23 अक्टूबर 2026
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राजनाथ सिंह ने जारी किया भूमि युद्ध सिद्धांत, सेना कमांडरों को दिया 20-30 साल के रणनीतिक विजन का मंत्र

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राजनाथ सिंह ने जारी किया भूमि युद्ध सिद्धांत, सेना कमांडरों को दिया 20-30 साल के रणनीतिक विजन का मंत्र

सारांश

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 23 अक्टूबर को ऐतिहासिक भूमि युद्ध सिद्धांत जारी किया — जो भारतीय सेना को आने वाले 20-30 वर्षों के बहु-आयामी युद्धक्षेत्र के लिए तैयार करने का रणनीतिक खाका है। ₹1.78 लाख करोड़ के रिकॉर्ड रक्षा उत्पादन और ₹38,000 करोड़ के निर्यात के बीच यह घोषणा आत्मनिर्भर और तकनीक-सक्षम सेना की दिशा में बड़ा कदम है।

मुख्य बातें

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 23 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में सेना कमांडरों के सम्मेलन में भूमि युद्ध सिद्धांत जारी किया।
सिद्धांत का उद्देश्य भारतीय सेना को 20-30 वर्षों के दीर्घकालिक रणनीतिक विजन के साथ मल्टी-डोमेन युद्ध के लिए तैयार करना है।
वित्त वर्ष 2025-26 में रक्षा उत्पादन रिकॉर्ड ₹1.78 लाख करोड़ और रक्षा निर्यात सर्वकालिक उच्च ₹38,000 करोड़ पर पहुँचा।
ऑपरेशन सिंदूर को नई सोच, उन्नत हथियारों और बेहतर तालमेल का परिणाम बताया गया।
AI, स्वायत्त प्रणाली, साइबर सुरक्षा और ड्रोन तकनीक में प्रयास तेज़ करने का निर्देश दिया गया।
संयुक्त राष्ट्र शांति रक्षा में उत्कृष्ट योगदान देने वाले भारतीय सैनिकों को सम्मानित किया गया।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 23 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित सेना कमांडरों के सम्मेलन में ऐतिहासिक भूमि युद्ध सिद्धांत (Land Warfare Doctrine) जारी किया, जो युद्ध के बदलते स्वरूप और भविष्य के संघर्षों से निपटने के लिए भारतीय सेना को एक व्यापक रणनीतिक ढाँचा प्रदान करता है। इस अवसर पर राजनाथ सिंह ने सेना के वरिष्ठ नेतृत्व से अगले 20 से 30 वर्षों के दीर्घकालिक रणनीतिक विजन के साथ-साथ तत्काल उभरती चुनौतियों का समान रूप से सामना करने की तैयारी रखने का आह्वान किया।

भूमि युद्ध सिद्धांत: क्या है नया ढाँचा

रक्षा मंत्री द्वारा जारी भूमि युद्ध सिद्धांत भारतीय सेना को आधुनिक और भविष्योन्मुखी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह सिद्धांत बहु-आयामी युद्धक्षेत्र — हवा, समुद्र, अंतरिक्ष और साइबर — में एकीकृत अभियान संचालन को प्राथमिकता देता है। राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि इन नए आयामों के बढ़ते महत्व के बावजूद, जमीनी युद्ध और थल सेनाएँ रणनीतिक दृष्टि से अपरिहार्य बनी रहेंगी। उन्होंने कहा कि सफलता मल्टी-डोमेन क्षमताओं और संयुक्त अभियानों में सहज समन्वय पर निर्भर करेगी।

ऑपरेशन सिंदूर का संदर्भ और सबक

रक्षा मंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता का उल्लेख करते हुए कहा कि नई सोच, बेहतर तालमेल और उन्नत हथियार प्रणालियों ने इस अभियान को सफल बनाने में निर्णायक भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि इस अभियान ने दुनिया को यह स्पष्ट संदेश दिया कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने से नहीं हिचकेगा। गौरतलब है कि यह वक्तव्य ऐसे समय में आया है जब भारत की क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियाँ लगातार जटिल हो रही हैं।

तकनीक और आत्मनिर्भरता पर जोर

राजनाथ सिंह ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्वायत्त प्रणालियों (Autonomous Systems), डेटा एनालिटिक्स, साइबर सुरक्षा और सुरक्षित संचार नेटवर्क जैसे क्षेत्रों में प्रयासों में तेज़ी लाने की आवश्यकता पर बल दिया। ड्रोन और आधुनिक तकनीक के उपयोग पर विशेष ध्यान देते हुए उन्होंने सेना की पुनर्संरचना की कोशिशों की सराहना की।

