16 अक्टूबर 2026
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कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा का बड़ा बयान: 'हम सत्ता परिवर्तन लाकर रहेंगे, दब्बू विपक्ष नहीं बनेंगे'

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कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा का बड़ा बयान: 'हम सत्ता परिवर्तन लाकर रहेंगे, दब्बू विपक्ष नहीं बनेंगे'

सारांश

कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने सरकार को सीधी चुनौती दी — 'दब्बू विपक्ष नहीं बनेंगे, सत्ता परिवर्तन लाकर रहेंगे।' 1977 का हवाला, OCI विवाद और प्रशांत भूषण का उदाहरण — यह महज बयानबाजी नहीं, बल्कि कांग्रेस की आक्रामक विपक्षी रणनीति का खुला एलान है।

मुख्य बातें

कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने 16 अक्टूबर 2026 को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए खुलेआम 'सत्ता परिवर्तन' का ऐलान किया।
खेड़ा ने कहा — 'हम दब्बू विपक्ष नहीं बनेंगे'; 1977 के सत्ता परिवर्तन को लोकतांत्रिक उदाहरण के तौर पर पेश किया।
OCI कार्डधारकों के विरोध-प्रदर्शन पर उठे सवालों को खेड़ा ने 'पाखंड और दोहरे मापदंड' बताया।
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बयान पर पलटवार करते हुए कहा — 'संवैधानिक संस्थाओं पर कब्जे से हमेशा राज नहीं होता।' खेड़ा ने प्रशांत भूषण और राहुल गांधी पर निशाना साधने वालों से कहा — 'सवालों का जवाब दें, व्यक्तिगत हमले बंद करें।'

कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने 16 अक्टूबर 2026 को केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी खुलेआम 'सत्ता परिवर्तन' की माँग करती है और इसे 'लोकतांत्रिक अधिकार' बताया। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने भी रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि सत्ता परिवर्तन अवश्यंभावी है। दोनों नेताओं की यह प्रतिक्रिया उस विवाद के बाद आई है जिसमें विपक्षी नेताओं के 'व्यवस्था बदलने' वाले बयानों पर सत्तारूढ़ दल ने सवाल उठाए थे।

पवन खेड़ा का सीधा जवाब

खेड़ा ने कहा, 'हम इस शासन को बदलने की बात करते हैं। हम ऐसा करना जारी रखेंगे, और हम वह बदलाव लाकर रहेंगे। आप उम्मीद करते हैं कि हम एक ऐसी दब्बू विपक्ष की भूमिका निभाएं, जो अपनी पूंछ हिलाती रहे। मुझे खेद है, लेकिन हम ऐसा नहीं करेंगे।' उन्होंने 1977 के सत्ता परिवर्तन का हवाला देते हुए कहा कि लोकतंत्र में सड़क पर उतरना और आंदोलन करना विपक्ष का स्वाभाविक अधिकार है।

ओसीआई विवाद पर तीखी प्रतिक्रिया

खेड़ा ने 'ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया' (OCI) कार्डधारकों पर उठे सवाल को दोहरे मापदंड का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि जब प्रवासी भारतीय विदेश में डांडिया मनाते हैं तो सरकार उनकी प्रशंसा करती है, लेकिन जब वही लोग भारत आकर सवाल उठाते हैं तो उन्हें 'देशद्रोही' कहा जाता है। यह टिप्पणी इमरान खान — जो OCI कार्डधारक बताए जा रहे हैं — के विरोध-प्रदर्शन में हिस्सेदारी पर उठे सवालों के संदर्भ में की गई।

प्रशांत भूषण और राहुल गांधी का ज़िक्र

खेड़ा ने प्रशांत भूषण का उदाहरण देते हुए कहा कि 2013 में जब भूषण सत्ता परिवर्तन की बात करते थे तब वे 'दोस्त' थे, लेकिन अब वही बात करने पर 'दुश्मन' बन गए। उन्होंने नेहा राठौर और कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर होने वाले निजी हमलों का उल्लेख किया और कहा कि सवालों के जवाब देने की बजाय सरकार व्यक्तिगत आरोपों का सहारा लेती है।

