17 अक्टूबर 2026
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परिसीमन पर सर्वदलीय बैठक बुलाए सरकार, राहुल के सवालों से BJP बेचैन: कांग्रेस

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परिसीमन पर सर्वदलीय बैठक बुलाए सरकार, राहुल के सवालों से BJP बेचैन: कांग्रेस

सारांश

कांग्रेस ने परिसीमन पर सर्वदलीय बैठक की माँग करते हुए कहा कि विपक्ष देश की 60% आबादी का प्रतिनिधित्व करता है — उसे नज़रअंदाज़ कर बड़े फैसले नहीं लिए जा सकते। साथ ही, राहुल गांधी के चुनाव आयोग पर सवालों से BJP की बेचैनी को विपक्ष 'असल जवाबदेही की कसौटी' बता रहा है।

मुख्य बातें

कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने 17 अक्टूबर 2026 को कहा कि राहुल गांधी के चुनाव आयोग संबंधी सवालों से BJP में बेचैनी है।
कांग्रेस ने परिसीमन पर विधेयक पेश होने से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाने की माँग की।
भगत ने कहा कि विपक्ष देश की करीब 60% आबादी का प्रतिनिधित्व करता है, उसे चर्चा से बाहर रखना अनुचित होगा।
कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने उत्तर प्रदेश में जलभराव, एक्सप्रेसवे पर गड्ढे और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए।
कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने मुंबई में चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए संस्थाओं को कमज़ोर किए जाने का आरोप लगाया।

कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने 17 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में कहा कि राहुल गांधी द्वारा चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर उठाए गए सवालों ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) को बेचैन कर दिया है। उन्होंने केंद्र सरकार से परिसीमन जैसे संवेदनशील विषय पर कोई भी कदम उठाने से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाने की माँग की।

राहुल गांधी के सवाल और भाजपा की प्रतिक्रिया

सुखदेव भगत के अनुसार, जब भी कांग्रेस नेता राहुल गांधी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर प्रश्न उठाते हैं, भाजपा नेता तत्काल प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बचाव की मुद्रा में आ जाते हैं। भगत ने कहा कि इस प्रतिक्रिया से 'हताशा और बेचैनी' स्पष्ट झलकती है। उनका कहना था कि लोकतंत्र में विपक्ष का दायित्व सरकार से सवाल पूछना है और सत्ता पक्ष का दायित्व उन सवालों का जवाब देना — न कि पलटवार करना।

केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए भगत ने कहा कि विपक्ष पर आरोप लगाने से सरकार अपनी जवाबदेही से नहीं बच सकती।

परिसीमन पर सर्वदलीय बैठक की माँग

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा प्रधानमंत्री को परिसीमन योजनाओं पर चर्चा के लिए पत्र लिखे जाने के संदर्भ में सुखदेव भगत ने कहा कि परिसीमन का देश की राजनीतिक संरचना पर व्यापक और दीर्घकालिक प्रभाव पड़ता है। इसलिए संबंधित विधेयक संसद में पेश किए जाने से पहले सभी दलों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श आवश्यक है।

भगत ने तर्क दिया कि विपक्ष देश की करीब 60 प्रतिशत आबादी का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने कहा कि इतने बड़े जनवर्ग के प्रतिनिधियों को हाशिये पर रखकर लिया गया कोई भी बड़ा निर्णय न तो लोकतांत्रिक दृष्टि से उचित होगा और न ही टिकाऊ।

उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार और विकास कार्यों पर सवाल

लखनऊ में कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि राज्य में 'डबल इंजन और ट्रिपल इंजन' सरकारें विकास के मोर्चे पर विफल साबित हो रही हैं। उन्होंने राज्य में जलभराव, एक्सप्रेसवे पर गड्ढों और निर्माण कार्यों की बढ़ी हुई लागत को लेकर सरकार से जवाब माँगा।

