कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत का बयान, सरमा जेल जाएंगे चुनाव हारने के बाद
सारांश
Key Takeaways
- हिमंता बिस्वा सरमा की मानसिक स्थिति पर सवाल उठाए गए हैं।
- कांग्रेस ने असम चुनाव में भाजपा की रणनीति पर आपत्ति जताई है।
- सुरेंद्र राजपूत ने सरमा के खिलाफ तीखे शब्दों का प्रयोग किया है।
- भाजपा की पुलिस कार्रवाई को कांग्रेस ने कायरता बताया है।
- आने वाले समय में सरमा की जेल जाने की संभावना भी व्यक्त की गई है।
नई दिल्ली, 7 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। असम विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के बारे में सीएम हिमंता बिस्वा सरमा के बयान पर कांग्रेस पार्टी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस के प्रवक्ताओं का मानना है कि चुनाव में हार की चिंता ने सरमा का मानसिक संतुलन बिगाड़ दिया है।
कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत करते हुए कहा कि हिमंता बिस्वा सरमा मानसिक रूप से अस्वस्थ हो गए हैं। उन्हें आगरा के किसी मानसिक स्वास्थ्य संस्थान में भर्ती कराना चाहिए। यहां योगी की सरकार है, उनका इलाज नि:शुल्क होगा और हम उनके बिल का भी प्रबंध कर देंगे। जिस दिन वे बोलेंगे, हम उन्हें टिकट भी भेज देंगे।
सुरेंद्र राजपूत ने आगे कहा कि सरमा हार के डर से, हताश और अवसादित होकर घुटनों पर आ गए हैं। उनके पैरों तले से जमीन खिसक गई है। उनका हजारों करोड़ का भ्रष्टाचार और दुबई में बने उनके दो महल अब बेनकाब हो रहे हैं। इसी स्थिति के कारण वे निराशा में हैं और घुटनों पर आकर बात कर रहे हैं। कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि वह समय आएगा जब हिमंता बिस्वा सरमा जेल जाएंगे।
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि पवन खेड़ा ने सरमा की कमजोर जगह पर प्रहार किया है और इसलिए सरमा गालियां दे रहे हैं। जो दस्तावेज पेश किए गए हैं, वे पूरी तरह प्रमाणित हैं और उनके बयानों से प्रभावित नहीं होंगे।
दूसरी ओर, पवन खेड़ा के निवास पर असम पुलिस की कार्रवाई को कांग्रेस नेताओं ने बदले की राजनीति करार दिया है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने कहा कि असम चुनाव में हार के भय से भाजपा बौखला गई है। भाजपा की सबसे बड़ी कमजोरी यह है कि वह लोकतंत्र की बजाय पुलिस और सरकारी एजेंसियों के पीछे छिपकर वार करती है। असम पुलिस का जिस तरह का दुरुपयोग किया गया है, वह कायरता का प्रतीक है।
कांग्रेस इन सभी प्रयासों से भयभीत नहीं होगी। असम पुलिस, सीबीआई और ईडी का डर दिखाने से कांग्रेस के साहसी नेता प्रभावित नहीं होते। असम की जनता सब देख रही है और वे जान चुके हैं कि भाजपा केवल नफरत फैलाने और डराने में माहिर है। जल्द ही असम की जनता इस तानाशाही सरकार को उचित जवाब देगी।