इमरान मसूद का पलटवार

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'सत्ता बदलेगी, इसे बदलना ही है। क्या आपको लगता है कि आप अमर हैं? आप संवैधानिक संस्थाओं पर कब्जा करके, उन्हें बर्बाद करके हमेशा के लिए राज करने की उम्मीद नहीं कर सकते।' उनका यह बयान BJP नेताओं के उस आरोप के जवाब में आया जिसमें विपक्ष की भाषा को 'असंसदीय' और 'लोकतंत्र-विरोधी' बताया गया था।

राजनीतिक पृष्ठभूमि

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) सरकार के खिलाफ व्यापक जन-आंदोलन की रणनीति बना रही है। गौरतलब है कि 'सत्ता परिवर्तन' की भाषा को लेकर सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के बीच यह वाकयुद्ध पहली बार नहीं है — 2024 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान भी इसी तरह के बयानों पर तीखी नोंकझोंक हुई थी। लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका और 'सत्ता परिवर्तन' की सामान्य राजनीतिक माँग को लेकर यह बहस आगे भी जारी रहने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असल में यह लोकतंत्र की बुनियादी भाषा है — किसी भी विपक्षी दल का चुनावी सत्ता परिवर्तन माँगना संवैधानिक रूप से पूरी तरह वैध है। असली सवाल यह है कि इस 'सामान्य' बयान को विवादास्पद क्यों बनाया जा रहा है। यह बहस विपक्ष की भाषा पर नहीं, बल्कि इस बात पर होनी चाहिए कि कांग्रेस के पास सत्ता परिवर्तन के लिए कोई ठोस वैकल्पिक एजेंडा है या नहीं। OCI विवाद वाला कोण कहीं अधिक महत्वपूर्ण है — यह प्रवासी भारतीयों की राजनीतिक भागीदारी की सीमाओं पर एक गंभीर संवैधानिक प्रश्न उठाता है जिस पर मुख्यधारा की कवरेज पर्याप्त ध्यान नहीं दे रही।
RashtraPress
16 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पवन खेड़ा ने 'सत्ता परिवर्तन' को लेकर क्या कहा?
कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने 16 अक्टूबर 2026 को स्पष्ट किया कि कांग्रेस खुलेआम सत्ता परिवर्तन चाहती है और इसे लोकतांत्रिक अधिकार बताया। उन्होंने कहा कि विपक्ष 'दब्बू' बनकर नहीं रहेगा और 1977 का उदाहरण देते हुए यह साबित किया कि लोकतंत्र में सत्ता परिवर्तन की माँग करना पूरी तरह वैध है।
इमरान मसूद ने राजनाथ सिंह के बयान पर क्या जवाब दिया?
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि संवैधानिक संस्थाओं पर कब्जा करके कोई हमेशा के लिए सत्ता में नहीं रह सकता। उन्होंने कहा — 'सत्ता बदलेगी, इसे बदलना ही है।'
OCI कार्डधारकों के विरोध-प्रदर्शन पर खेड़ा ने क्या कहा?
पवन खेड़ा ने कहा कि जब OCI कार्डधारक विदेश में भारतीय त्योहार मनाते हैं तो सरकार उनकी तारीफ करती है, लेकिन जब वही लोग भारत आकर सवाल उठाते हैं तो उन्हें 'देशद्रोही' कहा जाता है। खेड़ा ने इसे 'पाखंड और दोहरे मापदंड' करार दिया।
कांग्रेस ने प्रशांत भूषण का उदाहरण क्यों दिया?
पवन खेड़ा ने प्रशांत भूषण का हवाला देते हुए कहा कि 2013 में जब भूषण सत्ता परिवर्तन की माँग कर रहे थे, तब सत्तारूढ़ दल उनका समर्थन करता था, लेकिन अब वही बात करने पर उन्हें 'दुश्मन' बताया जाता है। खेड़ा ने इसे दोहरे मापदंड का उदाहरण बताया।
यह विवाद किस संदर्भ में सामने आया?
यह बयानबाजी उस पृष्ठभूमि में आई जब BJP ने कांग्रेस नेताओं के 'व्यवस्था बदलने' वाले बयानों को 'असंसदीय' और 'लोकतंत्र-विरोधी' बताया था। कांग्रेस ने पलटवार करते हुए कहा कि चुनावी सत्ता परिवर्तन की माँग करना किसी भी विपक्षी दल का संवैधानिक अधिकार है।
राष्ट्र प्रेस
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