क्या कांग्रेस ने 10 जनवरी से 'मनरेगा बचाओ संग्राम' का ऐलान किया है?
सारांश
Key Takeaways
- मनरेगा का अधिकार आधारित स्वरूप
- केंद्र सरकार के नए अधिनियम के खिलाफ आंदोलन
- महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 60%
- ग्रामीण आजीविका की रक्षा का उद्देश्य
- आंदोलन के तहत चरणबद्ध कार्यक्रम
नई दिल्ली, 3 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने मनरेगा के अधिकार आधारित स्वरूप की रक्षा हेतु देशभर में एक व्यापक जनआंदोलन की घोषणा की है। कांग्रेस महासचिव और सांसद केसी वेणुगोपाल ने सभी प्रदेश कांग्रेस समितियों (पीसीसी) को पत्र लिखकर 'मनरेगा बचाओ संग्राम' के राष्ट्रव्यापी शुभारंभ की जानकारी दी है।
यह आंदोलन केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित नए विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम के खिलाफ आरंभ किया जा रहा है, जिसे कांग्रेस ने ग्रामीण रोजगार और आजीविका पर सीधा हमला बताया है।
केसी वेणुगोपाल ने पत्र के माध्यम से बताया कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को वर्ष 2005 में यूपीए सरकार द्वारा लागू किया गया था। यह कानून ग्रामीण परिवारों को मजदूरी रोजगार मांगने का कानूनी अधिकार प्रदान करता है। इसके तहत राज्य सरकारों को 15 दिनों के भीतर काम प्रदान करना अनिवार्य है, अन्यथा उन्हें बेरोजगारी भत्ता देना होगा। यही वैधानिक गारंटी मनरेगा की सबसे बड़ी पहचान है।
कांग्रेस का कहना है कि मनरेगा ग्रामीण आजीविका की रीढ़ रहा है, जिससे हर साल 5 से 6 करोड़ परिवारों को रोजगार मिलता है। इससे मजबूरी में पलायन में कमी आई है, ग्रामीण मजदूरी बढ़ी है और गांवों में टिकाऊ सामुदायिक संपत्तियों का निर्माण हुआ है। इस योजना से महिलाएं, दलित, आदिवासी और वंचित वर्गों को विशेष लाभ मिला है। कुल कार्यदिवसों में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 60 प्रतिशत बताई गई है।
कांग्रेस ने नए विकसित भारत जी राम जी अधिनियम पर अपनी आपत्ति जताई है। पार्टी का आरोप है कि यह नया कानून मनरेगा की मूल भावना से पूरी तरह भिन्न है। इससे काम की वैधानिक गारंटी समाप्त हो जाती है, निर्णय लेने का केंद्रीकरण केंद्र सरकार के हाथों में चला जाता है और ग्राम सभाओं तथा पंचायतों की भूमिका कमजोर हो जाती है। इसके अलावा, केंद्र सरकार के मजदूरी योगदान को लगभग 90 प्रतिशत से घटाकर 60 प्रतिशत करने की बात कही गई है, जिससे आर्थिक बोझ राज्यों और श्रमिकों पर पड़ेगा। बजट-सीमित आवंटन, कृषि के व्यस्त मौसम में काम पर रोक और मजदूरी सुरक्षा प्रावधानों के कमजोर होने से रोजगार में कमी और ग्रामीण संकट बढ़ने की संभावना जताई गई है।
कांग्रेस ने यह भी कहा कि योजना से महात्मा गांधी का नाम हटाना श्रम की गरिमा और ग्राम स्वराज के मूल्यों को कमजोर करने जैसा है।
इन्हीं कारणों से कांग्रेस कार्यसमिति ने 27 दिसंबर को हुई बैठक में सर्वसम्मति से 'मनरेगा बचाओ संग्राम' नाम से राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू करने का निर्णय लिया। इस आंदोलन के तहत चरणबद्ध कार्यक्रम तय किए गए हैं। कार्यक्रम के अनुसार, पहले पीसीसी मुख्यालयों में बैठकें होंगी, जिनमें नए कानून के प्रभाव पर चर्चा की जाएगी और जिला-वार जिम्मेदारियां तय की जाएंगी।
सभी जिलों में 10 जनवरी को डीसीसी कार्यालयों पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अभियान का औपचारिक शुभारंभ किया जाएगा। 11 जनवरी को जिला मुख्यालयों या प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर एक दिवसीय उपवास और प्रतीकात्मक विरोध होगा, जिसमें पार्टी नेता, निर्वाचित प्रतिनिधि और मनरेगा श्रमिक शामिल होंगे।
पंचायत स्तर पर 12 से 29 जनवरी तक चौपालें, जनसंपर्क कार्यक्रम, नुक्कड़ सभाएं और पर्चा वितरण किए जाएंगे। वार्ड और ब्लॉक स्तर पर 30 जनवरी को शांतिपूर्ण धरने होंगे। 31 जनवरी से 6 फरवरी के बीच जिला कलेक्टर और जिला मजिस्ट्रेट कार्यालयों पर धरना देकर ज्ञापन सौंपे जाएंगे। 7 से 15 फरवरी तक राज्य स्तर पर विधानसभा घेराव किया जाएगा। अभियान के अंतिम चरण में 16 से 25 फरवरी के बीच एआईसीसी द्वारा चार बड़ी क्षेत्रीय रैलियां आयोजित की जाएंगी।