रक्षा उत्पादन के मोर्चे पर उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा उत्पादन बढ़कर रिकॉर्ड ₹1.78 लाख करोड़ हो गया और रक्षा निर्यात सर्वकालिक उच्चस्तर ₹38,000 करोड़ पर पहुँच गया। उन्होंने यह श्रेय सभी हितधारकों के संयुक्त प्रयासों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेतृत्व क्षमता को दिया।

सुधार और समावेश: कमांडरों को संदेश

'सुधारों का साल-2025' का उल्लेख करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि सुधार एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है, जिसकी सफलता उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर है। उन्होंने कमांडरों से आग्रह किया कि वे अपने-अपने स्तर पर इन सुधारों को आगे बढ़ाएँ और सुनिश्चित करें कि इनसे परिचालन क्षमताओं को ठोस लाभ मिले। उन्होंने महिलाओं की बढ़ती भागीदारी, बेहतर जनशक्ति प्रबंधन और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एकीकृत दृष्टिकोण अपनाने पर भी विशेष बल दिया।

सम्मान और उपस्थिति

इस अवसर पर राजनाथ सिंह ने वार्षिक संयुक्त राष्ट्र जर्नल का अनावरण किया और उन भारतीय सैनिकों को सम्मानित किया जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र शांति रक्षक के रूप में उत्कृष्ट योगदान दिया। कार्यक्रम में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि, थल सेनाध्यक्ष जनरल धीरज सेठ और रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

यह सम्मेलन भारतीय सेना के वरिष्ठ नेतृत्व को चल रही पहलों की समीक्षा करने, भविष्य की प्राथमिकताएँ तय करने और एक प्रगतिशील, अनुकूलनीय, प्रौद्योगिकी-सक्षम तथा भविष्य के लिए तैयार सेना बनाने की दिशा में नीति-निर्माण का अवसर देता है। आगामी महीनों में इस सिद्धांत के क्रियान्वयन की रूपरेखा स्पष्ट होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन आलोचकों का कहना है कि मात्रा और परिचालन तत्परता हमेशा समानांतर नहीं चलती। AI और स्वायत्त प्रणालियों पर ज़ोर सही दिशा में है, पर इनके आत्मसात करने की रफ़्तार सिद्धांत की महत्वाकांक्षा से मेल खाती है या नहीं — यह परीक्षण अगले कुछ वर्षों में होगा।
RashtraPress
23 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भूमि युद्ध सिद्धांत (Land Warfare Doctrine) क्या है?
भूमि युद्ध सिद्धांत वह रणनीतिक दस्तावेज़ है जो भारतीय सेना को आधुनिक बहु-आयामी युद्धक्षेत्र — हवा, समुद्र, अंतरिक्ष और साइबर — में संचालन के लिए एक व्यापक ढाँचा प्रदान करता है। इसे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 23 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में सेना कमांडरों के सम्मेलन में जारी किया।
राजनाथ सिंह ने सेना कमांडरों को किन प्राथमिकताओं पर ध्यान देने को कहा?
राजनाथ सिंह ने कमांडरों को भू-राजनीतिक और क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर नज़र रखने, AI, स्वायत्त प्रणालियों, साइबर सुरक्षा और ड्रोन तकनीक में क्षमता बढ़ाने तथा आत्मनिर्भरता के सुधारों को प्रभावी ढंग से लागू करने पर ध्यान देने का निर्देश दिया। साथ ही महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और मल्टी-डोमेन संयुक्त अभियानों को प्राथमिकता देने की बात कही।
ऑपरेशन सिंदूर का सेना कमांडरों के सम्मेलन में क्या उल्लेख हुआ?
रक्षा मंत्री ने कहा कि नई सोच, बेहतर तालमेल और उन्नत हथियार प्रणालियों ने ऑपरेशन सिंदूर को सफल बनाया। उन्होंने इसे इस बात का प्रमाण बताया कि भारत राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने से नहीं हिचकेगा।
भारत का रक्षा उत्पादन और निर्यात कितना रहा?
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा उत्पादन रिकॉर्ड ₹1.78 लाख करोड़ रहा और रक्षा निर्यात सर्वकालिक उच्चस्तर ₹38,000 करोड़ पर पहुँचा। राजनाथ सिंह ने यह श्रेय सभी हितधारकों के सामूहिक प्रयासों को दिया।
सेना कमांडरों का यह सम्मेलन क्यों महत्वपूर्ण है?
यह सम्मेलन भारतीय सेना के वरिष्ठ नेतृत्व को चल रही पहलों की समीक्षा करने, भविष्य की प्राथमिकताएँ निर्धारित करने और तकनीक-सक्षम तथा भविष्य के लिए तैयार सेना की दिशा में नीति बनाने का अवसर देता है। इस बार इसमें भूमि युद्ध सिद्धांत जारी करना और UN शांति रक्षकों का सम्मान भी शामिल रहा।
राष्ट्र प्रेस
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