आर्मी कमांडर्स कांफ्रेंस: राजनाथ सिंह ने जारी किया 'लैंड वॉरफेयर डॉक्ट्रिन', ऑपरेशन सिंदूर की सफलता का उल्लेख
सारांश
मुख्य बातें
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 23 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित आर्मी कमांडर्स कांफ्रेंस में भारतीय सेना का नया 'लैंड वॉरफेयर डॉक्ट्रिन' जारी किया, जो भविष्य के युद्धों की चुनौतियों से निपटने के लिए एक व्यापक रणनीतिक ढाँचा प्रदान करता है। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि 'ऑपरेशन सिंदूर' की सफलता में नई सोच, बेहतर तालमेल और आधुनिक हथियारों की अहम भूमिका रही।
लैंड वॉरफेयर डॉक्ट्रिन: मुख्य उद्देश्य
नव-जारी 'लैंड वॉरफेयर डॉक्ट्रिन' का उद्देश्य बदलते युद्ध स्वरूप और उभरती सुरक्षा चुनौतियों के अनुरूप भारतीय सेना की तैयारी को दिशा देना है। यह सिद्धांत बदलती तकनीक और परिचालन परिस्थितियों के बीच सेना की भावी क्षमताओं को विकसित करने के लिए मार्गदर्शक ढाँचे के रूप में कार्य करेगा। गौरतलब है कि यह दस्तावेज़ ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर युद्ध की प्रकृति तेज़ी से बदल रही है और ड्रोन तथा साइबर हमले नई सामरिक वास्तविकता बन चुके हैं।
ऑपरेशन सिंदूर से सीख
राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि 'ऑपरेशन सिंदूर' ने यह संदेश दिया कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने कहा कि इस अभियान में आधुनिक हथियारों के साथ-साथ सशस्त्र बलों के भीतर बेहतर समन्वय ने प्रभावशीलता को कई गुना बढ़ाया। रक्षा मंत्री ने सशस्त्र बलों के साहस, अनुशासन और संयम की विशेष सराहना की।
तकनीकी आधुनिकीकरण पर जोर
रक्षा मंत्री ने कांफ्रेंस में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), स्वचालित प्रणालियों, आँकड़ों के विश्लेषण, साइबर सुरक्षा और सुरक्षित संचार नेटवर्क जैसे क्षेत्रों में काम तेज़ करने की ज़रूरत बताई। उन्होंने विशेष रूप से ड्रोन तकनीक के उपयोग पर बल देते हुए कहा कि सेना को अपनी क्षमताओं का लगातार आकलन और सुधार करना चाहिए। हवाई, समुद्री, अंतरिक्ष और साइबर क्षेत्रों में बढ़ती चुनौतियों के बावजूद लैंड वॉर में ज़मीनी सेना की भूमिका अपरिहार्य बनी रहेगी।
रक्षा उत्पादन और निर्यात में रिकॉर्ड
राजनाथ सिंह ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा उत्पादन रिकॉर्ड ₹1.78 लाख करोड़ तक पहुँच गया। साथ ही रक्षा निर्यात भी अब तक के सर्वोच्च स्तर पर पहुँचकर लगभग ₹38,000 करोड़ हो गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुधार केवल नीतियों तक सीमित न रहकर सेना की वास्तविक परिचालन क्षमता में दिखाई देने चाहिए।
सम्मान और उपस्थित अधिकारी
कार्यक्रम में रक्षा मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले भारतीय सेना के जवानों को सम्मानित किया और संयुक्त राष्ट्र से संबंधित वार्षिक पत्रिका का अनावरण किया। कांफ्रेंस में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि, थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ सहित वरिष्ठ सैन्य अधिकारी उपस्थित रहे। रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और कूटनीतिक प्रयासों ने वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति को और मज़बूत किया है।
आगे देखें तो यह डॉक्ट्रिन भारतीय सेना के लिए अगले 20 से 30 वर्षों की रणनीतिक दिशा तय करने की नींव बनेगा, जिसमें संयुक्त अभियानों में निर्बाध समन्वय को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।