राजपूत ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में भ्रष्टाचार चरम पर है और आम जनता की समस्याओं को गंभीरता से नहीं सुना जा रहा है। गौरतलब है कि एक्सप्रेसवे परियोजनाओं की लागत और गुणवत्ता को लेकर यह ऐसे समय में सवाल उठ रहे हैं जब उत्तर प्रदेश में विपक्षी दल सड़क और अवसंरचना खर्च की पारदर्शिता पर लगातार दबाव बना रहे हैं।

चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर आरोप

मुंबई में कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने कहा कि आम नागरिकों का चुनाव आयोग पर भरोसा कम हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग सरकार के निर्देशों के अनुसार काम करता दिखाई देता है। दलवई ने यह भी कहा कि मौजूदा सरकार उन संस्थाओं को कमज़ोर कर रही है जिन्हें देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के कार्यकाल में स्थापित किया गया था।

यह ऐसे समय में आया है जब परिसीमन की बहस राष्ट्रीय राजनीति में केंद्र में है और विभिन्न राज्यों की पार्टियाँ लोकसभा सीटों के संभावित पुनर्वितरण को लेकर सतर्क हो गई हैं। आने वाले हफ्तों में सरकार की प्रतिक्रिया और सर्वदलीय बैठक की संभावना पर सभी की नज़रें टिकी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन परिसीमन की तकनीकी प्रक्रिया संसद के बाहर भी संवैधानिक आयोग द्वारा संचालित होती है — यह बारीकियाँ बहस में अक्सर गुम हो जाती हैं। चुनाव आयोग पर आरोपों को लेकर विपक्ष की चिंताएँ वैध हो सकती हैं, किंतु ठोस साक्ष्य के बिना ये दावे संस्थागत जवाबदेही की बजाय राजनीतिक आख्यान बन जाते हैं। मुख्यधारा की कवरेज जो चूकती है वह यह है कि परिसीमन पर सर्वदलीय सहमति की माँग स्वयं कांग्रेस के लिए दोधारी तलवार है — अगर सरकार बैठक बुलाए और सहमति बने, तो विपक्षी विरोध का राजनीतिक मूल्य कम हो जाएगा।
RashtraPress
17 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कांग्रेस ने परिसीमन पर सर्वदलीय बैठक की माँग क्यों की?
कांग्रेस का कहना है कि परिसीमन का देश की राजनीतिक संरचना पर दूरगामी प्रभाव पड़ता है और विपक्ष देश की करीब 60% आबादी का प्रतिनिधित्व करता है। इसलिए संबंधित विधेयक संसद में पेश होने से पहले सभी दलों के साथ विस्तृत चर्चा होनी चाहिए।
राहुल गांधी के सवालों से BJP में बेचैनी क्यों है, कांग्रेस ऐसा क्यों मान रही है?
कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत का कहना है कि जब भी राहुल गांधी चुनाव आयोग पर सवाल उठाते हैं, BJP नेता तुरंत प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बचाव में उतर आते हैं — जो 'हताशा और बेचैनी' की निशानी है। भगत के अनुसार सरकार को जवाब देना चाहिए, पलटवार नहीं।
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर क्या आरोप लगाए?
कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने उत्तर प्रदेश में जलभराव, एक्सप्रेसवे पर गड्ढों और निर्माण कार्यों की बढ़ी हुई लागत को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में भ्रष्टाचार चरम पर है और आम जनता की समस्याएँ अनसुनी हैं।
कांग्रेस ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर क्या कहा?
मुंबई में कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने आरोप लगाया कि आम नागरिकों का चुनाव आयोग पर भरोसा कम हुआ है और आयोग सरकार के निर्देशों के अनुसार काम करता दिखाई देता है। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा सरकार पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के कार्यकाल में स्थापित संस्थाओं को कमज़ोर कर रही है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने परिसीमन पर क्या कदम उठाया?
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने परिसीमन योजनाओं पर चर्चा के लिए प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है। इस पर कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने सरकार से सर्वदलीय बैठक बुलाकर सभी दलों के विचारों को शामिल करने की अपील की है।
राष्ट्र प्रेस
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