीद तेजी से हो रही है।
  • ड्रोन सेंटर ट्रेनिंग अकादमी स्थापित की जा रही है।

नई दिल्ली, 21 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। ड्रोन अब आधुनिक युद्ध (मॉडर्न वॉरफेयर) में एक अत्यंत प्रभावशाली हथियार के रूप में उभरा है। चाहे रूस-यूक्रेन युद्ध हो या ईरान के साथ इजरायल और अमेरिका का संघर्ष-हर स्थान पर ड्रोन की महत्वपूर्ण भूमिका देखी गई है। भारत का ऑपरेशन सिंदूर पाकिस्तान के खिलाफ ड्रोन वॉरफेयर का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इस ऑपरेशन में भारतीय सेना ने न केवल ड्रोन का कुशलता से उपयोग किया, बल्कि पाकिस्तान के ड्रोन को भी नष्ट किया।

भारतीय सेना पहले से ही इस नवीनतम युद्धक उपकरण के लिए खुद को तैयार कर रही थी। सेना ने तेजी से अपने ‘ड्रोन वॉरियर’ बनाने की प्रक्रिया शुरू की थी, जिसका पहला चरण अब सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। रक्षा अधिकारियों के अनुसार, सेना ने बेसिक ड्रोन ट्रेनिंग पूरी कर ली है। इसका अर्थ है कि अब इंफेंट्री बटालियन के प्रत्येक सैनिक को ड्रोन की बुनियादी जानकारी और संचालन की ट्रेनिंग दी जा चुकी है।

ड्रोन की बेसिक ट्रेनिंग यूनिट स्तर पर शुरू की गई थी। दूसरे चरण में स्पेशलाइज्ड एडवांस ट्रेनिंग भी चल रही है, जिसके लिए विशेष ड्रोन ट्रेनिंग नोड बनाए गए हैं और उनकी संख्या लगातार बढ़ाई जा रही है। इसके साथ ही ड्रोन और काउंटर-ड्रोन सिस्टम की खरीद और तैनाती भी तेजी से की जा रही है।

सेना ने इंफेंट्री की प्रत्येक बटालियन में एक ड्रोन प्लाटून स्थापित किया है, जिसे ‘अश्नी प्लाटून’ कहा गया है। अब तक 380 इंफेंट्री बटालियनों में ये प्लाटून स्थापित होकर ऑपरेशनल हो चुके हैं। इन प्लाटून के पास विभिन्न प्रकार के ड्रोन उपलब्ध हैं।

इसके अलावा, ड्रोन सेंटर ट्रेनिंग अकादमी भी स्थापित की जा रही है। देहरादून स्थित आईएमए, महूचेन्नई की ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (ओटीए) में पहले ही ऐसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। सेना के जवानों के साथ-साथ यूनिट के अधिकारियों को भी ड्रोन ऑपरेट करने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है।

भारतीय सेना के इस ड्रोन कॉन्सेप्ट को ‘ईगल इन द आर्म’ नाम दिया गया है। इसका प्रमुख उद्देश्य यह है कि हर सैनिक ड्रोन ऑपरेट करना सीख सके। जिस प्रकार सैनिक अपने हथियारों का संचालन करते हैं, उसी प्रकार वे ड्रोन का भी कुशलता से उपयोग कर सकें।

रक्षा अधिकारियों के अनुसार, यूनिट या सैनिक की भूमिका के अनुसार ड्रोन के इस्तेमाल की ट्रेनिंग दी जा रही है। जै-कोम्बैट, सर्विलांस, लॉजिस्टिक्स और यहां तक कि मेडिकल एवाक्यूएशन के लिए भी सैनिकों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। ड्रोन ऑपरेशन के साथ-साथ दुश्मन के ड्रोन को निष्क्रिय करने की क्षमता भी विकसित की जा रही है।

इससे एक बहु-स्तरीय (लेयर्ड) सिस्टम तैयार किया जा रहा है, जो मानव रहित प्लेटफॉर्म्स के उपयोग और उन्हें निष्क्रिय करने दोनों में सक्षम होगा। सेना का लक्ष्य है कि वर्ष 2027 तक इंफेंट्री यूनिट के 100 प्रतिशत जवान ड्रोन ऑपरेशन में कुशल हो जाएं।

Point of View

बल्कि आधुनिक युद्ध की चुनौतियों का सामना करने में भी मदद करता है। एक राष्ट्र के रूप में, हमें अपनी सुरक्षा को मजबूत करने के लिए इन प्रयासों का समर्थन करना चाहिए।
NationPress
22/03/2026

Frequently Asked Questions

भारतीय सेना में ड्रोन प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य क्या है?
भारतीय सेना का मुख्य उद्देश्य यह है कि हर सैनिक ड्रोन ऑपरेट करना सीख सके, जिससे वे आधुनिक युद्ध में अधिक प्रभावशाली बन सकें।
ड्रोन प्रशिक्षण के कितने चरण हैं?
ड्रोन प्रशिक्षण में बेसिक और स्पेशलाइज्ड एडवांस ट्रेनिंग के दो चरण होते हैं।
2027 तक सेना का लक्ष्य क्या है?
सेना का लक्ष्य है कि वर्ष 2027 तक इंफेंट्री यूनिट के 100 प्रतिशत जवान ड्रोन ऑपरेशन में दक्ष हो जाएं।
ड्रोन सेंटर ट्रेनिंग अकादमी कहाँ स्थापित की जा रही है?
ड्रोन सेंटर ट्रेनिंग अकादमी देहरादून, महू और चेन्नई में स्थापित की जा रही है।
भारतीय सेना के ड्रोन प्लाटून का नाम क्या है?
भारतीय सेना के ड्रोन प्लाटून का नाम 'अश्नी प्लाटून' रखा गया है।
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