टिहरी के कॉर्न विलेज सैंजी में CDO वरुणा अग्रवाल का दौरा, स्वीट कॉर्न खेती को मिला प्रशासनिक बल
सारांश
मुख्य बातें
उत्तराखंड के टिहरी जिले की मुख्य विकास अधिकारी वरुणा अग्रवाल ने 1 अगस्त 2026 को जौनपुर के ग्राम सैंजी का दौरा किया और कृषि विभाग द्वारा विकसित किए जा रहे कॉर्न विलेज की प्रगति का सीधे खेतों में जाकर जायजा लिया। उन्होंने किसानों से स्वीट कॉर्न की खेती के अनुभव और उत्पादन की स्थिति के बारे में विस्तार से जानकारी ली।
कॉर्न विलेज योजना का विस्तार
मुख्य कृषि अधिकारी विजय देवराड़ी ने बताया कि ग्राम सैंजी सहित आसपास के 8 अन्य गाँवों में खरीफ सीजन के लिए किसानों को स्वीट कॉर्न, हाइब्रिड मक्का तथा राजमा/बीन्स के बीज उपलब्ध कराए गए हैं। किसानों की माँग के अनुसार स्वीट कॉर्न की उन्नत प्रजाति और आवश्यक कृषि दवाइयाँ भी वितरित की गई हैं। इसके अतिरिक्त, न्याय पंचायत कृषि अधिकारी द्वारा समय-समय पर किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन दिया जा रहा है।
ग्राम प्रधान और किसानों की भागीदारी
ग्राम प्रधान कुसुम रावत ने बताया कि योजना की शुरुआत से ही कृषि विभाग ने किसानों के साथ गोष्ठियाँ आयोजित कर उन्हें इस पहल की पूरी जानकारी दी और उनसे बीज की माँग एकत्र की। माँग के अनुरूप बीज एवं अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई गई, जिससे ग्रामीणों में इस फसल के प्रति उत्साह में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
मुख्य विकास अधिकारी के निर्देश
CDO वरुणा अग्रवाल ने खेतों में तैयार स्वीट कॉर्न की फसल का निरीक्षण करते हुए किसानों और कृषि विभाग के प्रयासों की सराहना की। दौरे के दौरान ग्रामीणों ने उपस्थित अधिकारियों को अपने खेतों में उत्पादित स्वीट कॉर्न का स्वाद भी चखाया। उन्होंने किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को अधिक लाभकारी बनाने के लिए खेतों में घेरबाड़ कराने तथा किसान समूह को मक्का थ्रेशर उपलब्ध कराने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए।
व्यापक कृषि विविधीकरण की दिशा
यह ऐसे समय में आया है जब टिहरी प्रशासन कृषि विविधीकरण को तेज़ी से आगे बढ़ा रहा है। गौरतलब है कि चारधाम यात्रा के प्रमुख मार्ग पर स्थित होने के कारण इस जिले में हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं, जिससे स्थानीय कृषि उत्पादों की माँग लगातार बनी रहती है। CDO अग्रवाल ने पहले भी बताया था कि जिले में होटल, रेस्तरां और पर्यटन प्रतिष्ठानों की बड़ी संख्या को देखते हुए महिलाओं को मशरूम उत्पादन के लिए प्रशिक्षित और प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि स्थानीय माँग की पूर्ति के साथ-साथ रोज़गार के अवसर भी बढ़ सकें। कॉर्न विलेज पहल इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
आगे की राह
कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सैंजी और आसपास के 9 गाँवों में इस मॉडल की सफलता के आधार पर इसे और अधिक गाँवों तक विस्तारित करने की संभावना है। घेरबाड़ और मक्का थ्रेशर जैसी बुनियादी सुविधाएँ मिलने से किसानों की उत्पादन लागत घटेगी और बाज़ार तक पहुँच आसान होगी।